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*मध्य प्रदेश समाचार:इंदौर लगातार 8वीं बार भारत का सबसे स्वच्छ शहर,इंदौर में मना जश्न,मध्यप्रदेश में मानसून का कहर,8 करोड़ की धोखाधड़ी में 20 साल से फरार महिला को सीबीआई ने इंदौर से पकड़ा*

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8 करोड़ की धोखाधड़ी में 20 साल से फरार महिला को सीबीआई ने इंदौर से पकड़ा, फर्जी आधार-पैन कार्ड बनाकर रही

सीबीआई का दावा है कि एक्सपर्ट ने उन्नत इमेज सर्च और डिजिटल फुटप्रिंट विश्लेषण तकनीकों का उपयोग करके आरोपितों को ट्रैक किया। पुरानी और नई तस्वीरों का मिलान कर उनकी पहचान की और आरोपित महिला मनी एम. शेखर उर्फ गीता कृष्णकुमार गुप्ता को इंदौर से पकड़ लिया। सीबीआइ के मुताबिक आरएम शेखर की 2008 में मौत हो चुकी है।

इंदौर। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बेंगलुरु में अंजाम दी गई आठ करोड़ रुपये की बैंकिंग धोखाधड़ी में 20 साल से फरार आरोपित महिला को इंदौर से गिरफ्तार कर लिया। महिला के पति की फरारी के दौरान मौत हो चुकी है। महिला ने फर्जी नाम रख लिया था। फर्जी ई-मेल आइडी, आधार कार्ड, पैन कार्ड सहित अन्य केवाईसी बना ली थी। सीबीआई ने डिजिटल फुटप्रिंट का विश्लेषण कर महिला को तलाशा और एक साथ तीन जगहों पर दबिश दी। महिला ने सीबीआई को चकमा देना स्वीकार लिया है। उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है।

सीबीआई की बैंकिंग सुरक्षा एवं धोखाधड़ी शाखा (बीएसएफबी) बेंगलुरु में एफआईआर दर्ज की गई थी।इसमें रामानुजम मुथुरामलिंगम शेखर उर्फ आरएम शेखर और विभिन्न कंपनियों के निदेशकों को आरोपित बनाया गया था।आरोप है कि वर्ष 2002 से 2005 के बीच आरोपितों ने मिलकर बेंगलुरू स्थित एक राष्ट्रीयकृत बैंक से आठ करोड़ की धोखाधड़ी की साजिश की।सीबीआई ने आरोपितों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर समन और वारंट जारी किए पर आरोपित कोर्ट में पेश नहीं हुए।27 फरवरी 2009 को अदालत ने उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया।

पहचान पूरी तरह से बदल डाली थी

  • पिछले वर्षों में इस दंपती ने अपनी पहचान पूरी तरह बदल ली थी। उन्होंने अपने नए नाम कृष्णकुमार गुप्ता (पति) और गीता कृष्णकुमार गुप्ता (पत्नी) रख लिए थे।
  • अपने मोबाइल नंबर, पैन कार्ड, ई-मेल आईडी और केवाईसी दस्तावेज भी नए बनवा लिए थे। सीबीआई का दावा है कि एक्सपर्ट ने उन्नत इमेज सर्च और डिजिटल फुटप्रिंट विश्लेषण तकनीकों का उपयोग करके आरोपितों को ट्रैक किया।
  • पुरानी और नई तस्वीरों का मिलान कर उनकी पहचान की और आरोपित महिला मनी एम. शेखर उर्फ गीता कृष्णकुमार गुप्ता को इंदौर से पकड़ लिया।
  • सीबीआई के मुताबिक आरएम शेखर की 2008 में मौत हो चुकी है। आरोपित मनी एम. शेखर को फिलहाल बेंगलुरू की जेल में भेजा गया है।

मध्यप्रदेश में मानसून का कहर: रीवा- सतना में स्कूल बंद, परीक्षा रद्द का आदेश, 11 जिलों में मूसलाधार बारिश का रेड अलर्ट!

मध्यप्रदेश में मानसून के सक्रिय होते ही बारिश आफत बनकर बरस रही है। लगातार बारिश से नदी, नाले और तालाब उफान पर है। इससे रीवा सतना सहित कई जिलों में स्कूल बंद। अत्यधिक वर्षा को लेकर रेड अलर्ट जारी। 18 जुलाई को सभी स्कूलों की छुट्टी घोषित होने के साथ कालेज की परीक्षा कैंसिल हुई।

 मध्यप्रदेश में लगातार हो रही मूसलधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। हालात को गंभीर देखते हुए मौसम विभाग ने प्रदेश के 11 जिलों में अत्यधिक बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। इसके चलते विंध्य क्षेत्र के कई जिलों के कलेक्टरों ने ऐहतियातन स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। हालांकि चौंकाने वाली खबर मैहर जिले से है। मैहर जिले में अभी भी प्रशासन की नजर में नही है अतिवर्षा

दरअसल, सतना जिले में लगातार हो रही तेज बारिश के कारण कलेक्टर डॉ सतीश कुमार एस ने बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने जिले के सभी शासकीय, अशासकीय, मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों, नवोदय विद्यालय सहित सभी स्कूलों में 18 जुलाई को अवकाश घोषित किया है। इसके साथ ही जिले के शासकीय स्वशासी महाविद्यालयों में 18 और 19 जुलाई को होने वाली परीक्षाएं भी कैंसिल कर दी गई हैं। प्राचार्य डॉ एससी राय ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि नई परीक्षा तिथि जल्द घोषित की जाएगी।

अन्य जिलों में भी स्कूलों की छुट्टियां

डिंडौरी, मऊगंज, पन्ना और रीवा जैसे अन्य जिलों में भी भारी बारिश के कारण स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है। प्रशासन ने जिलेवासियों से अपील की है कि अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें और नदियों-नालों के पास जाने से बचें। आवश्यक कार्य होने पर ही बाहर निकले और सुरक्षित रूप से वाहनों का इस्तेमाल करें। जिले में हो रही भारी वर्षा के दृष्टिगत स्कूलों में शुक्रवार का अवकाश घोषित कर दिया गया है।

प्रशासन ने किया अलर्ट जारी

मौसम की स्थिति को देखते हुए सभी संबंधित विभागों को अलर्ट पर रखा गया है। मौसम विभाग ने आगामी तीन दिनों तक इसी तरह से मौसम रहने की संभावना जताई है। पिछले 9 घंटे से हो रही लगातार बारिश से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की जिंदगी थम सी गई है। नदी-नालों के उफान और सड़कों पर जलभराव के कारण यातायात बाधित हो गया है। राहत और बचाव टीमों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने कहा है कि जिला प्रशासन, पुलिस, होमगार्ड सहित आपदा प्रबंधन की टीम अलर्ट मोड पर हैं। किसी भी विषम परिस्थितियों के उत्पन्न होने की सूचना तत्काल देवें।

बड़वानी में RTE से पढ़ रहे आदिवासी छात्रों से स्कूल में भेदभाव के आरोप

 बड़वानी जिले के निवाली से चौंकाने वाला मामला सामने आया। यहां एक निजी स्कूल पर आरटीई एडमिशन स्टूडेंट से भेदभाव के आरोप लगे हैं। आरोप है कि उनको सामान्य छात्रों से अलग बैठाया जा रहा है। शिकायत पर प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।

 मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के निवाली क्षेत्र से शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला गंभीर मामला सामने आया है। एक प्राइवेट स्कूल पर आरोप लगे हैं कि आरटीई के अंतर्गत एडमिशन लेने वाले बच्चों से भेदभाव किया जा रहा है। उनको बाकी छात्रों से अलग बैठाया जा रहा है। इस शिकायत पर जांच शुरू कर दी गई है।

निवाली स्थित सर्व शिक्षा अभियान के ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर महेंद्र सिंह राठौर ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मेरखेड़ी के 13 ग्रामीण अभिभावकों ने शिकायत की थी। इस पर निवाली तहसीलदार के निर्देश पर टीम गठित कर गंभीर मामले की जांच आरंभ कर दी गई है। उन्होंने बताया कि मामले की सूचना सर्व शिक्षा अभियान के जिला परियोजना समन्वयक समेत अन्य बड़े अधिकारियों को दे दी गई है।

सामान्य छात्रों से अलग बैठाने के आरोप

राठौर ने बताया कि ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सीबीएसई बोर्ड के अंतर्गत सेंधवा के समीप एक प्राइवट स्कूल संचालित होता है। इसमें आरटीई ( राइट टू एजुकेशन) के माध्यम से 13 आदिवासी बच्चों को एडमिशन दिया गया है। आरोप है कि इन गरीब बच्चों को अलग से बिठाया जा रहा है।

एक साल से जारी भेदभाव

नर्सरी और किंडरगार्टन के आम विद्यर्थियों के लिये स्कूल सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक लगती है। वहीं, आरटीई के अंतर्गत एडमिशन दिए बच्चों को पिछले एक वर्ष से स्कूल खत्म होने के बाद बुलाया जाता है। इस दौरान दूसरे विद्यार्थी अपने घर लौट जाते हैं। मजदूर वर्ग से ताल्लुक रखने वाले अभिभावकों ने बताया कि दोपहर में बच्चों को स्कूल लाने और ले जाने में उन्हें दिक्कत होती है। उन्होंने विरोधस्वरूप अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है।

कलेक्टर तक पहुंची शिकायत

स्कूल से शुल्क लेकर यूनिफॉर्म और किताबें भी प्रदान करने की शिकायत की थी। यह शिकायत उन्होंने जिला कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी, ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर, तहसीलदार, ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर और सेंधवा और पानसेमल एसडीएम के नाम की थी। जिला शिक्षा अधिकारी शीला चौहान ने बताया कि यह दुर्भाग्यजनक मामला संज्ञान में आया है। टीम के जांच प्रतिवेदन के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

अभिभावकों की परेशानी

बच्चों के परिजनों ने बताया कि स्कूल समाप्त हो जाने के बाद न वे प्रार्थना में शामिल हो पाते हैं। ना ही कोई एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी में शामिल हो पाते हैं। उन्होंने बताया कि गैर आरटीई से प्रवेशित बच्चे सभी वर्ग से हैं। उधर स्कूल के एक संचालक अजय गर्ग ने बताया कि वह इस मामले में प्राचार्य और अन्य डायरेक्टरों से चर्चा कर जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।

बांग्लादेश का अब्दुल भोपाल में कई साल से किन्नर बनकर रह रहा था

बांग्लादेशी नागरिक अब्दुल कलाम वर्षों से भोपाल में किन्नर बनकर ‘नेहा’ नाम से रह रहा था। फर्जी दस्तावेज बनवाकर वह खुद को भारतीय बता रहा था। इंटेलिजेंस ने उसे डिपोर्ट करने की तैयारी शुरू कर दी है।

बांग्लादेशी अवैध रूप से भारत में घुसकर यहां पहचान छिपाकर रह रहे हैं। इसी तरह का एक बांग्लादेशी अवैध रूप से भोपाल में रहते हुए पकड़ा गया है। बांग्लादेश का निवासी अब्दुल कलाम भोपाल में किन्नर बनकर वर्षों से रह रहा था। अब्दुल खुद का नाम नेहा किन्नर रखा था, वह इस नाम से पहचान पत्र भी बनवा चुका है और उसी का उपयोग कर वह खुद को भारतीय बताता था। केंद्र सरकार द्वारा बांग्लादेश के अवैध घुसपैठियों की तलाश शुरू की गई, तब भोपाल में अब्दुल कलाम के छिपे होने का खुलासा हुआ। अब अब्दुल कलाम को डिपोर्ट किए जाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। वह बुधवारा क्षेत्र में रहता था। उसके खिलाफ तलैया पुलिस ने कार्रवाई की है। फिलहाल, वह भोपाल पुलिस की सुरक्षा में रह रहा है। खुलासा हुआ है कि अब्दुल जांच एजेंसियों से बचने के लिए किन्नर बनकर राजधानी में घूमतर रहता था। यह कार्रवाई इंटेलीजेंस यूनिट द्वारा की गई है। पहचान छिपाने के लिए उसने लड़की का भेष बना रखा है और अपना नाम भी नेहा रखा है। 

पुलिस सूत्रों के अनुसार बांग्लादेशी नागरिक अब्दुल को भोपाल के बुधवारा इलाके से पकड़ा गया है। उसका असली नाम अदुल कलाम है। वह भोपाल में नेहा के नाम से रह रहा था। चोरी छुपे भोपाल में वह कई साल से रह रहा था। वह किन्नर बनकर शहर में यहां-वहां निकलता था। अदुल कलाम उर्फ नेहा ने बकायदा फर्जी तरीके से परिचय-पत्र भी बनवा लिया था। इसके संबंध में भी अंदरखाने पड़ताल की जा रही है। क्योंकि वह परिचय पत्र बनाने में कैसे सफल हो गया, बड़ा सवाल है। उससे लगभग भोपाल पुलिस पूछताछ कर रही है। पूछताछ भी बेहद गोपनीय तरीके से की जा रही है।

स्वच्छता सर्वेक्षण रिपोर्ट

इंदौर लगातार 8वीं बार भारत का सबसे स्वच्छ शहर, सूरत दूसरे और नवी मुंबई तीसरे नंबर पर

वार्षिक स्वच्छता सर्वेक्षण में इंदौर लगातार आठवीं बार सबसे स्वच्छ शहरों में शीर्ष स्थान पर रहा। इसके बाद सूरत और नवी मुंबई का स्थान रहा। 3-10 लाख जनसंख्या वर्ग में चंडीगढ़ सबसे स्वच्छ शहर रहा, उसके बाद नोएडा और उज्जैन का स्थान रहा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यहां आयोजित एक कार्यक्रम में विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए।

केंद्र सरकार के वार्षिक स्वच्छता सर्वेक्षण में इंदौर को लगातार आठवीं बार भारत के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब मिला। ऐसे ही सूरत को दूसरा स्थान मिला। इससे पहले मध्य प्रदेश का इंदौर लगातार सात बार देश के सबसे स्वच्छ शहर बनने का खिताब हासिल कर चुका है। इस बार इंदौर को स्वच्छता सर्वेक्षण 2024-25 की सुपर लीग में शामिल किया गया। सुपर लीग में सिर्फ उन्हीं 23 शहरों को शामिल किया गया, जो अब तक हुए सर्वेक्षणों में पहले, दूसरे या तीसरे स्थान पर रहे हैं। इंदौर ने सुपर लीग 2024-25 में भी बाजी मार ली है।


स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 पुरस्कार प्रदान किए
सर्वेक्षण के नतीजे गुरुवार को घोषित किए गए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय राजधानी स्थित विज्ञान भवन में आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय (एमओएचयूए) की ओर से आयोजित एक समारोह में स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 पुरस्कार प्रदान किए। केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल और अन्य लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

चार अलग-अलग श्रेणियों में कुल 78 पुरस्कार प्रदान किए गए
इस बार चार अलग-अलग श्रेणियों में कुल 78 पुरस्कार प्रदान किए गए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पुरस्कार हासिल करने वाले विजेताओं को बधाई दी। उन्होंने कहा, ‘आप सबने स्वच्छता के राष्ट्रीय महायज्ञ में अपना योगदान दिया है। मैं आप सबकी सराहना करती हूं। स्वच्छ सर्वेक्षण ने हमारे शहरों द्वारा स्वच्छता के लिए किए गए प्रयासों के मूल्यांकन और प्रोत्साहन के क्षेत्र में एक सफल प्रयोग के रूप में स्वयं को सिद्ध किया है।’

14 करोड़ नागरिकों की भागीदारी
राष्ट्रपति ने कहा कि यह जानकर प्रसन्नता हुई कि आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की ओर से वर्ष 2024 के लिए दुनिया का सबसे बड़ा स्वच्छता सर्वेक्षण आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न हितधारकों, राज्य सरकारों, शहरी निकायों और लगभग 14 करोड़ नागरिकों की भागीदारी रही। उन्होंने कहा, ‘स्वच्छता से संबंधित प्रयासों के आर्थिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक पहलू भी होते हैं।’ उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी नागरिक पूरे समर्पण के साथ स्वच्छ भारत मिशन में भाग लेंगे। 

इस श्रेणी अहमदाबाद नंबर वन
10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में गुजरात का अहमदाबाद शहर पहले स्थान पर रहा है। अहमदाबाद शहर को यह सम्मान स्वच्छता के क्षेत्र में निरंतर प्रयास, स्मार्ट वेस्ट मैनेजमेंट मॉडल और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी के कारण प्राप्त हुआ है। नगर निगम की योजनाएं जैसे कि घर-घर कचरा संग्रहण, कचरे का पृथक्करण और पुनर्चक्रण केंद्रों की स्थापना, शहर को एक आदर्श मॉडल बनाती हैं।

4,500 से अधिक शहरों को कवर किया गया
सरकार के मुताबिक, ‘स्वच्छ सर्वेक्षण’ मिशन का मकसद बड़े पैमाने पर नागरिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है। इसके साथ ही इससे समाज के सभी वर्गों के बीच कस्बों और शहरों को रहने के लिए बेहतर स्थान बनाने के लिए मिलकर काम करने के लिए जागरूक करने का प्रयास किया जाता है। नौवें वर्ष में प्रवेश करते हुए स्वच्छ सर्वेक्षण ने स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन और सेवा वितरण का मूल्यांकन किया। इसमें 10 मापदंडों और 54 संकेतकों का इस्तेमाल करते हुए 4,500 से अधिक शहरों को कवर किया गया।

न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा

न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा बने मप्र हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने दिलाई शपथ

संजीव सचदेवा मप्र के 29वें मुख्य न्यायाधीश बनाए गए हैं। भोपाल स्थित राजभवन में राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने उन्हें चीफ जस्टिस पद की शपथ दिलाई। कार्यक्रम का संचालन मप्र के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने किया।

न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने गुरुवार को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने राजभवन में आयोजित एक समारोह में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। न्यायमूर्ति सचदेवा मई माह से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे। अब उन्हें राज्य के उच्च न्यायालय का 29वां मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

समारोह के दौरान प्रदेश के मुख्य सचिव ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा जारी वह अधिसूचना पढ़कर सुनाई, जिसमें न्यायमूर्ति सचदेवा को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए जाने की घोषणा की गई थी।

दिल्ली में 26 दिसंबर 1964 को जन्मे न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने 1985 में श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, दिल्ली से वाणिज्य (ऑनर्स) में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से 1988 में विधि स्नातक (एलएलबी) की डिग्री ली। वह 1 अगस्त 1988 को दिल्ली बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत हुए और उसी वर्ष से वकालत शुरू की।

सुरेश कैत के रिटायरमेंट के बाद संभाली जिम्मेदारी
जस्टिस संजीव सचदेवा को 24 मई 2025 को एक्टिंग चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया था। वे तत्कालीन चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत के रिटायरमेंट के बाद से चीफ जस्टिस का दायित्व संभाल रहे थे। इससे पहले भी वे 9 जुलाई 2024 से 24 सितंबर 2024 तक प्रदेश के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का दायित्व संभाल चुके हैं। 30 मई 2024 को जस्टिस संजीव सचदेवा का दिल्ली हाईकोर्ट से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में ट्रांसफर हुआ था।

Swachh Survekshan 2025: भोपाल ने एक साल में 3 पायदान की लगाई छलांग,बना देश में दूसरे नंबर का साफ शहर

स्वच्छता सर्वेक्षण में भोपाल को देश का दूसरा सबसे साफ शहर घोषित किया गया है। भोपाल ने इस बार तीन स्थान की छलांग लगाई है। 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की कैटेगरी में दूसरा स्थान हासिल किया है।

राजधानी भोपाल को स्वच्छता सर्वेक्षण 2024-25 में देश का दूसरा सबसे साफ शहर घोषित किया गया है। भोपाल ने इस बार तीन स्थान की छलांग लगाई है और 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की कैटेगरी में दूसरा स्थान हासिल किया है। यह पुरस्कार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में दिया। पुरस्कार लेने के लिए भोपाल की महापौर मालती राय और निगम आयुक्त हरेंद्र नारायण बुधवार को ही दिल्ली पहुंच गए थे। भोपाल अहमदाबाद से केवल 12 अंक पीछे रहकर शीर्ष स्थान से चूक गया। घर-घर कचरा संग्रहण, अपशिष्ट प्रसंस्करण, आवासीय और व्यावसायिक स्वच्छता, झीलों के रखरखाव और सार्वजनिक शौचालयों की स्वच्छता जैसे प्रमुख क्षेत्रों में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने के बावजूद, भोपाल नगर निगम कचरा स्थलों के सुधार और स्रोत पृथक्करण में पिछड़ गया।

भोपाल शहर खुशी का माहौल 
 देश का दूसरा सबसे साफ शहर बनने पर खुशी का माहौल रहा। नगर निगम के माता मंदिर स्थित दफ्तर में जश्न मनाया गया। निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने सफाई मित्रों को माला पहनाकर सम्मान किया और लड्डू खिलाकर बधाई दी। खुशी में सभी लोग ढोल की थाप पर झूमने लगे। अध्यक्ष सूर्यवंशी ने खुद भी ढोल बजाया।ईधर जोन-16 मीनल रेजिडेंसी में भी दूसरी रैंक मिलने की खुशी में कर्मचारियों ने जश्न मनाया। मिठाई बांटी गई, एक-दूसरे को बधाई दी गई और सभी जमकर थिरके।

भोपाल मेंकचरे का कलेक्शन और उसका निपटारा
भोपाल शहर में होने वाले कचरे का कलेक्शन और फिर उसका निपटारा करने का प्रबंध किया गया है। भोपाल में हर दिन 517 डीटीडीसी व्हीकल, 719 सीएनजी व्हीकल और 202 रोड स्वीपिंग व्हीकल तैनात हैं। जो पूरे दिन में शहर भर का गीला सूखा कचरा समेटकर उसे कचरा निष्पादन केन्द्र तक पहुंचाते है। कलेक्शन मैकेनिज्म के साथ समानांतर रूप से वेस्ट प्रोसेसिंग का इंतजाम किया गया है। इसके लिए भोपाल में हर दिन उत्सर्जित कचरे के प्रकारों और उसकी मात्रा का पहले आंकलन किया जाता है। 250 नए सीएनजी डोर टू डोर वाहन, 6 मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग वाहन जैसे इंतजाम इसी साल से किए गए। जिससे डोर टू डोर कचरा कलेक्शन 100 प्रतिशत हो सके।

भोपाल को 7 स्टार रैंकिंग भी मिली
कचरा मुक्त शहरों की श्रेणी में भोपाल को 7 स्टार रैंकिंग भी मिली है। जबकि भोपाल ने देश की सबसे स्वच्छतम राजधानी होने के साथ ही वाटर प्लस सिटी का गौरव भी बरकरार रखा है। रीड्यूज, रियूज, रिसायकल थीम पर हुए स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 में भोपाल नगर निगम ने स्वच्छ सर्वेक्षण में निर्धारित 10 हजार अंकों में से 9567 अंक और सर्टिफिकेशन के लिए निर्धारित 2500 अंकों में से पूरे अंक प्राप्त किए। इस प्रकार 12 हजार 500 अंकों में से भोपाल शहर ने 12 हजार 067 अंक अर्जित करते हुए 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में दूसरा और प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। भोपाल को कचरा मुक्त शहर (GFC) में पूरे 1300 अंक और खुले में शौच मुक्त (ODF) में पूरे 1200 अंक मिले, जबकि जमीनी सर्वेक्षण में 10000 में से 9567 अंक मिले। इसने जमीनी स्तर के सर्वेक्षण में 95.67% अंक प्राप्त किए और डंप साइट सुधार (डंपसाइटों का सुधार) के लिए 0% प्राप्त किया।

निगम की यह हैं उपलब्धी

1-    रेंडरिंग प्लांटः आदमपुर छावनी में लगभग 6 करोड़ की लागत से रेंडरिंग प्लांट लगाया गया है। इसमें स्लाटर वेस्ट से मुर्गी व मछली के लिए दाना तैयार किया जा रहा है। यह प्लांट मध्यप्रदेश में अपने किस्म का पहला प्लांट है। पहली बार इस प्लांट में कुर्बानी का वेस्ट भेजा गया था, जो फिश और पोल्ट्री फूड के रूप में तैयार किया गया। 

2-    ग्रीन वेस्ट प्लांटः अन्ना नगर गारबेज कलेक्शन प्लांट में ही नगर निगम ग्रीन वेस्ट प्लांट लगा रहा है। इस प्लांट में बायोमास ब्रिकेट बनेंगी, जो ईंधन के रूप में उपयोग होगीं। लगभग 8 करोड़ की लागत वाले इस प्लांट को पीपीपी मोड पर इंदौर की कंपनी को दिया गया है। यह प्लांट शुरू होने से निगम की ग्रीन वेस्ट रखने की समस्या खत्म हो जाएगी।

3- फूलों से बना रहे अगरबत्तीः दानापानी गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन में फूलों से अगरबत्ती बनाई जा रही है। शहर के सभी मंदिरों के अलावा राजनैतिक कार्यक्रम, शादी-पार्टी से निकलने वाले फूलों को एकत्रित कर इस प्लांट भेजा जाता है। इसके लिए रोजाना चार मैजिक वाहन पूरे शहर से फूलों का कलेक्शन कर रहे हैं। इन्हें सुखाने के बाद प्लांट में अगरबत्ती बनाई जा रही हैं।

4- प्लास्टिक वेस्ट प्लांटः आदमपुर छावनी में पीपीपी मोड पर प्लास्टिक वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट लगाया गया है। इसकी क्षमता 5 टन प्रतिदिन है। लगभग 3 करोड़ 2 लाख के इस प्लांट का संचालन भोपाल की टेर्राफॉम इएसजी कंपनी कर रही है। लैण्डफिल साईट पर ही प्लांट में उत्पादन तैयार करने के अलावा प्लास्टिक वेस्ट को श्रेड कर गुजरात भेजा जा रहा है। यह प्लांट लगने से निगम को 3 टन प्लास्टिक वेस्ट से मुक्ति मिल गई।

5- सीएण्डडी वेस्ट प्लांटः घरों की टूट-फूट से निकले सीएण्डडी वेस्ट मटेरियल को पहले फैंक दिया जाता था। लेकिन अब इसका उपयोग होने लगा है। कोलार के थुआखेड़ा में इस कचरे से पेविंग ब्लाक और ईंट बनाई जा रही हैं। यह प्लांट भी पीपीपी मोड पर संचालित है।

6- थर्माकोल वेस्ट प्लांटः निगम के लिए थर्माकोल एक बड़ी समस्या थी। लेकिन अब इससे आर्टिफिशल ज्वेलरी, मोती, डेकोरेशन, सर्टिफिकेट के बॉर्डर, हैंगर, आर्टिफिशल दाना जैसे अन्य सामान बनाए जा रहे हैं। निगम ने दानापानी गारबेज ट्रांसफर स्टेशन के पास इसका प्लांट लगाया है, जो पीपीपी मोड पर संचालित है।

7- कोकोनट वेस्ट प्लांटः दानापानी गारबेज ट्रांसफर स्टेशन में ही कोकोनट वेस्ट प्लांट लगा है, जहां पूरे शहर से नारियल वेस्ट एकत्रित कर कोकोपिट बनाया जा रहा है। इसके अलावा अन्ना नगर प्लांट में पुराने कपड़ों को रिसायकल किया जा रहा है।

8-  कचरे को लेकर  कारगार कदम:   राजधानी में हर रोज औसत 800 टन कचरा निकलता है। इसमें 300 टन गीला और 500 टन सूखा कचरा रहता है। वहीं, मेडिकल वेस्ट भी निकलता है। गीले और सूखे कचरे को लेकर निगम ने काफी कारगार कदम आगे बढ़ाए। यही कारण है कि रैंकिंग में सुधार हुआ।

स्वच्छता में सिरमौर बनने के बाद इंदौर में मना जश्न।

इंदौर में मना स्वच्छता का जश्न, हुई आतिशबाजी, फिर की परिसर की सफाई

 स्वच्छता परिणाम आने के बाद निगम परिसर में स्वच्छता की बड़ी रंगोली महिला सफाईकर्मियों ने मिलकर बनाई। जश्न मनाने के दौरान परिसर में जो कचरा फैला, उसे भी सफाईकर्मियों ने जश्न समाप्त होते ही उठा लिया।

इंदौर एक बार फिर स्वच्छता में सिरमौर बना है। स्वच्छता सुपर लीग में शीर्ष पर रहने की घोषणा होने पर इंदौर में जश्न का दौर शुरू हो गया।सुपर स्वच्छता लीग में दस लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों की श्रेणी में इंदौर पहले नंबर पर रहा।  नगर निगम परिसर में सफाईकर्मियों व नगर निगम कर्मचारियों ने ढोलक की थाप पर नाच गाकर खुशियां मनाई। एक दूसरे का मुंह मीठा किया। इसके अलावा आतिशबाजी भी हुई। दिल्ली में पुरस्कार लेने गए मेयर पुष्य मित्र भार्गव,निगमायुक्त शिवम वर्मा सहित अन्य अफसर गुरुवार को इंदौर लौटेंगे। तब भी राजवाड़ा पर नगर निगमकर्मी और जनप्रतिनिधि जश्न मनाएंगे।

इंदौर स्वच्छता लीग में शीर्ष पर है। इसका अंदाजा पहले ही लग चुका था। इसके चलते बुधवार शाम को नगर निगम परिसर में जश्न की तैयारियां शुरू हो गई थी। टेंट के अलावा मंच भी लगाए गए थे। गुरुवार सुबह 11 बजे जैसे ही पुरस्कारों की घोषणा हुई तो नगर निगम कर्मचारी खुशी से झूम उठे। महिला सफाईकर्मी ने भी ढोलक पर मटकी की धून बजवा कर नृत्य किया। सभी ने एक दूसरे को मिठाई खिलाई।

महिला सफाईकर्मी ममता ने कहा कि सफाई करने में चुनौतियां तो बहुत आती है, लेकिन इंदौर को हम अपना घर समझते है। हमेशा यहीं भाव रहता है कि शहर में रहने वाले परिवारों को हमें स्वस्थ रखना है। प्रभारी महापौर राजेंद्र राठौर ने कहा कि इंदौर तो स्वच्छता में नंबर वन हमेशा रहेगा। अब दूसरे शहरों को भी मदद करेंगे। वाराणसी में भी इंदौर के अफसर गए और सफाई को लेकर टिप्स दिए।

बनाई स्वच्छता की रंगोली

कई महिला सफाईकर्मी इंदौर में सड़क साफ करने के बाद रंगोली भी बनाती है। स्वच्छता परिणाम आने के बाद निगम परिसर में स्वच्छता की बड़ी रंगोली महिला सफाईकर्मियों ने मिलकर बनाई। जश्न मनाने के दौरान परिसर में जो कचरा फैला, उसे भी सफाईकर्मियों ने जश्न समाप्त होते ही उठा लिया और परिसर साफ कर दिया।

Ramswaroop Mantri

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