पुष्पा गुप्ता
_अगर होली के मौके पर रंग खेलना आपको पसंद नहीं तो भी पर इस बार आप जरूर खेलें होली। रंगक्रीड़ा से होता है मेंटल हेल्थ को फायदा।_
रंगों का मन पर प्रभाव पड़ता है.
यदि आप किसी प्रकार की मनःसमस्या का सामना कर रहे हैं, तो होली के दौर और माहौल का हिस्सा अवश्य बनें।
होली के दिन सुबह से ही यह जैसी आवाज़ में गूंज उठती है-बुरा न मानो रंगों की होली है। जब हम किसी बात को बुरा मानते हैं तो उसे दिल से लगा लेते हैं। हमारा वाई मन या मेंटल हेल्थ प्रभावित होता है। लेकिन जैसे हम होली के रंग एक-दूसरे के चेहरे पर मलते हैं, तो सारे गिले-शिकवे भूल जाते हैं। हमारा मन खुशियों से भर जाता है।
तनाव या तनाव हमसे कोसों दूर भाग जाता है। मनोचिकित्सक भी यही कहते हैं कि होली हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए बढ़िया है। होली खेलने पर हमारा स्ट्रेस और एंग्जाइटी लेवल घटता है। क्या वास्तव में रंगों का हमारे मन पर प्रभाव पड़ता है.
*1. शांत महसूस कराते हैं रंग*
अलग-अलग तरह के रंग हमें अच्छा और शांत महसूस कराते हैं। ब्राइट कलर आपको बढिया महसूस करा सकते हैं।
आप किसी मनो समस्या से परेशान हैं और आप होली के अलग-अलग रंगों से खेल सकते हैं। लाल, गुलाबी, पीले जैसे चमकीले रंग हमारी भावनाओं को बाहर निकलने में मदद करते हैं। रंग अच्छी और बुरी दोनों तरह की भावनाओं को बाहर लाने में मदद करते हैं। यह हमारे व्यवहार को भी प्रभावित करता है।
*2. ब्रेन पर रंगों का प्रभाव*
होली के दौरान खेले जाने वाले ब्राइट कलर और प्ले फुल वातावरण व्यक्ति को सभी परेशानियों को भूलने के लिए मजबूर कर सकते हैं।
रंग हमारे जीवन में एक खास तरह की जीवंतता लाता है। जीवंत वातावरण निश्चित तौर पर मस्तिष्क को आराम और सुकून देता है।
*3. रंग और मस्तिष्क का संबंध*
जब हम ब्राइट कलर देखते हैं, तो यह मस्तिष्क के लिए उत्प्रेरक का काम करता है। मस्तिष्क अच्छी भावनाओं से भर जाता है। चमकीले रंग हमारे अंदर आंतरिक चमक और खुशी का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनसे हमें खुशी मिलती है।
इससे मूड में सुधार होता है। यदि आप किसी प्रकार की समस्या का सामना कर रही हैं, तो होली के रंगों और माहौल का हिस्सा बनें। किसी ख़ास रंग की पसंद के पीछे आपकी अपनी च्वाइस काम कर सकती है। हर व्यक्ति की पसंद अलग-अलग होती है। लेकिन रंगों का हमारे मस्तिष्क पर प्रभाव पड़ता है।
*4. सामाजिक समारोह में होता है कम्युनिकेशन*
इस त्योहार से हमें एक और फायदा मिलता है। होली के अवसर पर हम अपने दोस्तों और परिवारवालों से मिलते-जुलते हैं। एक-दूसरे के पीछे रंग लेकर दौड़ते-भागते हैं।
दोस्तों और परिवारवालों से मिलने-जुलने और बातचीत करने से हमारा माइंड रिलैक्स होता है।
एक-दूसरे से बातचीत स्थापित करते हैं। मिलने-जुलने और बातचीत करने से हमारा मन शांत हो जाता है और खेलने से शरीर में खिंचाव भी हो जाता है। लोगों से मेलजोल आनंद और मस्ती से भर देता है।
*5. क्या कहती है रिसर्च?*
फ्रंटियर्स ऑफ़ साइकोलॉजी जर्नल में रंगों के मेंटल हेल्थ पर प्रभाव की स्टडी की गई।
शोधकर्ता मीयर और रॉबिन्सन ने अपने निष्कर्ष में बताया कि ख़ुशी, गम, क्रोध प्रकट करना, ये सभी मेंटल स्टेटस को दर्शाते हैं।
लोग अपनी भावनाओं को रंगों से जोडकर प्रकट करते हैं। सफेद को ख़ुशी या प्योरिटी से जोड़ कर देखते हैं। वहीं दुख या गम को काले से जोडकर और क्रोध को लाल से जोड़कर बताते हैं।
हम कहते हैं कि गुस्से से सामने वाले व्यक्ति का चेहरा लाल हो गया। रंग सीधे शरीर क्रिया विज्ञान को प्रभावित करता है और उत्तेजना को बढ़ाता है। यह प्रभाव रंगों के वेवलेंथ पर भी निर्भर करता है।
नीली रोशनी की वेवलेंथ मस्तिष्क को शांत करती है। इसलिए इस रंग को मेडिटेशन से जोड़कर देखा जाता है।
तो अपने दिमाग को तंदुरुस्त रखने के लिए इस बार जरूर मनाएं होली। (चेतना विकास मिशन).





