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महाराष्ट्र की उथलपुथल 

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राकेश श्रीवास्तव 

महाराष्ट्र मे आखिरकार एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने अपना काम कर ही दिया।एनसीपी नेता अजित पवार महाराष्ट्र में एनडीए सरकार में उपमुख्यमंत्री के रूप मे पद की शपथ ले ली।उनके साथ ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नौ विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली है।इसमे तीन वह भी जिनके खिलाफ ईडी की जांच चल रही है।अजीत पवार ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, महाराष्ट्र सरकार को समर्थन देने का फैसला किया है और मंत्री पद की शपथ ली है।यह एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार की दूरदृष्टि का एक नापाक नमूना है।उन्होंने सभी पत्ते खुले रखे हैं। 

 हिमाचल प्रदेश एवं कर्नाटक विजय के बाद कांग्रेस पार्टी मजबूती की तरफ बढ़ रही है। एक खास बात गौर करने वाली है कि राहुल गांधी जेल जाने से नहीं डर रहे हैं।मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ भी ऐसा कोई भय नहीं है।आरजेडी सूप्रीमो और पिता लालू यादव के जेल जाने के बाद से तेजस्वी यादव के मन से भी डर निकल गया है।दूसरी तरफ उप्र मे अखिलेश यादव भी अब नेता जी मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद किसी भय से मुक्त दिख रहे हैं।शरद पवार की महत्ता विपक्षी एकता मे घटती जा रही थी।

परंतु एनसीपी के उपर भ्रष्टाचार के आरोपों का खतरा लगातार मंडरा रहा था जिससे फिलहाल उसे लीज मिल गई है।।अजीत पवार और उनके साथी जिस तरह से ईडी की जांच की तपिश झेल रहे थे वहां बीजेपी की सरकार मे उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों के पदों से नवाजा जाना किसी मदमस्त करने वाली बयार से कम नहीं है। शरद पवार के इतिहास और उनके द्वारा वर्तमान मे किये गये अनेकों कार्यों और व्यक्तव्यों से किसी को उनकी विपक्षी एकता मे उनके योगदान की उम्मीद हो सकती है पर मुझ जैसे नौसिखिए को तो कदापि भी नहीं।उनके पाप-पुण्य की गठरी इतनी भारी हो चुकी है कि वह उसके बोझ तले दबे जा रहे हैं।दूसरे महाराष्ट्र के उद्योगपतियों से प्रगाढ़ संबंधो के चलते उस लाभ हानि का उन्हें लेखा-जोखा रखना होता है।

नागालैंड मे सात विधायकों के साथ उनका विपक्ष मे न बैठकर बीजेपी के साथ सत्ता का भागीदार बनने की उत्कंठा को अगर बड़े बड़े विश्लेषक ट्रिगर के रूप मे नही देखते हैं तो क्या ही कहा जाय।जिस तरह से उन्होंने नागालैंड राज्य के व्यापक हित में नागालैंड के मुख्यमंत्री श्री एन. रियो के नेतृत्व को स्वीकार करने का निर्णय लिया उसी प्रकार भतीजे अजीत पवार ने भी देश के व्यापक हित और विकास के लिए बीजेपी का नेतृत्व स्वीकार कर लिया है।इसीलिए जब एनसीपी सुप्रीमो शरद पवारने स्पष्ट कहा का कि जो कुछ भी हुआ,उससे मुझे कोई चिंता नहीं है तो मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ। 

मै कोई विशेषज्ञ राजनीतिक विश्लेषक नहीं हूं।इस प्रकरण को लेकर बड़े बड़े लेखकों और विश्लेषकों के विचार आ रहे हैं।कोई इसे अजीत पवार का जबरदस्त मास्टर स्ट्रोक कह रहा है तो कोई अवसरवादी लुढ़कन की संज्ञा दे रहा है।इसे बीजेपी के चाणक्य की चाल भी कहा जा रहा है।दूसरी तरफ कुछ दिग्गज इसे शरद पवार के लिए झटका बता रहे हैं।इन सबसे अलग मेरा स्पष्ट विचार है कि यह सब शरद पवार की सहमति से हुआ है।उनके विश्वासपात्र,प्रफुल्ल पटेल, जिन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था वह भी उनके भतीजे के साथ हैं।इन सभी के साथ उनके एक और विश्वासपात्र छगन भुजबल भी हैं।शरद पवार ने यहां तक कहा कि “मुझे खुशी है कि मेरे कुछ साथियों ने शपथ ली है. इससे यह स्पष्ट है कि सभी आरोप मुक्त हो गए हैं. मैं उनका आभारी हूं” 

शरद पवार ने सभी दरवाजे खुले रखे हैं।अपनी पुत्री सुप्रिया सूले को एनसीपी का अध्यक्ष बना कर पार्टी की कमांड दे ही दी थी। प्रफुल्ल पटेल जो उनके विश्वासपात्र है उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर संतुलन बनाए रखा, साथ ही अजीत पवार को नाराज होने का अवसर दिया जिससे भविष्य मे उनके बीजेपी मे जाने को उचित ठहराया जा सके।अब प्रफुल्ल पटेल के भी केंद्र मे मंत्री बनने की संभावना बन गई है।अब शरद पवार पक्ष-विपक्ष दोनो के साथ हैं।अगर आप ने राजनीति मे नैतिकता को तिलांजलि दे दी है तो आपके लिए कुछ भी असंभव नहीं है,वरना न देश हित के नाम पर अजीत पवार बीजेपी मे शामिल होते और न ही चार दिन पहले एनसीपी के नेताओं के उपर भ्रष्टाचार के भंयकर आरोप लगाने वाले प्रधानमंत्री इन्हें बीजेपी की सरकार मे लेते।अब भारतीय राजनीति मे कुछ भी असंभव नहीं है।जो सोच सकते हैं वह तो हो ही सकता है, जो नहीं सोच सकते हैं वह भी असंभव नहीं है।

Ramswaroop Mantri

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