
विधानसभा चुनाव में सांसदों को उतारने का दांव बीजेपी के लिए मास्टर स्ट्रोक साबित हुआ। पार्टी के अधिकतर सांसदों ने अपने-अपने विधानसभा सीट पर जीत दर्ज हासिल करने में सफलता पाई है। अब सवाल है कि वह विधायकी छोड़ेंगे या सांसदी।
- विधायक बने सांसद अब क्या करेंगे?बीजेपी के कई सांसद विधायक निर्वाचित हुए है। ऐसे में सांसद बने विधायकों को फैसला लेना होगा कि वे विधायकी या सांसदी में किसे चुनेंगे।
सांसदों के पास कितना समय?राज्यों के विधानसभा चुनाव लड़ने और जीतने वाले कई सांसदों को अगले 14 दिन में विधानसभा और संसद सदस्यता में से एक का चयन करना होगा, नहीं तो वे अपनी संसद सदस्यता खो देंगे।
21 सांसदों को मैदान में उतारा था- बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में केंद्रीय मंत्रियों नरेन्द्र सिंह तोमर, प्रह्लाद सिंह पटेल और फग्गन सिंह कुलस्ते समेत 21 सांसदों को चुनाव मैदान में उतारा था।
किस राज्य से कितने सांसद मैदान में? भाजपा ने राजस्थान और मध्य प्रदेश में सात-सात, छत्तीसगढ़ में चार और तेलंगाना में तीन सांसदों को विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया था।
सांसद जो जीते चुनावराजस्थान से चुनाव जीतने वाले सांसद में तिजारा सीट से मैदान में उतरे बालक नाथ भी शामिल हैं।
राजस्थान से जीते कई सांसदबीजेपी सांसद किरोड़ी लाल मीणा भी जीत दर्ज करने वाले सांसदों की लिस्ट में हैं।
क्या कह रहे एक्सपर्टसंविधान विशेषज्ञ एवं लोकसभा के पूर्व महासचिव पी. डी. टी. आचारी ने संविधान के अनुच्छेद 101 के तहत 1950 में राष्ट्रपति द्वारा जारी ‘एक साथ दो सदनों की सदस्यता का प्रतिषेध संबंधी नियम’ का हवाला देते हुए कहा, ‘यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो 14 दिन की अवधि समाप्त होने पर वे संसद की सदस्यता खो देंगे।’
छत्तीसगढ़ : बघेल को मिली हारछत्तीसगढ़ में बीजेपी सांसद को विजय बघेल को हार का सामना करना पड़ा है।





