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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव : दिग्गजों का लिटमस टेस्ट

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राकेश श्रीवास्तव 
उप्र मे छठे चरण के चुनाव के साथ ही 347 सीटों अर्थात लगभग 86% सीटों पर प्रत्याशियों की किस्मत बंद हो गई है।  अंतिम दो चरणों मे दिग्गजों के कौशल की असली परीक्षा हुई है।छठे चरण की सीटों मे से 48 पर बीजेपी गठबंधन, 2 पर सपा,5 पर बसपा और एक एक पर कॉंग्रेस और निर्दलीय का कब्जा है।जयंत चौधरी के जाटलैंड,बृज,अखिलेश यादव के यादवलैंड,बुंदेलखंड,रुहेलखंड,अवध,केशव प्रसाद मौर्या के कौशांबी से बढ़ता हुआ रण अब पूर्वांचल मे उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के गढ़ गोरखपुर से होता हुआ प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंच कर समाप्त होगा।छठे चरण मे दस जिलों की 57 सीटों पर मतदान हुआ है।इनमे से बलिया, देवरिया,कुशीनगर और महराजगंज की सीमाएं बिहार से लगी होने के कारण अलग राजनैतिक मिजाज़ दिखता है जिसका असर आसपास के जिलों गोरखपुर, संतकबीरनगर, बस्ती और अंबेडकरनगर पर भी पड़ना स्वाभाविक है।बलरामपुर, सिद्धार्थनगर और महराजगंज की सीमाएं नेपाल से लगे होने के कारण वहां के सहज आवागमन और व्यापार होता रहता है। 


हर दल के प्रमुख नेताओं द्वारा दलबदल करने के कारण इस चरण के समीकरण एकाएक बदल गये हैं।स्वामी प्रसाद मौर्या, दारा सिंह चौहान, धर्म सिंह सैनी और एवं सहयोगियों ने कमल कमल मुरझाता देख साईकिल पर बैठ लिए।आर पी एन सिंह कांग्रेस से हाथ छुड़ाकर कमल खिला रहे हैं।बसपा के दिग्गज लालजी वर्मा हाथी की सवारी न कर सरपट साईकिल दौडा रहे हैं।ओमप्रकाश राजभर अपनी पार्टी सुभासपा के साथ पिछले चुनाव मे बीजेपी के साथ सामाजिक न्याय ढूंढ रहे थे पर निराश होकर साईकिल को खींचने मे मदद कर रहे हैं।संजय निषाद की निषाद पार्टी बीजेपी की नौका पार लगाने के लिए नाव खे रही है।अनुप्रिया पटेल बीजेपी के साथ पूरे दमखम से हुये साईकिल के रास्ते मे उप्र की सड़कों की तरह गड्ढे बनाने मे लगी हैं। वहीं अपना दल कमेरावादी की पल्लवी पटेल अपनी मां कृष्णा पटेल के साथ समाजवादी पार्टी की साईकिल के लिए गड्ढे ठीक कर रही हैं।
आशंकाओं के विपरीत धार्मिक उन्माद जैसी स्थितियां नहीं दिख रही हैं।मन्दिर निर्माण के कारण ध्रुवीकरण हो सकता था परंतु जमीनी स्तर पर यह दिख नहीं रहा है।फिर भी इसके अन्डरकरेंट होने की सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।इसी प्रकार इस क्षेत्र की गरीबी को देखते हुए बीजेपी की किसान सम्मान निधि,शौचालय निर्माण,राशन वितरण और विशेषकर लोगों को नमक का कर्ज याद दिलाने की रणनीति लाभ दिला सकती है।शहरी वर्ग को सुरक्षा, राष्ट्रवाद और हिन्दू सशक्तिकरण नाम पर आकर्षित किया जा रहा है।वहीं विपक्षी दल एंटीएनकम्बेन्सी,रोजगार,महंगाई,शिक्षा,स्वास्थ्य,कोरोना कुप्रबंधन,छुट्टा जानवर,सुरक्षा आदि के मुद्दों से कड़ी टक्कर दे रहे हैं।बसपा अपने कोर वोटर से आश्वस्त है।कांग्रेस प्रियंका गांधी के सहारे अपने परम्परागत वोटरों को लुभाने के साथ नया जोश भरने की कोशिश मे लगी हैं।सपा प्रमुख के विभिन्न क्षेत्रों के अनुसार सहयोगी दलों से गठबंधन की भी आखिरी दोनों चरणों मे परीक्षा है।पुरानी पेंशन बहाली का आश्वासन भी गेम चेंजर हो सकता है।बीजेपी और बीएसपी द्वारा एक दूसरे के प्रति नरमी बरतने से एक अंडरकरेंट भी सपा के पक्ष मे लग रहा है। 
माननीय गृह मंत्री अमित शाह का कहना कि मुस्लिम वोट बीएसपी की तरफ जा रहा है तथा माननीय प्रधानमंत्री का कहना कि बीएसपी के शासन मे कानून व्यवस्था अच्छी थी, कुछ विशेष संकेत दे रहे हैं। मतदाता भ्रमित है कि जिनके विरोध मे वोट दे रहा है, कहीं वही मिलकर सरकार न बना लें।सभी दल कानून व्यवस्था के जो भी बड़े-बड़े वादे करें परंतु सभी ने दागी छवि के प्रत्याशियों को टिकट देने से परहेज नहीं किया है। 
इस चरण मे लगभग 55 प्रतिशत मतदाताओं ने दिग्गजों जैसे मुख्यमंत्री आदित्य नाथ,अनेक मंत्री और पूर्व मंत्री जैसे स्वामी प्रसाद मौर्या, लालजी वर्मा, राम अचल राजभर, सूर्य प्रताप साही, ब्रम्हाशंकर त्रिपाठी, जय प्रताप सिंह, सतीश चंद्र द्विवेदी,श्रीराम चौहान,जयप्रकाश निषाद, मुख्यमंत्री के सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी, उप्र कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू, नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी, विनय तिवारी आदि का भाग्य ईवीएम मे बन्द कर दिया है।अब 7 मार्च को वाराणसी समेत 10 जिलों की 54 सीटों पर मतदान के साथ ही उप्र की सभी सीटों पर मतदान पूरा हो जाएगा। 

Ramswaroop Mantri

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