खड़ी कराई के विवाद में सियागंज में कराई थी हत्या
इंदौर।
कांग्रेस के टिकट पर पार्षद का चुनाव लड़ चुके गुंडे कपिल सोनकर सहित छह आरोपियों को जिला एवं सत्र न्यायालय ने 11 साल पहले हुए मनोहर वर्मा हत्याकांड में उम्रकैद की सजा सुनाई है। शुक्रवार को अपर सत्र न्यायाधीश की कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट से ही सभी को जेल भेज दिया। सरकारी गवाह तत्कालीन नायब तहसीलदार, दो आरक्षक और मरने से पहले वर्मा के बयान सजा का आधार बने।

एजीपी विशाल श्रीवास्तव के मुताबिक आरोपी कपिल पिता रणजीत सोनकर निवासी लुनियापुरा, तनवीर उर्फ नन्नू खान, देवेंद्र पिता प्रेमसिंह चौहान, कालू उर्फ पप्पू चौहान, जयपालसिंह अहिरवार, भूपेंद्र उर्फ धमेंद्र ठाकुर को कोर्ट ने दोषी मानते हुए उम्रकैद और अर्थदंड किया है। 19 दिसंबर 2011 को सुबह साढ़े आठ बजे वेयर हाउस रोड पर मनोहर वर्मा को गोली मारी थी। सियागंज के व्यापारियों से खड़ी कराई को लेकर वर्मा और सोनकर के बीच विवाद चल रहा था। हत्या के बाद पुलिस ने कपिल सहित सभी को गिरफ्तार कर लिया था। बाद में कपिल को जमानत मिल गई थी। पुलिस ने इस मामले की जांच के बाद चालान पेश किया था।
जांच में खुलासा हुआ था कि हत्या में बदमाश कपिल पिता रंजीत सोनकर निवासी लुनियापुरा का हाथ है। पुलिस ने घटना में शामिल तनवीर, कालू व देवेंद्र निवासी लुनियापुरा को गिरफ्तार कर लिया था। आरोपियों ने बाद में कबूल कर लिया था कि उन्होंने कपिल के इशारे पर सागर के शूटर भूपेंद्र ठाकुर व दो बदमाशों के साथ घटना को अंजाम दिया था। एजीपी विशाल श्रीवास्तव के मुताबिक न्यायाधीश मनोज तिवारी ने कपिल सोनकर सहित 6 आरोपियों को दोहरी उम्रकैद की सजा से दंडित किया है। कपिल सोनकर सहित तनवीर, देवेंद्र ,कालू उर्फ पप्पू , जयपाल सिंह, भूपेंद्र उर्फ़ धर्मेंद्र ठाकुर और एक अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
आरोपियों को सजा का सुनकर कोर्ट में मौजूद परिजन रोने लगे
कपिल सहित सभी हत्यारों को सजा दिलाने के लिए पुलिस ने सरकारी गवाह पेश किए थे। पुलिस ने हत्या का जो घटनाक्रम बताया, वही गवाहों ने भी कोर्ट में दोहराया। वहीं, मरने से पहले वर्मा के बयान आरोपियों की सजा का प्रमुख आधार बने। जैसे ही हत्या और हत्या का षड्यंत्र रचने की धाराओं में आरोपियों को सजा सुनाई गई तो कोर्ट परिसर में मौजूद आरोपियों के परिजन रोने लगे।
वर्मा का मृत्यु पूर्व बयान भी बना अहम आधार
गोली लगने के बाद मनोहर वर्मा को दो आरक्षक एमवाय अस्पताल ले गए थे। वहां पर तत्कालीन नायब तहसीलदार लाखन सिंह ने उसके बयान दर्ज किए थे। वर्मा ने बयान में कहा था कि कपिल सोनकर के साथियों ने मुझे गोली मारी है। मैं उन सभी को जानता हूं। पुलिस ने इस मामले में 38 गवाह पेश किए थे। इनमें से अधिकांश गवाह पलट गए थे। वर्मा के बयान और सरकारी गवाहों की वजह से सजा मिल पाई है।





