मराल ओव्हरसीज कंपनी के श्रमिकों के साथ अन्याय ही नही, अत्याचार!*
बहुसंख्य सदस्यता के साथ गठित श्रमिक संगठन के साथ सम्मान से पेश आना होगा!
, खरगोन, मध्य प्रदेश में, मुंबई आगरा रोड पर स्थित मराल ओव्हरसीज कंपनी के गेट पर को अनुभव आया, वह ‘श्रमिक जनता संघ’ की हमारी- श्रमिक यूनियन के साथ हमारे कार्यकारिणी सदस्य के साथ गुंडागर्दी जैसी हकीकत रही|
मराल ओव्हरसीज के श्रमिक, कई मुद्दों पर अन्याय महसूस करते हुए हमारे श्रमिक जनता संघ के सदस्य बन गये| आज के रोज करीबन 80% श्रमिक हमारे सदस्य है| उन पर एक बैठक में हमला हुआ – हमने मालिकों तक खबर पहुंचायी और संबंधित हमलाखोर एवं उनके सहयोगी रहे मॅनेजर के खिलाफ शिकायत दर्ज की| उस मेनेजर को मालिकों ने (?) हटाया और दूसरे व्यक्ति की, जो पुराने मैनेजमेंट में रहे थे, नियुक्ति की|
नवनिर्वाचित अधिकारी मनोज ठक्कर जी का श्रमिकों का अनुभव रहा है हमारे युनियन से जुड़े प्रमुख को नौकरी से हटाने का, सभी श्रमिकों पर दबाव डालने का| श्रमिक जनता संघ और हम पदाधिकारियों के खिलाफ तद्दन बेबुनियाद आरोप, जैसा कि ये मिल्स बंद करवाना चाहते हैं……, लगाने का| उन्होंने कोई भी श्रमिक अगर सवाल उठाये तो उसे किसी न किसी से बदनाम किये जाए या हमला होकर झूठे प्रकरण दर्ज किये जाए……. आदि कृती कार्यवाही की है|
हमारी लिखित और मौखिक मांग बारबार करने के बावजूद युनियन के साथ एक भी अधिकृत बैठक नहीं की। उनकी हर बार मांग रही, व्यक्तिगत मीटिंग की। आखिर मेधा पाटकर जी और उनके बीच नर्मदा किनारे दत्त मंदिर में मुलाकात हुई। उनका आग्रह था, हम मराल में युनियन नहीं करें। मेधा जी ने नकार दिया…… कहा, श्रमिकों को जरूरत है, बहुसंख्य सदस्य बने है तो युनियन रहेगी। ‘आप वेतन में बढ़ोतरी की मांग करके मिल्स बंद करवायेंगे’….. यह आरोप भी झूठलाया। फिर भी उस बैठक के बारे में झूठ दावे करते रहे मॅनेजमेंट के लोग श्रमिक जनता संघ के खिलाफ मराल कंपनी ने तद्दन बेबुनियाद आरोपों के साथ, 500 मी. तक कोई मीटिंग, धरना इत्यादि न होने देने की निषेधाज्ञा की मांग के साथ, लगायी याचिका में कंपनी ने हार भुगती है। कसरावद और मंडलेश्वर कोर्ट, मध्य प्रदेश ने उनकी याचिका, केवल संभावित स्थिति का जिक्र करते हुए निषेधाज्ञा की मांग ठुकरायी है|
कल, 12 अक्टूबर के रोज मराल के मुख्य द्वार से कुछ दूरी पर खुली जगह में श्रमिकों के साथ मिलने गये मेधाजी, संजय चौहान, राजकुमार दुबे व अन्य, कार्यकारिणी सदस्य व श्रमिकों के साथ उनके कर्मचारियों से दुर्व्यवहार किया। उनके अनुसार ये साथी वहाँ मिटिंग नही कर सकते थे। उनके कर्मचारी, कुछ महिलाएँ और सेक्युरिटी गार्ड, चपरासी आदि “आप मिल बंद करवाने वाले है” कहने लगे तो श्रमिक जनता संघ के साथी सदस्यों ने जोरदार विरोध दर्जाया| व मेधा जी और सभी को जोर जोर से चिल्लाते हटाने लगे| शासकीय जमीन पर भी उनकी गाड़ियाँ खड़ी करने लगे!
कामगार एकता संगठन, जो ऐसी यूनियन रही, जिनके 30% भी श्रमिक सदस्य नहीं रहे और जिनकी सदस्यता फी आदि मेनेजमेंट द्वारा वेतन से काटी जाती रही हैं…… ऐसी युनियन के कुछ साथी भी सामने आकर चिल्लाने लगे। हमारे श्रमिकों से मिलने का विरोध करने लगे| जो हमारे संगठन के सक्रिय है, उनके साथ बहस करने लगे। सेक्यूरिटी गार्डस सबको हटाने लगे।
कंपनी ने तो हमसे सभी श्रमिक नहीं मिले, इसलिए कईयों को 3 बजे शिफ्ट पूरी होने पर भी गेट बंद करके बाहर आने से रोका और कंपनी को गाड़ीयों से पीछे की गेट से छोड़ा|
इतने में कंपनी का एक चपरासी, कुछ उनके सेक्यूरिटी गार्डस और कामगार एकता परिषद के कुछ प्रमुख आक्रमित होकर राजकुमार दुबे जी को घेरकर, खींचकर ले जाने लगे। उनके कपडे खीचे, खोले उनके शरीर पर तमाचे मारे- अभद्र भाषा में अवमानना करते रहे। हमारे श्रमिक साथियों ने उन्हें खीचकर वापस लाया और बचाया।
यह घटना ही मात्र नहीं, मॅनेजमेंट की ओर से विभिन्न प्रकार की रणनीति, हमारे श्रमिक संगठन को रोकने की साजिश, अधिकृत मीटिंग नकारना तथा हमारी यूनियन बनते ही झटपट कर दिया एग्रीमेंट की प्रति हमें न देना आदि अशोभनीय और गैरकानूनी है| ये सभी हरकते और हिंसकता दर्शाता व्यवहार unfair labour practice है|
हम इसका धिक्कार करते है| हम चाहते है, मंत्रालय और अधिकारी योग्य हस्तक्षेप करें और श्रमिक – मालिकों के बीच सही सम्बन्ध प्रस्थापित करें|
संजय चौहान, संतलाल दिवाकर, सुशांत रणवीर





