इंदौर
शासकीय स्कूलों में छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा देने के लिए सरकार ने सीएम राइज योजना शुरू की है। योजना में इंदौर के छह और जिले के 11 सहित प्रदेशभर के 276 सरकारी स्कूलों को शामिल किया है। इन स्कूलों को निजी स्कूलों की तर्ज पर विकसित कर सर्वसुविधायुक्त बनाया जाएगा। शिक्षकों को अलग से ट्रेनिंग देकर पदस्थ किया जाएगा।
योजना में शामिल होने के लिए शिक्षकों के लिए जो योग्यता रखी गई है, उस पर शहर के छह स्कूलों में 15 साल से पदस्थ 200 के करीब शिक्षक और प्राचार्य खरे नहीं उतरे हैं। अब इन शिक्षकों और प्राचार्यों को उपयोगिता साबित करने के लिए लिखित परीक्षा और इंटरव्यू से गुजरना होगा। जिले के 11 स्कूलों के लिए 14 प्राचार्यों के इंटरव्यू शनिवार को मोतीतबेला स्थित शासकीय मालव कन्या उमावि में होंगे। वहीं, जिले के 600 से ज्यादा शिक्षकों की लिखित परीक्षा दो सत्रों में सुबह और दोपहर में 28 नवंबर को होगी।
शहर के इन स्कूलों का योजना में किया गया है चयन
शहर में शा. उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नंदानगर, शा. मालव कन्या मोती तबेला, शा. अहिल्याआश्रम क्र.1 पोलोग्राउंड, शा. अहिल्या आश्रम क्र. 2 महाराणा प्रताप नगर, शा. मल्हार आश्रम चिमनबाग, शा. उच्च्तर माध्यमिक विद्यालय मूसाखेड़ी शामिल हैं।
शिक्षा विभाग ने दिया था मौका
स्कूल शिक्षा विभाग ने दो महीने पहले सलाह दी थी कि अगर शिक्षक मौजूदा स्कूलों में आगे भी कार्यरत रहना चाहते हैं तो आपको अनिवार्य तौर पर सीएम राइज परीक्षा में शामिल होकर उसे उत्तीर्ण करना होगा।
अपात्र शिक्षक नई पदस्थापना तक उन्हीं स्कूलों में पढ़ा सकेंगे
अपात्र शिक्षक तब तक उन्हीं स्कूलों में कार्यरत रहेंगे, जब तक की नए शिक्षकों की भर्ती नहीं हो जाती। परीक्षा के बाद शिक्षक नए साल में ही पदस्थ होंगे। जिन शिक्षकों के रिटायरमेंट में 5 साल या उससे ज्यादा बचे हैं, वे ही परीक्षा में बैठने के लिए पात्र होंगे। शहर के 6 स्कूलों में 35 से 61 वर्ष की आयु तक के 200 शिक्षक-शिक्षिकाएं 15 साल से पदस्थ हैं। इस आयु सीमा के नियम के तहत 25 से 30 शिक्षक अपात्र हो गए हैं।
ये हैं आयु सीमा से अपात्र
प्राचार्य राजू मेहरा, सुनीता ठक्कर, मनमोहन तिवारी और सीमा श्रीवास्तव रिटायरमेंट में पांच साल से कम रहने के कारण पात्रता से बाहर हो गए हैं। अहिल्याआश्रम क्र.1 में वर्तमान में प्राचार्य का पद रिक्त है तो वहां के लिए कोई नया प्राचार्य आएगा।
इन्फ्रास्ट्रक्चर भी बदलेगा
योजना में न केवल शैक्षणिक गुणवत्ता बल्कि स्कूलों के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर भी काम होगा। छात्रों को निजी स्कूलों की तरह ही परिवहन के लिए बस आदि की सुविधा उपलब्ध करवाने पर भी काम किया जाएगा।
– केके द्विवेदी, डीपीआई, भोपाल




