डॉ. प्रिया
_अगर आपका लिवर छोटा, कठोर हैं, सूजा हुआ हैं तो ये प्रयोग ऐसे में अचूक हैं। आप अनेक दवाये खा खा कर परेशान हो गए हैं तो ये एक बार इसको ज़रूर अपनाएं :_
एक कागजी निम्बू (अच्छा पका हुआ) लेकर उसके दो टुकड़े कर ले।
फिर बीज निकालकर आधे निम्बू के बिना काटे चार भाग करें पर टुकड़े अलग अलग न हो।
तत्पश्चात एक भाग में काली मिर्च का चूर्ण, दूसरे में काला नमक (अथवा सेंधा नमक) तीसरे में सोंठ का चूर्ण और चौथे में मिश्री का चूर्ण (या शक्कर) भर दे।
रात को प्लेट में रखकर ढक दे।
प्रात: भोजन करने से एक घंटे पहले इस निम्बू की फांक को मंदी आंच या तवे पर गर्म करके चूस ले।
*इस प्रयोग से लाभ :*
● आवश्यकता अनुसार सात दिन से इक्कीस दिन लेने से लीवर सही हो जाता है।
● इससे यकृत विकार ठीक होने के साथ पेट दर्द और मुंह का जायका ठीक होगा।
● यकृत के कठोर और छोटा होने के रोग (लिवर के सिरोसीस) में अचूक है।
पुराना मलेरिया, ज्वर, कुनैन या पारा के दुर्व्यवहार, अधिक मधपान, अधिक मिठाई खाना, अमेबिक पेचिश के रोगाणु का यकृत में प्रवेश आदि कारणों से यकृत रोगो की उत्पत्ति होती हैं।
बुखार ठीक होने के बाद भी यकृत की बीमारी बनी रहती है और यकृत कठोर और पहले से बड़ा हो जाता हैं।
_रोग के घातक रूप ले लेने से यकृत का संकोचन या सिरोसीस (Cirrhosis of liver) होता है। यकृत रोगो में आँखों व चेहरा रक्तहीन, जीभ सफ़ेद, रक्ताल्पता, नीली नसे, कमजोरी, कब्ज, गैस और बिगड़ा स्वाद, दाहिने कंधे के पीछे दर्द, शौच आंवयुक्त कीचड़ जैसा होना, आदि लक्षण प्रतीत होते है।_
*सावधानी..!*
● दो सप्ताह तक चीनी अथवा मीठा का इस्तमाल न करे।
● अगर दूध मीठा पीते हो तो चीनी के बजाए दूध में चार-पांच मुनक्का डाल कर मीठा कर ले।
● रोटी भी कम खाए।
अच्छा होगा कि जब उपचार चल रहा हो तो रोटी बिलकुल न खाकर सब्जिया और फल से ही गुजारा कर ले।
● सब्जी में मसाला न डालें।
टमाटर, पालक, गाजर, बथुआ, करेला, लोकी, आदि शाक, सब्जियां
और पपीता, आंवला, जामुन, सेब, आलूबुखारा, लीची आदि फल तथा छाछ आदि का अधिक प्रयोग करें।
घी और तली वस्तुओं का प्रयोग कम से कम करें।
_पंद्रह दिन में इस प्रयोग के साथ जिगर ठीक हो जायेगा।_





