
–सुसंस्कृति परिहार
कायनात भी कभी कभी दुख और दर्द को महसूस करते हुए कुछ ऐसी स्थितियों को जन्म देती है जिसे हमें महसूस करने और समझने की कोशिश करनी चाहिए।ऐसा अक्सर होता रहा है जैसे किसी लोकप्रिय नेता की मौत के बाद भूकंप के झटके आना, आंधी-तूफान आना या घटाटोप वारिश का आ जाना।आज यही हाल भारत का है जब आज होली के रंग में सबको सराबोर होना था।गले मिलना था।गुलाल उड़ना था।ढोल मंजीरे बजने थे तब उसे चन्द्र ग्रहण ने आकर सब फीका कर दिया।
वजह साफ़ है कि भारत के एक घनिष्ठ मित्र राष्ट्र ईरान पर आततायी राष्ट्र, मानवता के भक्षक अमेरिका ने हमला कर अयातुल्ला खामेनेई को मौत के घाट उतार दिया जिससे शिया लोग छाती पीट मातम मना रहे हैं तथा ईरान ने अपने हमलों को तेज़तर कर दिया वह अमरीका के उन ठिकानों को ख़त्म कर रहा है जहां से उस पर हमले की कार्रवाई हो रही है। जबकि अमरीका ईरान में बच्चियों के स्कूल और महात्मा गांधी चिकित्सालय जैसी जगहों पर हमला करके इंसानियत के विरुद्ध डटकर काम कर रहा है जिसमें अब तक 700 से ज्यादा लोग मारे जाने की ख़बरें मिल रही है।
दोनों तरफ़ से युद्ध की आग भड़क उठी है मानवता कराह रही है।भारत भले चुप्पी साधे हैं। अमरीका से इतना भयातुर है कि देश के पुराने दोस्त के ग़म में दो शब्द भी नहीं कह पा रहा है।
ऐसे दुखकर माहौल में कायनात ने जो उमंग उत्साह के पर्व पर ब्रेक लगाया है।उसे हम सबको समझने की ज़रुरत है।
पंडितों ने ग्रहण समाप्त के बाद कल सुबह होली मनाने की जो घोषणा की है। वह होली प्रेमियों के लिए खुशी ला सकती है किंतु होली दहन की भोर से जो रंग गुलाल का मज़ा था वह काफूर हो चुका है।
कुदरत के इस फैसले का हमने पालन किया है। होली का उत्साह थमा है।इसी वक्त थोड़ा समय निकाल कर दुनिया में आई विपदा के बारे में सोचा जाना चाहिए। क्योंकि युद्ध में अनगिनत लोगों के साथ मानव विकास और उत्थान की बुनियाद हिल जाती है। फिर जहां खनिज तेल के लिए युद्ध की विभीषिका हो जिसकी ज़रुरत हम सबको है उसके भंडारों में लगी आग से कितने घरों के चूल्हे नहीं जल पाएंगे हमारे कितने फासले बढ़ जाएंगे कितने उद्यम विनष्ट होंगे। हमें सोचना होगा। अन्यायी,आततायी को सबक भी तो ज़रूरी है। इसलिए अन्यायी के विरुद्ध खड़े हों।यह खुशी मनाने का समय नहीं है।वरना संसाधनों के हड़पने के बहाने अमेरिका इसी तरह हर जगह सरकार लगातार गिराकर अपना साम्राज्यवादी एजेंडा जारी रखेगा या भारत जैसे देश की सरकारों को सरेंडर कर वहां लूट का खेला करता रहेगा।
आईए रक्ताभ चांद, चन्द्र ग्रहण के मायने समझें और बिसूरते रमजान वा ईरान के दर्द को महसूस करते हुए मानवता की रक्षा के लिए, ग़मगीन माहौल में सबके लिए दुआ करें।






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