तस्करी और अन्य अपराधों से जुटाए जा रहे काले धन को सफेद बनाने की प्रक्रिया-मनी लांडरिंग को रोकने में सरकारें विफल साबित हो रही हैं। सॉफ्टवेयर कंपनी फेनेर्गो के अनुसार पिछले पिछले साल ग्लोबल बैंकों को मनी लांडरिंग नियमों के उल्लंघन पर 77 हजार करोड़ रुपए से अधिक जुर्माना चुकाना पड़ा था। यह 2019 के मुकाबले 80% अधिक है। तीन साल पहले विश्व में 43 लाख करोड़ रुपए से अधिक अवैध धन की हेराफेरी का अनुमान है।
बारीकी से देखने पर पता लगता है कि मनी लांडरिंग के खिलाफ ग्लोबल सिस्टम- एएमएल में गंभीर खामियां हैं। वित्तीय अपराध विशेषज्ञ रोनाल्ड पोल की स्टडी का निष्कर्ष है कि एएमएल सिस्टम विश्व की सबसे प्रभावहीन नीति है। बैंकों और अन्य व्यवसायों के लिए इसका पालन करने का खर्च लांडरिंग के जरिये लूटी गई रकम से 100 गुना अधिक है।
2001 में 9/11 हमले के बाद अमेरिका में आतंकवाद और अन्य गतिविधियों के लिए धन की आवाजाही को रोकने का कानून पास होने के बाद इस अवैध कारोबार को रोकने के प्रयास बढ़े हैं। फिर भी, बीस साल पहले की तुलना में आज फर्जी कंपनी बनाकर पैसे को यहां से वहां भेजना अधिक आसान है।
ससेक्स यूनिवर्सिटी के रॉबर्ट बैरिंगटन का कहना है, मनी लांडरिंग रोकने के वैश्विक प्रयास बीते पांच सालों में कमजोर हुए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अगुआई में अमेिरका ने इस मामले में कमजोरी दिखाई है। चीन और रूस ने भ्रष्टाचार रोकने के प्रयासों में बाधा डाली है।
6 प्रतिशत हेराफेरी
बैंकों की एसोसिएशन वोल्फसबर्ग ग्रुप के जॉन कुसेक के अनुसार 2018 में 43 लाख करोड़ रुपए से अधिक के वित्तीय अपराध हुए। यह ग्लोबल जीडीपी का 6.7% है। दस साल पहले संयुक्त राष्ट्र का अनुमान था कि हेराफेरी का केवल 0.2% ही जब्त किया जाता है।





