इंदौर
सवाल था – आप फ्री की रेवड़ी पर क्या सोचती हैं?
अब ताई का जवाब जानिए – मैं सांसद बनकर मंत्री बन गई, राज करने का अधिकार आया। अब जो राजपथ नहीं रह गया है, कर्त्तव्य पथ हो गया है। सोचा मैं सांसद हूं, लोगों के हित के काम करना है। ये आना चाहिए। मैं कुछ कहूंगी तो लोग कहेंगे ये जो ताई है न खुद कुछ कमाया न हमें कमाने दिया। इसलिए मैं ज्यादा नहीं बोलती, राजनीति की बातें बहुत अलग हैं। अभी तो हम यहां सामाजिक बात करते हैं। गोपाल मंदिर को रिस्टोर किया है। इसे क्यों राजनीति से जोड़ते हो। जो फ्री बांटते हैं उन्हें बांटने दो, हम नहीं बांटेंगे।
अब जानिए कैसे ताई फिर फ्रंट फुट पर एक्टिव हो रही हैं
सिंधिया-विजयवर्गीय की नजदीकियों के बाद एकाएक 79 साल की पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन इंदौर लोकल में एक बार फिर से एक्टिव हैं। मुख्यमंत्री से मिल आईं, अहिल्या स्मारक पर बात की। गोपाल मंदिर का निरीक्षण कर लिया। और अब कहा है कि इंदौर पश्चिम की तरफ ध्यान देना है। इतनी तेजी से हुए घटनाक्रम पर शहर के राजनीतिक पंडित इस पर बात करने लगे हैं।
पिछले 10 दिनों में तीन बार ऐसा हुआ है जबकि लंबे समय से शांत रही। मंगलवार को ही गोपाल मंदिर के दौरे पर मीडिया से बातचीत में उन्होंने अपने तेवर जिस अंदाज में दिखाए कि ‘मैं राजनीति का अलग इंटरव्यू दे दूंगी; अब तो और खुले रूप से दे सकती हूं, आप पचा सकते हो?’ यह बात उन्होंने पत्रकारों से कही। दूसरी ओर, शहर के पश्चिमी क्षेत्र में सामाजिक और व्यापारिक संगठनों की अधिकता है, इसलिए ताई ने अपनी दूसरी पारी की शुरुआत भी पश्चिमी इंदौर के गोपाल मंदिर से ही की।
इंदौर पश्चिम यानी क्या?
ताई ने चर्चा में दो बार ‘पश्चिम इंदौर’ का जिक्र किया। पश्चिम इंदौर की बात करें तो इसमें विधानसभा-3 का कुछ हिस्सा (राजबाडा, गोपाल मंदिर आदि), विधानसभा-1 और विधानसभा-4 आता है। अगर 2023 के विधानसभा चुनाव में महाराष्ट्रीयन वोट बैंक की बात करें तो एक बड़ा वर्ग पश्चिम क्षेत्र के लोकमान्य नगर, उषा नगर, राम बाग नारायण बाग आदि क्षेत्रों का है। यह गणित इसलिए भी हो सकता है कि पिछले दिनों सिंधिया-विजयवर्गीय की जो मुलाकातें हुई हैं उस लिहाज से महाराष्ट्रीयन वोट बैंक पर ताई का हमेशा यहां एकाधिकार रहा है। संभव है कि मुख्यमंत्री, ताई के माध्यम से इंदौर की कुछ खास विधानसभाओं पर मजबूती चाहते हैं। वैसे सांसद शंकर लालवानी, विधायक मालिनी गौड़, पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता जिनका पश्चिम क्षेत्र में अपना वजूद है और ये ताई के करीबी भी हैं, ऐसे में ये आने वाले चुनाव में नए गुट को मजबूती दे सकते हैं।

गोपाल मंदिर को लेकर अचानक ताई की सक्रियता।
दरअसल, राजनीतिक हलकों में उनके गोपाल मंदिर के दौरे को लेकर इसलिए चर्चाएं हैं। दरअसल इस दौरे को ताई ने एक दिन पहले भाजपा प्रवक्ता उमेश शर्मा के निधन के कारण कैंसिल कर दिया। लेकिन अगले ही दिन वे सामाजिक व व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों को साथ लेकर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत विकसित हो रहे गोपाल मंदिर का जायजा लेने पहुंच गईं। उनके साथ न तो महापौर पुष्यमित्र भार्गव थे, न क्षेत्रीय विधायक आकाश विजयवर्गीय और न ही निगम कमिश्नर प्रतिभा पाल। केवल स्मार्ट सिटी के सीईओ ऋषभ कुमार गुप्ता राजबाडा क्षेत्र के अलग-अलग एसोसिएशन व सामाजिक संगठन के पदाधिकारी, उनके नजदीकी पूर्व पार्षद सुधीर देडगे, पार्षद सुरेश टाकलकर, मुकेश पटवा आदि थे।
पांच दिन पहले महापौर व विधायक विजयवर्गीय ने किया था दौरा, तब ताई नहीं गईं

पांच दिन पहले महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक आकाश विजयवर्गीय, निगम कमिश्नर प्रतिभा पाल आदि ने किया था दौरा।
इसके पूर्व पांच दिन पहले महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधानसभा-3 के विधायक आकाश विजयवर्गीय व निगम कमिश्नर प्रतिभा पाल ने स्मार्ट सिटी सीईओ ऋषभ कुमार गुप्ता के साथ शासकीय ललित कला संस्थान, राजबाडा, गोपाल मंदिर व आसपास के क्षेत्रों का दौरा किया था। अगर ताई के ड्रीम प्रोजक्ट की बात करें तो वह देवी अहिल्या स्मारक है लेकिन इस बीच गोपाल मंदिर का उनका दौरा भी हुआ इसे लेकर राजनीतिकार इन दोनों दौरों को अलग नजरिए से देख रहे हैं। एक कारण तो यह है कि ताई अहिल्या स्मारक के प्रोजेक्ट के साथ अब गोपाल मंदिर को अपने नजरिए से देखकर उसमें कुछ सुधार चाहती हैं।
महापौर का चुनाव प्रचार और खुद पर लिखी पुस्तक विमोचन में ही आई थीं नजर
इसके पूर्व शहर में कई बड़े आयोजन हुए जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअली शामिल हुए जबकि कई केंद्रीय नेता इंदौर में थे। लेकिन ताई नदारद ही रहती थीं। इस बीच एक कार्यक्रम में जिनमें उनकी पुस्तक ‘ताई’ का विमोचन हुआ, उसमें केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी मुख्य अतिथि थे, तब ताई शामिल हुई थी और फिर नगर निगम चुनाव में एक बार प्रचार में।
10 दिनों की ऐसी हलचल

भोपाल में ताई और मुख्यमंत्री की मुलाकात।
– फिर लंबे गेप के बाद ताई का भोपाल जाना, उनके लिए मुख्यमंत्री द्वारा हेलिकॉप्टर उपलब्ध कराना, वहां उनकी लंबी चर्चा और फिर अगले दिन चार्टर प्लेन से इंदौर आना इससे राजनीति ज्यादा गर्मा गई।
– इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पुस्तक ‘मोदी@20’ के विमोचन में ताई का शामिल होना महज संयोग नहीं है। इसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मुख्य अतिथि थे। करीब एक घंटे देरी से शुरू हुए इस कार्यक्रम में ताई पुस्तक विमोचन के बाद पहुंची। तब सीएम ने उन्हें अपने पास की कुर्सी पर बैठाया था।

‘मोदी@20’ पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में उपस्थित ताई।
– अब उनका अचानक गोपाल मंदिर का दौरा हुआ। यानी 10 दिनों में ताई की सक्रियता नए राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा कर रही है।
वोट बैंक का यह गणित भी

इस मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री व ताई की बढ़ी सक्रियता।
व्यापारिक संगठनों में भी हलचल तेज
उधर, पश्चिम क्षेत्र में करीब 80 से ज्यादा व्यापारिक संगठन हैं। इनमें अधिकांश का समर्थन भाजपा को है। स्थानीय स्तर पर भले ही उनके लिए शहर के तीन प्रमुख राजनीतिक चेहरे सांसद शंकर लालवानी, वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय व पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन हों लेकिन ये सभी एक खास समय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर भी अपनी मांग और बात इनके माध्यम से पहुंचाते रहे हैं। हाल ही में ताई के दौरे में कई सामाजिक संगठन और व्यापारिक एसोसिएशन के पदाधिकारी थे। इन्हें सबसे पहले ताई के गोपाल मंदिर पहुंचने की जानकारी दी गई थी और ये तुरंत पहुंचे। यानी कुछ तो ‘राजनीतिक खिचड़ी’ पक रही है।





