सरकार के चहेते कलेक्टर भी आमजन से जुड़ी योजनाओं पर अनजान साबित*![]()
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*संभागायुक्त के संज्ञान में राजगढ़ जनपद के दबंग अधिकारी का मामला*
*दिखावे की कार्यवाही आमजन के लिए जिम्मेदारों की आंखों में लगा चश्मा*
राजगढ़ जिले में सिस्टम ने ऐसे हालात बना दिए कि निष्पक्ष मीडिया पर ही अब सवाल खड़े होने लगे है।देखा जाए तो मीडिया आज भी निष्पक्षता से अपनी भूमिका निभाते हुए काम कर रही है लेकिन देश ही नहीं प्रदेश के कुछ जिलों में मीडिया पर ही सवाल उठाना शुरू कर दिया है,आखिर इसकी मुख्य वजह सरकार के सिस्टम और जिस अधिकारी को जो जिम्मा सोपा गया हैं वह निष्पक्षता से नही बल्कि अपना पराया की भावना से कार्य करते नजर आ रहा है।
ताजा मामला राजगढ़ जनपद पंचायत में एक बुजुर्ग व्यक्ति को पीएम आवास योजना में 90 दिवस की मजदूरी नो माह बाद भी चक्कर काटने पर प्राप्त नहीं हुई एसे में मीडिया ने बाखुकी अपना धर्म निभाते हुए मामले की तह तक पड़ताल की लेकिन राजगढ़ जिले में जिले के मुखिया के आदेश ही यह बेअसर साबित होते नजर रहे हे।इस पूरे मामले में जिला कलेक्टर के साथ साथ भोपाल संभाग के कमिश्नर को मामले में संज्ञान हैं उन्होंने मामले में जिला कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ को करुवाही के निर्देश दिए लेकिन पांच दिन बीत जाने के बाद राजगढ़ जिलें में आमजनता के हित में महत्वपूर्ण योजना पीएम आवास जिसमे पंचायतों में आवास के बदले 10 हजार रुपए की उगाई करने के मामले सामने आ रहे हे।लेकिन जब जवाबदार ही इस तरह के मामले मे गंभीर नही तो भला सरपंच क्या करेंगे वह चुनाव में खर्च हुई राशि इस तरह ही निकलेंगे।
सबसे बड़ा सवाल राजगढ़ जिले में अभी तक ऐसे मामलो में कार्यवाही कोरी दिखावी साबित हो रही वही कुछ मीडिया इस कोरी कार्यवाही को जनता तक परोसने का कार्य बखूबी कर भी रही लेकिन आमजन से जुड़ी इस महत्वपूर्ण योजना को लेकर न अधिकारी गंभीरता से लेते नजर आ रहे और न ही मीडिया और जो इस प्रकार के मामले में मीडिया के प्रति निधि मामले में मलाई खाने के बजाय निष्पक्षता का परिचय देते वह खुद सवालों के घेरे में है।आखिर कही मामले में मीडिया कर्मियों के द्वारा सांठगाठ के बदले मामले को रोक दिया जाता है।
वही इस मामले में द सूत्र के प्रति निधि पर खबर डिलीट करने के साथ साथ इस मामले में चुप रहने के लिए अपने चहेते और वर्चस्व धारी लोगो ने दबाव बनाने का प्रयास किए जाने की खबर फेल चुकी है।
अब देखना होगा कि जिला कलेक्टर और भोपाल संभागयुक्त के संज्ञान में मामला होने के बावजूद इसे ठंडा क्यों किया जा रहा है।आखिर कार्यवाही को लेकर अधिकारी अपनी कलम में किस का इंतजार कर रहे हे।





