भोपाल. ओबीसी को 27% आरक्षण के मुद्दे पर जारी सियासत के बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ओबीसी मंत्रियों और विधायकों के साथ फिर से मंथन किया. मंत्रालय में हुई बैठक में मंत्री मोहन यादव, कमल पटेल, भूपेंद्र सिंह, इंदर सिंह परमार, राम खिलावन पटेल, राम किशोर कांवरे, भारत सिंह कुशवाह, प्रेम पटेल, विधायक जालम सिंह पटेल, प्रदीप पटेल सहित महाधिवक्ता पुरुषेन्द्र कौरव मौजूद रहे. इसके अलावा एक्सपर्ट वकीलों का पैनल भी बैठक में मौजूद था. ये बैठक करीब 3 घण्टे तक चली. इससे पहले इसी मुद्दे पर करीब एक पखवाड़े पहले भी सीएम हाउस में बैठक हो चुकी है.

मंत्रालय में करीब 3 घन्टे तक चली बैठक में विपक्ष के सवालों का जवाब देने की रणनीति तय की गई. बैठक के बारे में जानकारी देते हुए नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा आरक्षण के मुद्दे पर चल रही सुनवाई में एमपी सरकार देश के बड़े वकीलों को कोर्ट में पेश करेगी. हाइकोर्ट में अगली सुनवाई पर रविशंकर प्रसाद और तुषार मेहता जैसे बड़े वकील पेश हो सकते हैं. सरकार कोर्ट से कहेगी अगली सुनवाई अंतिम सुनवाई के तौर पर की जाए. इसके साथ ही ओबीसी आरक्षण पर पंचायत करने की तैयारी भी है. बीजेपी जनता के बीच जाकर आरक्षण के मुद्दे पर सच्चाई बताएगी. भूपेंद्र सिंह ने कहा सरकार हर स्तर पर कानूनी लड़ाई मजबूती से लड़ेगी. उन्होंने कहा कांग्रेस ने मजबूती से कोर्ट में पक्ष नहीं रखा इसीलिए 27% आरक्षण पर दो दिन में ही स्टे लग गया था.
क्या है मामला ?
2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार पिछड़ा वर्ग को 27 फ़ीसदी आरक्षण देने का विधेयक लेकर आई थी. लेकिन 27 फ़ीसदी आरक्षण पर तत्काल ही हाईकोर्ट ने स्टे लगा दिया था. इसके बाद प्रदेश में ओबीसी को 14% आरक्षण ही दिया जा रहा है. हाल ही में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने ओबीसी को 27 फ़ीसदी आरक्षण ना मिल पाने के लिए मौजूदा शिवराज सरकार को कटघरे में खड़ा किया. उसके बाद कांग्रेस की ओर से ये आरोप लगाया गया कि सरकार आरक्षण पर कोर्ट में सही तरह से पक्ष नहीं रख रही है. इसी का काउंटर करने के लिए बीजेपी एक्टिव हुई और अब बीजेपी की ओर से ये आरोप लगाया जा रहा है कि कांग्रेस आरक्षण का विधेयक सिर्फ वोटबैंक के लिए लेकर आई थी. यही वजह है कि उस पर कोर्ट ने स्टे लगा दिया था.




