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मरीजों को उपचार देने में फेल रहे मेडिकल कॉलेज

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अजय रावत। दतिया और शिवपुरी में जब मेडिकल कॉलेज खुलने की घोषणा हुई तो बड़ी खुशी ग्वालियर को भी हुई कि अंचल भर के अलावा उत्तरप्रदेश तक के जिलों का भार सहने वाले ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल का बोझ अब कुछ तो कम होगा। परन्तु कई साल बीतने के बाद भी वहां के मरीजों को पर्याप्त उपचार देने में फेल रहे ये मेडिकल कॉलेज सफेद हाथी ही साबित हुए हैं। कोरोना के समय जब इनकी सबसे ज्यादा जरूरत है, यहां की व्यवस्थाएं जिला अस्पताल के भरोसे ही है। ये हालात तब है जबकि दतिया का प्रतिनिधित्व सूबे के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा करते हैं, वहीं शिवपुरी को विकास के मामले में प्रदेश सरकार में मंत्री यशोधरा राजे के अलावा राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया तक से आशा रहती है। यहां तो लंब समय से औपचारिक उद्धाटन ही श्रेय लेने की होड़ में अटका है।

चंबल की नारी शक्ति को सलामः आन-बान पर आंच आए तो चंबल के लोग दम दिखाने में देर नहीं करते, फिर बात नारी शक्ति की ही क्यूं न हो। भिंड के अस्पताल में एक डॉक्टर को नारी शक्ति ने ऐसा सबक सिखाया है कि जीवन भर नहीं भूलेंगे। किस्सा कुछ यूं है कि रात में ड्यूटी के दौरान डॉक्टर साहब का नशे में ऐसा मन चला की नर्स को मैसेज भेज दिया। कोई जवाब नहीं मिला तो फिर जुर्रत कर दी। फिर क्या था नर्स ने साथी नर्सों को इकट्ठा किया। डॉक्टर साहब को संकेत देकर बुलाया। डॉक्टर साहब भी इच्छा पूरी होने की चाहत में पहुंच गए। वहां नर्सों ने पहले ही जाल बिछा रखा था। डॉक्टर साहब की जूतियों से हजामत तो की ही, पीटते हुए उनका वीडियो भी बना लिया।अब डॉक्टर साहब डरे-डरे फिर रहे हैं, पिटे तो ठीक, कही वीडियो वायरल हुआ तो कहीं के नहीं रहेंगे।

न इधर का रहा न उधर काः अंचल का एक जिला विकास के लिए दिल्ली तक आवाज उठाने के लिए खुद को अनाथ महसूस कर रहा है। यहां से चुनकर जिसे दिल्ली भेजा, उन्होंने शुरुआत में खूब सक्रियता दिखाई। दिखाना भी थी, क्योंकि उन्हें यहां की जनता ने इतना बड़ा इनाम दिया था कि प्रदेश तो क्या देश-दुनिया तक चौंक गई थी। लेकिन बीते कुछ समय से उन्होंने सक्रियता कम कर दी। कोरोना जैसे दौर में जब ज्यादा जरूरत है, आला अधिकारियों के साथ बमुश्किल एक बैठक में शामिल हुए। जानकार इसका कारण भी बताते हैं। उनका मानना है कि सांसद जी जिसे पीछे छोड़कर दिल्ली भेजे गए थे, अब सरकार और संगठन में उनकी पूछ परख ज्यादा है तो फिर वे सक्रिय रहकर करेंगे क्या, पर जिले की परेशानी यह है कि जिन्हें नम्बर टू बनाया, वे भी अपने पुराने घर से ज्यादा दूसरे घर में ज्यादा सक्रिय हैं।

साथ आएं तो बात बन जाएः कोरोना से निपटने स्वास्थ्य सेवाओं से ज्यादा अब व्यवस्था बनाना बड़ी चुनौती है। ग्वालियर में प्रशासन मेहनत भी खूब कर रहा है परंतु आखिर राजनीति पीछा कैसे छोड़ दे। प्रशासन व्यवस्था का दावा करता है तो कांग्रेसी उसकी पोल खोलने में सक्रिय हो जाते हैं। परेशानी यह है कि पोल खोल अभियान में अधिकारियों का एक दायरा है। इसका जवाब का दायित्व तो सीधे सत्ताधारियाें का है, पर पार्टी स्तर पर काट सूझ ही नहीं रही है। क्योंकि गलत को सही कैसे कह दें। जवाब तैयार करने के लिए कमल दल ने हेल्पलाइन शुरू भी की, परंतु जैसे ही शिकायतों को अंबार देखा तो मदद की बजाय सीधे हाथ जोड़ लिए। हालांकि सीएम के शब्दों में कोरोना के खिलाफ इस युद्ध में आरोप-प्रत्यारोप पर ध्यान लगाने से ज्यादा दोनों दल एक साथ आकर शहर की मदद के लिए आगे आएं तो बेहतर संदेश जाएगा।

Ramswaroop Mantri

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