जेपी नरेला
डा. अम्बेडकर ने बुद्ध और कार्ल मार्क्स की तुलना करते समय माना, कि बुद्ध और मार्क्स के बीच 2381 वर्ष का अंतर है । बुद्ध का जन्म ई.पू. 563में हुआ था औऱ कार्ल मार्क्स का जन्म सन 1818 में हुआ था। कार्ल मर्क्स को एक नई विचारधारा व एक नए मत राज्य शासन का व एक नई आर्थिक व्यवस्था का निर्माता माना जाता है । इसके विपरीत बुद्ध को एक ऐसे धर्म के संस्थापक के अलावा और कुछ नही माना जाता, जिसका राजनीति या अर्थशास्त्र से कोई सम्बन्ध नही है। मार्क्स बहुत आधुनिक औऱ बुद्ध बहुत पुरातन ।
डा. भीमराव अंबेडकर ने बुद्ध के त्रिपिटक के अध्ययन के 25 बिंदु रखे और बताया कि बुद्ध के सिद्धांत का संक्षिप्त सार यही है। इसके बाद आगे उन्होंने उन्होंने बताया ,कि बुद्ध ने कहा था, कि मनुष्य के कष्ट तथा दुख उसके अपने ही दुराचरण के फलस्वरूप हो सकते है । दुख के कारण का निराकरण करने के लिए उन्होंने पंचशील का अनुपालन करने का उपदेश दिया। बुद्ध का मत है, कि संसार मे कुछ कष्ट मनुष्य का मनुष्य के प्रति पक्षपात है । पक्षपात निराकरण के लिए बुद्ध ने अष्टांग मार्ग निर्धारित किया।
बुद्ध का तरीका मनुष्य के मन को परिवर्तित करना, उसकी प्रवृत्ति व स्वभाव को परिवर्तित करना था ।
बुद्ध की मार्क्स से तुलना करते समय डा. भीम राव अम्बेडकर मार्क्स की बातों का जिक्र करते है, कि मार्क्स ने वैज्ञानिक समाजवाद के बारे में बताया कि जिसमे सर्वहारा की तानाशाही निहित है और वह झूठ पड गया है और पूर्णतया असत्य सिद्ध हो चुका है और आगे डा. अम्बेडकर कहते है, कि कार्लाइल ने मार्क्सवादी राजनीतिक अर्थशास्त्र को सुअर दर्शन की संज्ञा दी है । आगे कहते है कि कार्लाइल का कहना वास्तव में गलत है, क्योकि मनुष्य की भौतिक सुखों के लिए तो इच्छा होती ही है ,परन्तु साम्यवादी दर्शन समान रूप से गलत प्रतीत होता है ,क्योकि उसके दर्शन का उद्देश्य सुअरों को मोटा बनाना प्रतीत होता है । मानो मनुष्य सुअरों जैसे है ।
डा. भीमराव अंबेडकर आगे मार्क्सवाद के सम्बंध मे समाजवाद में सर्वहारा की तानाशाही, हिंसा, व समाजवादी सत्ता के विलोपीकरण पर सवाल खड़े करते है । वे कहते है, कि सर्वहारा वर्ग की तानाशाही औऱ क्रांतियों में हुई हिंसा का व्यख्यान करते हुए और नाराजगी व्यक्त करते हुए कहते है ,कि इस सवाल को निकाल देना चाहिए । राज्य सत्ता के लोप होने के बारे में वे कहते है, कि साम्यवादी यह नही बताते। कि समाजवाद मे राज्यसत्ता कब तक विलोप हो जाएगी।
वैसे तो मार्क्स ने उपरोक्त बातों के सम्बंध में अपनी प्रस्थापनाएँ बता दी थी, कि सर्वहारा की तानाशाही क्यों जरूरी है और समाज मे वर्गों की उत्पत्ति के साथ राज्यसत्ता की उत्पत्ति होती है ओर वर्गों के उन्मूलन के साथ राज्य सत्ता भी कोलैप्स कर जाती है । अब इसकी तारीख औऱ महीना कोई कैसे बता सकता है ।
वैसे इस आर्टिकल में डॉ भीम राव ने बुद्ध या मार्क्स में कई समानताएं भी बताई है, लेकिन उनसे कोई नतीजा नही निकलता है ।
*जेपी नरेला*





