इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार पड़ने की घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है. इस दर्दनाक हादसे के बाद शहर में शोक और आक्रोश का माहौल है. इसी बीच इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने संवेदनशीलता दिखाते हुए बड़ा फैसला लिया है. महापौर ने घोषणा की है कि वे इस साल होली और रंगपंचमी का उत्सव नहीं मनाएंगे. इसके साथ ही, इंदौर की पारंपरिक और प्रसिद्ध रंगपंचमी गैर में भी वे शामिल नहीं होंगे. हालांकि, नगर निगम की ओर से परंपरा निभाते हुए गैर निकाली जाएगी, लेकिन उसमें महापौर की मौजूदगी नहीं रहेगी.
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
दरअसल, भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी की वजह से कई लोगों की जान चली गई, जबकि सैकड़ों लोग बीमार हो गए. इस घटना ने प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं. प्रभावित परिवारों में अब भी शोक और चिंता का माहौल है. ऐसे में महापौर का मानना है कि जब शहर का एक हिस्सा गहरे दुख से गुजर रहा हो, तब उत्सव में शामिल होना ठीक नहीं है. महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि यह समय उत्सव मनाने का नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों के साथ खड़े होने का है. उन्होंने साफ किया कि उनका यह फैसला व्यक्तिगत संवेदना और नैतिक जिम्मेदारी के तहत लिया गया है. शहरवासियों से भी उन्होंने अपील की है कि वे जरूरतमंद परिवारों की सहायता के लिए आगे आएं.
गौरतलब है कि इंदौर में रंगपंचमी की गैर एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपरा रही है, जिसमें जनप्रतिनिधि और हजारों नागरिक शामिल होते हैं. ऐसे में महापौर का इस आयोजन से दूरी बनाना एक बड़ा कदम माना जा रहा है. भागीरथपुरा जल त्रासदी के बाद लिया गया यह फैसला प्रशासनिक जिम्मेदारी के साथ-साथ मानवीय संवेदना का संदेश भी देता है. अब शहर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पीड़ितों को न्याय और बेहतर पानी की व्यवस्था कब तक पक्की हो पाएगी.






Add comment