शशिकांत गुप्ते
एक फ़िल्म निर्माता ने एक फ़िल्म की पटकथा लिखने के लिए मुझसे सम्पर्क किया।
मैने स्पष्टशब्दों में कह दिया,मै व्यंग्यकार हूँ। मुझसे काल्पनिक कहानियां नहीं लिखी जाती है।
निर्माता ने कहा आपको काल्पनिक कहानी नहीं,हक़ीक़त ही लिखना है।कारण हमें हास्यव्यंग्य से सराबोर फ़िल्म बनानी है।
निर्माता की बात सुनकर मै अचंभित हो गया।कौतूहलवश मैने पूछा फ़िल्म का नाम क्या रखा है आपने?
निर्माता ने बहुत ही सहज भाव से कहा। अच्छे दिन आएंगे
फ़िल्म का नाम सुनकर मुझे हंसी आ गई।
निर्माता ने कहा सिर्फ नाम सुनकर आप हंस पड़े तो फ़िल्म के प्रदर्शन के बाद दर्शक कितने हंसेंगे।
मैने कहा सच में इस नाम से तो कॉमेडी फ़िल्म ही बन सकती है।
इस फ़िल्म की खासियत यह होगी कि इस फ़िल्म में सारे खलनायक ही कॉमेडी रोल निभाएंगे।
इस फ़िल्म में अभिनेत्रियों ने भी बहुत हास्य प्रधान भूमिका अदा की है। हास्य प्रधान फ़िल्म की यही विशेषता रहती है, मंहगाई जैसी त्रासदी को डायन की उपमा देकर भी नांचते गातें प्रस्तुत किया जाता है। इस दृश्य में एक (Mystery) रहस्य दर्शाया गया है। यहॉ दर्शकों के बीच कौतुहल( suspense ) क्रिएट होता है। मंहगाई क्या होती है, और डायन कौन?
इस फ़िल्म की विशेषता यह है कि,यह फ़िल्म समूचे देश में प्रदर्शनार्थ प्रस्तुत की गई।
सर्व प्रथम तो देश की राजधानी में ही पीट गई। देश के बहुत से राज्यों में फ्लॉप भी हुई।लेकिन फ़िल्म निर्माताओं के पास अर्थ की कोई कमी नहीं है।
अच्छे दिन आएंगे इस फ़िल्म में सात वर्षों से सिर्फ और सिर्फ एक ही व्यक्ति पर ही सारे कैमेरे केंद्रित हैं।
सभी सहयोगी कलाकारों को दरकिनार कर दिया गया है।
इस फ़िल्म की सबसे बड़ी खासियत है कि, निरंतर फ्लॉप होने के बावजूद भी विज्ञापनों के माध्यम से इसे हिट करने की असफल कोशिश की जा रही है।
इस कहावत को चरितार्थ करते हुए “रस्सी जल गई, लेकिन बल नहीं जा रहा है।”
निर्माता इस फ़िल्म को धार्मिक फ़िल्म का स्वरूप प्रदान करने के लिए वचन बद्ध हैं।
अपने देश में देशवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण सुविधा उपलब्ध है, संचित पापों को धोने के लिए पवित्र नदिया हैं।बहुत से तीर्थस्थल भी है।
अब मंदिर भी उपलब्ध होगा।
सेवाभावी दानवीर निःस्वार्थभाव से भजन की इन पंक्तियों को गुनगुनाएँगे।
क्या तुने पाया, क्या तुने खोया,
क्या तेरा लाभ है क्या हानि ।
इस का हिसाब करेगा वो इश्वर,
क्यूँ तू फिकर करे रे प्राणी।
तू बस अपना काम किए जा, तेरा भण्डार भरेंगे राम ॥
दूसरों का दुखड़ा दूर करने वाले
तेरे दुःख दूर करेंगे राम
किए जा तू जग में भलाई का काम
तेरे दुःख दूर करेंगे राम
इस भजन की इन पंक्तियों से एक संदेश मिलता है, और महत्वपूर्ण सुविधा का बोध होता है।
आस्थावान लोगों को लाभ हानि की चिंता नहीं करनी चाहिए।
ईश्वर सब हिसाब अच्छे से कर देगा।
यह बात अच्छे से नोट कर लेनी चाहिए जो आस्थावान नहीं है,उनका “हिसाब” जांच एजेंसियां ही करती है।
अच्छे दिन आएंगे,अच्छे दिन आएंगे।मै इस तरह बड़बड़ा रहा था। मेरी बेटी ने मुझे जगाया। कहने लगी पापा आप तो हाथ में कलम लेकर लिखते लिखते ही सो गए। यह क्या बड़बड़ा रहे हो?
मेरी नींद खुली मै होश में आ गया।
रेडिओ पर गाने सुनने लगा।
रेडिओ पर सन 1971 में प्रदर्शित फ़िल्म हरे कृष्ण हरे राम का गीत सुनाई दिया।यह गीत गीतकार आनंद बक्षीजी ने लिखा है।
देखो ओ दीवानो, तुम ये काम ना करो
राम का नाम बदनाम ना करो, बदनाम ना करो
राम को समझो, कृष्ण को जानो,
नींद से जागो ओ मस्तानो
राम ने हंसकर सब सुख त्यागे
तुम सब दुख से डर के भागे
कृष्ण ने कर्म की रीत सिखाई
तुमने फ़र्ज़ से आँख चुराई
यह गीत सुनकर सच मैं पूर्णरूप से नींद से जाग गया।
शशिकांत गुप्ते इंदौर





