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गलती करने वाले संघियों को फटकार लगाए मोहन भागवत

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 शिवानंद तिवारी पूर्व सांसद

संघ प्रमुख मोहन भागवत जी ने संघ प्रचारक और देश के मौजूदा प्रधान सेवक, नरेंद्र भाई मोदी जी का बहुत चतुराई के साथ बचाव करने का प्रयास किया है. भागवत जी कहते हैं कि महामारी की पहली लहर के बाद सरकार, प्रशासन और जनता, सब ने सतर्कता बरतनी छोड़ दी थी. यही वजह है कि देश को आज इस विषम परिस्थिति का सामना करना पड़ रहा है. भागवत जी संदेश दे रहे हैं कि दोष तो हम सब का है. अकेले नरेंद्र भाई को क्यों कठघरे में खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है! यह उचित नहीं है. लेकिन भागवत जी यह छुपा लेते हैं कि किसी भी प्रकार के आसन्न संकट से जनता को सतर्क करना ही तो देश के प्रधान का दायित्व है. यहां तक कि सरकारी तंत्र भी उसी का मुंह देखता है. उसी की सक्रियता से तंत्र भी सक्रिय होता है. लेकिन पूरी दुनिया आज हमारे देश की मौजूदा हालत से चिंतित है. सब के सब इसके लिए संघ प्रचारक और प्रधान सेवक को ही दोषी ठहरा रहे हैं .

 भागवत जी बहुत सहजता के साथ इस बात को नजरअंदाज कर देते हैं कि हमारे प्रधान सेवक ने ही जनता को निश्चिंत कर दिया था.  छाती ठोक कर उन्होंने एलान किया था कि हमने इस महामारी को परास्त कर दिया है. दरबारियों ने उन का जयकारा लगाते हुए कहा था कि जिस प्रकार अवतारी पुरुष नरेंद्र भाई मोदी ने महामारी को परास्त कर दिया है, दुनिया के लिए वह नजीर है ! जब देश का नेता, प्रधानमंत्री ही दावा कर रहा है कि अब चिंता की कोई जरूरत नहीं है. वैसी हालत में अगर सरकार का तंत्र और जनता निश्चिंत हो जाती है तो इसमें उनका क्या कसूर है !

  हम माननीय भागवत जी से एक और रहस्य का खुलासा भी चाहेंगे. संघ का दावा है कि वह शाखा के माध्यम से चरित्रवान, संस्कारी और देशभक्त नागरिक का निर्माण करता है. लेकिन उनके यहां से निकले हुए ऐसे लोग जो आज सत्ता प्रतिष्ठानों पर आसीन हैं, उनके मुखारविंद से कभी-कभी जो वचन निकलता है या उनका जो आचरण दिखाई देता है, उससे तो संदेह होता है कि वह पूरा मनुष्य भी बन पाए हैं या नहीं. अभी-अभी एक प्रदेश के भूपू मुख्यमंत्री ने दावा किया कि कोरोना को लेकर उनके मन में एक दार्शनिक ख्याल आया. संभवत: वह भी कोरोना से संक्रमित हो गए थे. उन्होंने कहा कि जब वे इलाज करा रहे थे तब उनके मन में वह दार्शनिक ख्याल आया कि जिस प्रकार हम जीव हैं उसी प्रकार यह कोरोना वायरस भी जीव है. हम उसको भगाने के लिए, मारने के लिए तरह तरह का उपाय करते हैं. वह भी बहरूपिया जैसा रूप बदल बदल कर अपना बचाव करता है. जिस प्रकार हमको जीने का अधिकार है उसी प्रकार उसको भी जीने का अधिकार है. उन महानुभाव के दर्शन के मुताबिक पृथ्वी पर तो मनुष्य नहीं वायरस ही तैरेंगे !

भागवत जी से नम्रता पूर्वक हम इस रहस्य का भी खुलासा चाहेंगे कि कैसे आपका संघ ऐसे-ऐसे मौलिक चिंतकों को तैयार करता है ! उसी प्रदेश के आजकल जो मुख्यमंत्री हैं उनका भी जोड़ा लगाना मुश्किल है. अगर जोड़ा लगेगा भी तो वह संघ  द्वारा प्रशिक्षित किसी सेवक के जरिए ही. कुंभ के समय दुनिया चिंतित थी. इस महामारी के समय इतने लोग जुटेंगे तो इससे बचाव का जो नियम है उसका अनुपालन असंभव होगा. दुनिया भर के विशेषज्ञ इसको टाल देने के पक्ष में थे. इसको टाल देना ही मनुष्यता के हित में था. लेकिन संघ के पुराने सेवक और उस प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री ने तो भारी संख्या में लोगों को कुंभ आने के लिए आमंत्रित किया. चिल्ला चिल्ला कर उन्होंने घोषित किया कि यहाँ किसी प्रकार का कोई बंधन या रोक टोक नहीं है. आइए गंगा में स्नान कीजिए ! गंगा मइया आपकी रक्षा करेंगी. जो लोग हरिद्वार गए हैं और हरकी पौड़ी घाट को देखा है वे अंदाज लगाएं कि उस छोटी सी जगह में सरकारी आंकड़ों के अनुसार कुल मिलाकर लगभग 93-94 लाख लोग गए और वहां स्नान किया. उसका क्या परिणाम निकला इसको लोग भोग रहे हैं. 

संघ के सेवकों के हाथ में देश के साथ साथ कई प्रदेशों का शासन है. लेकिन इन शासकों में मनुष्य की चिंता नगण्य दिखाई देती है. किस प्रकार चुनाव जीतें, एक मात्र लक्ष्य यही दिखाई देता है. अभी जिन राज्यों में चुनाव हुए वहां हमने क्या देखा ! लाखों की रैलियां ! हमारे प्रधान सेवक जी विज्ञापनों में कोरोना से बचने के लिए लोगों को जो संदेश देते हैं. दो गज की दूरी, सावधानी है जरूरी. लेकिन उनकी रैलियों में, उन के रोड शो में हमने क्या देखा ! जिन सावधानियों को अख्तियार करने का संदेश देश को देने वाला स्वंय ही उनकी धज्जियाँ उड़ा रहा है ! जब निगम बनाने वाला स्वंय ही अपने बनाए नियमों की धज्जियां उड़ाएगा तो आम लोगों से हम उन नियमों के अनुपालन की अपेक्षा किस प्रकार कर सकते हैं ! कुंभ तो हुआ ही उसके बाद सारी सावधानियों को ताक पर रखकर उत्तरप्रदेश में कई चरणों में पंचायत के चुनाव कराये गये. उसका परिणाम क्या निकला है यह  हमारे सामने है. पता नहीं आज जो दृश्य हम देश में देख रहे हैं उसे देखकर भागवत जी का सर शर्म से झुकता है या नहीं ! पूरी दुनिया में हम नंगे हो गए हैं. नदियों में तैरती लाशें. उनको खाते चील, कौवे और कुत्ते! क्या यही विश्व गुरु भारत की तस्वीर है ! कहाँ पहुँचा दिया आप लोगों ने देश को ! इसलिए हम बहुत नम्रतापूर्वक मोहन भागवत जी से निवेदन करना चाहेंगे कि वे सोचें कि संघ के प्रचारक और सेवकों का शासन-प्रशासन किस प्रकार का है। ठीक है कि संघ का एक सपना पूरा हो चुका है. देशभर के बड़े भूभाग पर आज संघ के सेवकों और प्रचारकों का शासन है!  लेकिन दुनिया के सामने आज भारत नंगा खड़ा है. आजादी के इतने दिनों बाद जो कुछ भी थोड़ा बहुत हमने हासिल किया था, आज वह सब कुछ धुल गया है. दुनिया हमको नए खतरे के रूप में देख रही है. अस्पतालों में जगह नहीं है. वैक्सीन के अभाव में कई जगहों पर मजबूरी में टीका केंद्र बंद हो गये हैं. अब तक यह स्पष्ट हो चुका है कि कोरोना से बचने का एकमात्र उपाय टीकाकरण है. पर संघ के प्रचारक और देश के हमारे प्रधान सेवक इसी गुमान में हैं कि सभी जानकारों, वैज्ञानिकों और वायलॉजिस्टों से ज्यादा समझ उनके पास है. मुंगेरी लाल की तरह उन्होंने सपना देखना शुरू कर दिया था कि देश में कोरोना तो मेरे हाथों परास्त हो चुका है. दुनिया के लोग बेवजह सशंकित और भयभीत हैं. इसी दंभ में उन्होंने पर्याप्त मात्रा में वैक्सिन तक का इंतजाम भी नहीं किया. इसलिए माननीय मोहन भागवत जी से हमारा सादर अनुरोध है कि अपने प्रचारकों और सेवकों की गलतियों का सिर्फ बचाव ही नहीं करें. बल्कि जहां वे गलती कर रहे हैं वहां उन्हें सार्वजनिक रूप से झाड़ लगाएं, उनका कान पकड़ें और इसके बावजूद नहीं सुधारते हैं तो उनको सत्ता छोड़ने का आदेश दें – शिवानन्द तिवारीपूर्व सांसद

Ramswaroop Mantri

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