अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

वीर-वीरांगनाओं के तप, त्याग और देशभक्ति का प्रतिबिंब….मानगढ़ धाम

Share

जब भारत में विदेशी हुकूमत के खिलाफ आवाजें बुलंद हो रही थीं तब गोविन्द गुरु भील आदिवासियों
के बीच शिक्षा की अलख जगा रहे थे और उनके अंदर देशभक्ति की ऊर्जा भर रहे थे। मानगढ़ धाम
गोविन्द गुरु और मातृभूमि के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले सैकड़ों आदिवासियों के बलिदान का
प्रतीक है।

भारत का अतीत, भारत का इतिहास, भारत का वर्तमान और भारत का भविष्य आदिवासी समाज के
बिना पूरा नहीं होता। हमारी आजादी की लड़ाई का भी पग-पग, इतिहास का पन्ना-पन्ना आदिवासी
वीरता से भरा पड़ा है। 1857 की क्रांति से भी पहले, विदेशी हुकूमत के खिलाफ आदिवासी समाज ने
संग्राम का बिगुल फूंका था। वर्ष 1780 में संथाल में तिलका मांझी के नेतृत्व में ‘दामिन सत्याग्रह’
लड़ा गया था। गुलामी के शुरुआती कालखंड से लेकर 20वीं सदी तक, ऐसा कोई भी कालखंड नहीं है,
जब आदिवासी समाज ने स्वाधीनता संग्राम की मशाल को थामे न रखा हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने
राजस्थान के बांसवाड़ा में मानगढ़ पहाड़ी क्षेत्र में सार्वजनिक कार्यक्रम ‘मानगढ़ धाम की गौरव गाथा’
में हिस्सा लिया और स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम जनजातीय नायकों और शहीदों को उनके बलिदान

के लिए नमन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हम आदिवासी समाज के बलिदानों के ऋ णी हैं।
हम उनके योगदानों के ऋ णी हैं। इस समाज ने प्रकृति से लेकर पर्यावरण तक, संस्कृति से लेकर
परंपराओं तक, भारत के चरित्र को सहेजा और संजोया है। आज समय है कि देश इस ऋ ण और
योगदान के लिए आदिवासी समाज की सेवा कर उनका धन्यवाद करे।” आजादी का अमृत महोत्सव
के हिस्से के रूप में सरकार ने स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम जनजातीय नायकों को याद करने के लिए
कई कदम उठाए हैं। मानगढ़ में कार्यक्रम के दौरान भील स्वतंत्रता सेनानी गोविंद गुरु को नमन करते
हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “गोविंद गुरु जैसे महान स्वतंत्रता सेनानी भारत की परंपराओं के,
भारत के आदर्शों के प्रतिनिधि थे। वो किसी रियासत के राजा नहीं थे, लेकिन फिर भी वो लाखों-लाख
आदिवासियों के नायक थे। अपने
जीवन में उन्होंने अपना परिवार खो दिया लेकिन हौसला कभी नहीं खोया। उन्होंने हर आदिवासी को,
हर कमजोर, गरीब और भारतवासी को अपना परिवार बनाया।” मानगढ़ पहाड़ी भील समुदाय और
राजस्थान, गुजरात व मध्य प्रदेश की अन्य जनजातियों के लिए विशेष महत्व रखती है। स्वतंत्रता
संग्राम के दौरान यहां भील और अन्य जनजातियों
ने अंग्रेजों के साथ लंबे समय तक संघर्ष किया था। n

भारत की परंपरा और आदर्शों के प्रतिनिधि थे गोविंद गुरु
गोविंद गुरु, गांव-गांव में शिक्षा के लिए पाठशाला का निर्माण करने, बच्चों में संस्कृति की समझ को
प्रोत्साहित करने, बड़ों को सनातन धर्म के अनुसरण की प्रेरणा देने, सिर्फ स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग,
शराब और मांस के सेवन को बंद करने पर जोर देते थे। वे एक समाज सुधारक, आध्यात्मिक गुरु, एक
संत और एक लोकनेता थे। गोविंद गुरु ने भीलों के बीच सामाजिक सुधारों की अलख तो जगाई ही
साथ में उनके अंदर स्वराज के बीज भी बोए। इस बीच, अंग्रेजों को यह खबर लगी कि गोविंद गुरु
बड़ी संख्या में अपने अनुयायियों के साथ एक सभा में एकत्रित होने वाले हैं और इस सभा में भील
ब्रिटिश अधिकारियों के खिलाफ आंदोलन भी कर सकते हैं। वह तारीख थी 17 नवंबर और साल था
1913 जब गोविंद गुरु के नेतृत्व में 1.5 लाख से अधिक भीलों ने मानगढ़ पहाड़ी पर रैली की। इस
सभा पर अंग्रेजों ने गोलियों की बौछार कर दी, जिसे मानगढ़ नरसंहार कहा जाता है। करीब दो घंटे
तक हुई गोलीबारी में 1500 से अधिक भील आदिवासी शहीद हो गए और उनके लहू से यह पहाड़ी
लाल हो गई। गोविंद गुरु को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें फांसी की सजा हुई जिसे बाद में
आजीवन करावास में बदल दिया गया। जेल से रिहा होने के बाद गोविंद गुरु ने अपना शेष जीवन
लोगों की सेवा में लगा दिया। उन्होंने गीतों के माध्यम से भीलों को जागरूक किया। जब पूरा भारत
अंग्रेजों के खिलाफ छेड़ी हुई लड़ाई में अपने-अपने तरीके से योगदान दे रहा था उस समय गोविंद गुरु
अज्ञान और अशिक्षा के जाल में फंसे आदिवासियों को जगाने के साथ उनके अंदर भक्ति की मशाल
भी जला रहे थे।

आदिवासी समाज की सेवा के लिए स्पष्ट नीतियों के साथ देश कर रहा है काम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम में भाग लेने के बाद जांबूघोड़ा गए जहां गोविंद गुरु के
नाम पर बने विश्वविद्यालय के भव्य प्रशासनिक परिसर का लोकार्पण किया।
•15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर देशभर में ‘जनजातीय गौरव दिवस’
मनाया गया। यह दिवस स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासियों के इतिहास के बारे में जनता को शिक्षित
करने का एक प्रयास है।
•आदिवासी समाज के अतीत और इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आज देश भर
में आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित विशेष संग्रहालय बनाए जा रहे हैं।
•‘वनबंधु कल्याण योजना’ के जरिए आज जनजातीय आबादी को पानी, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य
और रोजगार के अवसरों से जोड़ा जा रहा है।
•आदिवासी क्षेत्र डिजिटल इंडिया से भी जुड़ रहे हैं। पारंपरिक कौशल के साथ-साथ आदिवासी
युवाओं को आधुनिक शिक्षा के भी अवसर मिलें, इसके लिए ‘एकलव्य आवासीय विद्यालय’ भी खोले
जा रहे हैं।

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें