अग्नि आलोक
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अब मशाल जलाओ

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© शंभू राय

जिंदगी बढ़ रही है निरंतर,
तेज रफ्तार रेल-सी आगे…!
रूकना यहाँ मना है..!
लगी है होड़ आपस में,
खुद आगे निकलने के लिए,
दौड़ में शामिल है सभी यहाँ…!
तू भी अपनी रफ्तार बढ़ा..!
क्या होगा आगे ?
सोचकर यह पहले ही,
अपने अंदर ना मायूसी का माहौल बना..!
चलो अब निकलो भी..!
अटुट हौसले के साथ!
अपने मंजिल की तलाश में!
वक्त किसी के लिए थमता नहीं है,
लोग आगे निकल जाएंगे जब,
जिंदगी तब धक्का देकर तुम्हें,
पीछे धकेल देगी…!
कोई ना पास आएगा..!
तू किसके इंतजार में बैठा है ?
अब तक…!
हवाएं भी अकसर रूख बदल लेती हैं..!
दौर चल रहा हो जब, .
जीवन में संघर्षों का…!

तब भी तू निडर होकर उठ..!
अपने अंदर एक मशाल जला..!
रोशनी से उसकी,
तू तब तक प्रेरित होता रहेगा..!
जब तक तुम खुद को नहीं कर दोगे…,
साबित सही…!
लोगो को कोई मौका मत दे,
तनिक भी सोचने का..!
जिंदगी में हैं अनेकों गम…!
समस्या भी हल नहीं होगें,
सिर्फ बातों से तुम्हारे..!
तू अब उठ, कमर को भी ले कस,
बहा पसीना अपना..!
मंजिल खुद तराशेगी तुम्हारे कमियों को,
निखरता जाएगा तू खुद ही..!
मेहनत से अपने..!
योद्धा बनेगा तू भी अजय,
जिंदगी में अपने….!
पराजित ना कर पाएगा तुझे कोई।

© शंभू राय
सिलिगुडी़,प०बंगाल

Ramswaroop Mantri

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