अग्नि आलोक
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 मन 

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विज्ञान आविष्कार कर चुका है अनेकों
लेकिन, मन की गति से तेज नहीं हैं कुछ भी …!
मन की शक्ति सर्वोच्च शक्ति है,
हो जाता है नियंत्रण इसपर जिसका,
भ्रमित उसे नहीं कर सकता है कोई..!

जिंदगी की उलझनों में जब मनुष्य,
अपने आपको अकेला पाता है यहाँ,
बेचैन महसूस करता रहता है प्रतिपल..!
टोटके भी अनेकों आजमाता है.!
मन की शांति के लिए…!

हजारों कोशिशों के बाद भी,
रह रह कर उठती है मन में..,
कोई ना कोई सांसारिक टीस..!
जो चुभती रहती है हृदय में शूल सी..!
एकांत में बैठकर भी,
अगर मन ना स्थिर हो जब..!

लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अपने,
बढ़ाओ मन की शक्ति तब..!
कोई भी ताकत हरा नहीं सकती हमें,
हार नहीं मानेंगे हम जब तक मन से..!

बढ़ेगी अगर मन की शक्ति,
तभी होगी हमारी प्रगति..!
जीवन आनंदमय प्रतीत होगा,
पूरी होगी हर इच्छा हमारी।

© शंभू राय
सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल

Ramswaroop Mantri

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