अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

भोपाल व इंदौर में दस माह के लिए होंगे शराब के ठेके…प्रदेश के शराब समूहों से दस प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया

Share

भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। वित्तीय वर्ष २०२१-२२ के लिए सरकार ने जो नवीनीकरण करने के लिये प्रदेश के शराब समूहों से दस प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है और इस बढ़ोतरी के प्रस्ताव में भोपाल में ७१४ व इंदौर में ९१० करोड़ रुपये के दस महीने के लिये शराब के ठेके देने की बात कही गई है, हालांकि दस प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव को ३१८ शराब समूहों ने स्वीकार करते हुए नवीनीकरण करा लिया है लेकिन मजे की बात तो यह है कि अलीराजपुर और झाबुआ जो शराब तस्करी के लिये जाने जाते हैं इन जिलों में नवीनीकरण करने में शराब समूहों ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई उनमें से अलीराजपुर जिले में शराब के ठेका लेने के लिये किसी ने रुचि नहीं दिखाई

यह अजीब बात है जबकि यह सभी जानते हैं कि आदिवासी बाहुल्य जिला झाबुआ के छोटे से गांव पिटोल में इंदौर से ज्यादा बीयर बिकती है यही स्थिति अलीराजपुर की है जहां गांव-गांव में अवैध शराब की बिक्री धड़ल्ले से तो चलती ही है साथ ही अलीराजपुर की सड़कों पर जगह-जगह प्रशासन की मिलीभगत से धड़ल्ले से ताड़ी का व्यापार फल-फूल रहा है, यही नहीं मजे की बात तो यह है कि सरकार की नीतियों के चलते और छत्तीसगढ़ में शराब का कारोबार सरकार के हाथों में आने के साथ ही छत्तीसगढ़ के साथ ही महाराष्ट्र के वर्धा में अवैध शराब का कारोबार छिंदवाड़ा और बालाघाट सिवनी मण्डला से संचालित हो रहा है उनमें से छिंदवाड़ा, बालाघाट और दमोह जिले में शराब समूहों ने नवीनीकरण करा लिया है

वित्तीय वर्ष २०२१-२२ के लिये शराब की नीति का जो प्रस्ताव सरकार द्वारा तैयार किया गया है उसमें प्रदेश में शराब की दुकानों का नवीनीकरण का प्रस्ताव देने का बुधवार को अंतिम दिन था लेकिन अलीराजपुर, अनूपपुर, देवास, छतरपुर, दतिया, धार, होशंगाबाद, झाबुआ, खरगौन, मण्डला, निवाड़ी, पन्ना, सिवनी, शहडोल, शाजापुर, श्योपुर, सीधी और उमरिया जिलों में नवीनीकरण नहीं हुए हैं, सरकार के इस प्रस्ताव से यह साफ झलकता है कि जिन शिवराज सिंह का कमलनाथ की सरकार के दौरान शराब को लेकर जो वीडियो वायरल हुआ था वह अपनी स्वयं की सरकार में ऐसा लगता है कि शराब से अधिक राजस्व वसूल करने के प्रयास में शिवराज सरकार लगी हुई है लेकिन इसके बावजूद भी अलीराजपुर और झाबुआ में शराब के ठेकों के नवीनीकरण न होने की भी बात लोगों के गले नहीं उतर रही है जबकि यह वह जिले हैं जिसमें झाबुआ अलीराजपुर जिले के प्रभारी मंत्री होने के नाते तत्कालीन प्रभारी मंत्री विश्वास सारंग ने झाबुआ के सर्किट हाउस में अधिकारियों व भाजपा नेताओं की एक बैठक बुलाई थी और इस बैठक में भाजपा के अधिकांश नेताओं ने विश्वास सारंग के सामने यह मुद्दा रखा था कि इस जिले में शराब माफिया इतना शक्तिशाली है कि वह पुलिस से झूठे प्रकरण दर्ज करवाकर पंचों और सरपंचों को जेल भिजवाने का काम कर रहा है मजे की बात यह है कि उस बैठक में शराब माफिया के बारे में जो भाजपा नेताओं ने शिकायत की थी उसके बाद भी विश्वास सारंग शराब माफियाओं के दबाव के चलते पुलिस विभाग जिन भाजपा के नेताओं के साथ पंच और सरपंचों को जेल भिजवा रहा था उसे नहीं रोक पाये, यही नहीं इसी झाबुआ और अलीराजपुर में अवैध शराब के कारोबार को लेकर कांग्रेस के नेताओं और आदिवासियों के स्वयंभू नेता कांतिलाल भूरिया की भतीजी स्वर्गीय कलावती भूरिया ने शराब माफिया के खिलाफ आंदोलन करने की चेतावनी दी थी वह भी कुछ नहीं कर पाईं

ऐसे एक नहीं अनेकों उदारहण हैं कि इन जिलों में शराब माफियाओं के दबाव में राजनेता कुछ नहीं कर पाते हैं तो वहीं धार, झाबुआ व अलीराजपुर के प्रभारी मंत्री होने के नाते कई मंत्रियों के शराब कारोबारियों से घनिष्टता के किस्से भी काफ ी चर्चाओं में रहे हैं, वित्तीय वर्ष २०२०-२१ के प्रस्ताव को देखकर तो यही समझ में आता है कि एक ओर जहां शिवराज सिंह चौहान शराब पर पाबंदी लगाने की बात कहते हैं दूसरी ओर इस तरह की नवीनीकरण का प्रस्ताव बनाकर उससे राजस्व वसूलने के साथ ही शराब को घर पहुंच सेवा बनाने के प्रयास में भी लगे रहते हैं, यही वजह है कि प्रदेश में शराब का कारोबार इस तरह से फल फूल रहा है कि लोगों को रात दस बजे के बाद बच्चों का दूध नहीं मिलेगा लेकिन सुरा प्रेमियों को शराब २४ घंटे उपलब्ध रहती है इसका जीता-जागता उदाहरण है जिसमें जगह-जगह पुलिस का पहरा है और आम नागरिक को वह सड़क पर घूमने पर उसके साथ किस तरह का बर्ताव कर रही है लेकिन इसके बाद भी अवैध शराब के कारोबारियों के शराब का कारोबार जमकर फल-फूल रहा है और धड़ल्ले से शराब इस लॉकडाउन के दौरान बिक रही है कुल मिलाकर शराब से अधिक से अधिक राजस्व वसूलने के लिये सरकार ने जो प्रस्ताव तैयार किया है उससे तो यही लगता है कि प्रदेश में चाहे कांग्रेस की सरकार हो या भाजपा की दोनों ही दलों की सरकारें शराब से अधिक से अधिक राजस्व वसूली करने के लिये शराब कारोबारियों को संरक्षण प्रदान करने में रुचि दिखाती रहती हैं।

 प्रदेश में चाहे भाजपा की सरकार हो या कांग्रेस शराब से ज्यादा राजस्व वसूलने की हर कोई सरकार में नीति बनाई जाती है यह अलग बात है कि कमलनाथ की कांग्रेस सरकार के समय शिवराज सिंह चौहान का अवैध शराब को लेकर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वह कह रहे थे कि वह शराब को इस तरह से फैला दो कि लोग शराब पीकर मस्त रहें, यह अलग बात है कि इन्हीं शिवराज सिंह के शासनकाल में जब नगर निगम भोपाल के चुनाव प्रचार के समय जब आलोक शर्मा महापौर प्रत्याशी के समर्थन में शिवराज व उनकी धर्मपपत्नी साधना सिंह प्रचार करने झुग्गियों में गई थीं तो वहां की महिलाओं ने एक नहीं अनेकों जगह शराब को लेकर दोनों से शिकायत की थी कि अभी तक तो आपकी सरकार ने शराब की दुकानें जल्दी बंद हो जाती थीं तो हमारे पति शराब पीकर आकर हमारी व हमारे बच्चों की पिटाई करते थे तो वहीं कांग्रेस की कमलनाथ की सरकार के समय तो शराब के प्रचार के लिये मैजिक वाहनों पर अहाते तक शराब पीने वालों को नि:शुल्क लाने-ला जाने के बैनर लगे मैजिक वाहनों की खबरें भी सुर्खियों में रहीं यही नहीं कमलनाथ की सरकार में तो महिलाओं और बच्चों को शराब का आदि बनाने के लिये भरपूर प्रयास किये गये थे तभी तो इंदौर में २४ घंटे महिलाओं के लिये बीयर बार खोलने की योजना बनाई गई थी तो वहीं शराब को घर पहुंच सेवा बनाकर राजस्व वसूलने के लिये दोनों ही दलों की सरकारें हमेशा प्रयास करती रही हैं यह अलग बात है कि राजनेता शराब बंदी और शराब को लेकर तरह-तरह की बयानबाजी करते रहते हैं ऐसे में जब सरकार शराब से अधिक राजस्व वसूली करने की योजना बना रही है तो ऐसे ही समय में सुश्री उमा भारती शराब बंदी को लेकर पूरे प्रदेश में जन आंदोलन तक चलाने की बात कह रही हैं, हालांकि कोरोनाकाल में सरकार के आदेश से पूरे प्रदेश में शराब की दुकानें बंद हैं लेकिन इस दौरान शराब की जिस प्रकार से तस्करी हो रही है उसका उदाहरण हाल ही में इंदौर के संभागायुक्त डॉ. पवन शर्मा ने सरकारी अमले की मिलीभगत से अवैध शराब की बिक्री-तस्करी की शिकायतें मिलने पर शर्मा ने जब कार्रवाई की तो लॉकडाउन के दौरान गैर कानूनी तरीके से शराब बनाने और गुजरात भेजने का खुलासा हुआ है, यही नहीं राजधानी भोपाल में भी आये दिन अवैध शराब के कारोबारियों को दबोचे जाने की घटनायें प्रकाश में आती हैं इससे यह साफ जाहिर होता है कि सरकार की नीतियों के चलते शराब के प्रति लोगों की रुचि कुछ ज्यादा ही हो गई है,

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें