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मनो स्वास्थ्य…नर-नारी का संबंध  : मनोरोगी बने रहने से बाज़ आओ पुरुषों

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पूनम (दिल्ली)

        _"पुरुष अपने लिए आज़ादी के, किसी को भी कैद करके बलात भोगने तक के सारे द्वार खोल रखें हैं लेकिन स्त्री को कैद कर रखा है : वह नामर्द है या मौका न मिले-- तो ही नेक दिखा सकता है खुद को। लेकिन स्त्री को तब भी कैद ही रखेगा। *यह स्वस्थ इंसान का नहीं, मनोरोगी इंसान का लक्षण है।* एक बात।_
  _दूसरी बात यह कि : बिना किसी से जबरजस्ती किये, जिससे आनंद मिले, उसे- जैसे आनंद मिले, वैसे जीना ही जीवन की यात्रा है। इसके अलावा जीना शरीर को अन्यों की मर्ज़ी पर गिरवी रखकर 'बचपन से क़फ़न तक का सफर' करा देना है; यानी महज़ मृत्युयात्रा।_
 अंतिम बात : जीवन चेतना के विकास से सफल होता है और खुद को तृप्त करने का अनुभव देना ही चेतना विकास की खुराक है। इस तृप्ति का बेस क्या हो : यह भी आपका अंतस ही तय करता है। जीवन 'सत्य' से पूर्ण होता है, मोक्ष पाता है। और सत्य? 

सत्य खुदगर्ज़ों, षड्यंत्रकारियों, शोषकों, समाज के ठेकेदारों के नियमों की परवाह नहीं करता।

 *🧏‍♀️ जिस स्त्री से तुम्हें प्रेम है, वह किसी के साथ आनंदित होती है तो खुश होकर उसका सपोर्ट करो !*
_यह ही तुम्हारा धर्म है। यही तुम्हारी नैतिकता है। यही तुम्हारे प्रेम का प्रमाण है : क्योंकि तुम उससे प्रेम करते हो।_
  *सेक्‍स महज़ प्रेम पर, सहमति पर आधारित आमोद-प्रमोदपूर्ण होना चाहिए, न कि कैद का गंभीर मामला* जैसा कि इसे बना दिया गया। 
_संभोग तो ऐसा होना चाहिए जैसे मात्र दो लोग एक दूसरे की समान स्तरीय ऊर्जा के साथ खेल रहे हैं। यदि वे दोनों खुश है, तो इसमें किसी अन्य की दखल अंदाजी नहीं होनी चाहिए।_
 वे किसी को नुकसान नहीं पहुंचा रहे। वे बस एक दूसरे की ऊर्जा का आनंद ले रहे है।

_यह ऊर्जाओं का एक साथ नृत्‍य है। इसमें समाज का कुछ लेना देना नहीं है : जब तक कि कोई एक दूसरे के जीवन में नुकसान न दें। जब अपने को थोपे, लादे, हिंसात्‍मक हो, किसी के जीवन को नुकसान पहुँचाए, तब ही समाज को बीच में आना चाहिए। अन्‍यथा कोई समस्‍या नहीं है। इसका समाज से किसी तरह का लेना देना नहीं होना चाहिए।_

अभी के गुलाम सेक्स ने लोगों का जीवन बर्बाद कर दिया है। समाज के कारण यह बेवजह सरदर्द बन गया है। इसने बिना किसी कारण—ईर्ष्‍या, अधिकार, मलकियत, किचकिच, झगड़ा, मारपीट, भर्त्‍सना पैदा की है।
सेक्‍स नैसर्गिक बात है, जैविक घटना मात्र। इसका इतना ही महत्‍व है कि ऊर्जा का ऊर्ध्‍वगमन किया जा सके। यह अधिक से अधिक आध्‍यात्‍मिक हो सकता है। अधिक आध्‍यात्‍मिक बनाने के लिए इसे कम से कम गंभीर मसला बनाना होगा।
कोई तुम्हारी पत्नी है, सिर्फ़ इसलिए तुम्हारे सामने अपनी टांगे फैलाए, तुम्हारा कचरा खुद में डलवाए : यह लाइसेंसी बलात्कार है। वह सिर्फ़ पत्नी होने के नाते खुद की मर्ज़ी से तुम्हारे जरिये अपना इस्तेमाल होने दे: यह सभ्य वेश्यावृत्ति है। वह जिसे चाहे, जिससे तृप्त हो- उसे तुम इसकी आज़ादी न दो : यह तुम्हारा मनोरोग है, जो उसे मन से और फिर तन से भी रोगी बनाता है।
पूर्णता, करूण, सेवा, परोपकार, ध्‍यान : असल में इन बातों का नैतिकता से संबंध होना चाहिए। प्रेम और संभोग को नैतिकता से मुक्त करना होगा। जो बातें तुम्‍हारे जीवन को रूपांतरित करती हैं, जो बातें है जो तुम्‍हें अस्‍तित्‍व के करीब लाती है; वही नैतिक हैं– शेष सब अनैतिक।

एक प्रेमी बनो—यह एक शुभ प्रारंभ है लेकिन अंत नहीं। अधिक और अधिक ध्यानमय होने में शक्ति लगाओ। तब संभव है कि तुम्हारा न्यस्थ स्वार्थी यानी दुनियावी प्रेम तुम्हारे हनीमून पर ही समाप्त हो जाए। इसलिए ध्यान और प्रेम एक साथ में हाथ लिए हुए चलने का साहस करो। 

यदि हम ऐसे जगत का निर्माण कर सकें जहां प्रेमी ‘ध्यानी’
भी हो : तब प्रताड़ना, दोषारोपण, ईष्र्या और हर संभव मार्ग से एक दूसरे को चोट पहुंचाने की एक लंबी शृंखला समाप्त हो जाएगी।
प्रेम हमारी स्वतंत्रता होनी चाहिए। प्रणयशीलता मात्र उन दो लोगों के बीच मुक्त रूप से उपलब्ध होनी चाहिए, जो राज़ी हैं। इतना ही पर्याप्त है।
लेकिन~
यह सड़ चुका तुम्हारा समाज तुम्हें अनुमति नहीं देता है जो तुम्हारे अनुरूप है, उसे जीने की। मगर यही नैसर्गिक नैतिकता है। तुम्हारा समाज जो थोप रहा है वह अनैतिक है। सो ऐसे हत्यारे समाज की अनुमति मत लो। भाड़ में डाल दो इसे। चेतना विकास मिशन को व्हाट्सप्प 9997741245 पर अपनी समस्या बताओ. जो दिक्कतें खड़ी करेगा यह सड़ता समाज, उसके लिए हम हैं तुम्हारे साथ।
💞चेतना विकास मिशन

Ramswaroop Mantri

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