शशिकांत गुप्ते
मादक पदार्थ के अवैध व्यापार में सलग्न लोगों ने हत्या की। सुरक्षा में चूक हुई। वक्तव्य जारी हुए।दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी।
अहम सवाल तो यह है कि मादक पदार्थो के किए जा रहें व्यापार की कड़ियां कहाँ तक फैली हैं,यह कैसे पता चलेगा? कौन पता लगाएगा?
सामान्यज्ञान का यदि उपयोग करें तो कोई भी अवैध कार्य बगैर भ्रष्ट्राचार के सम्भव ही नहीं हैं।
अभी तक तो उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर मिलना असंभव थे।
अब मिलने की उम्मीद बन गई है।
देश में दोनों ही राजनैतिक दल निहायत ही ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ,और पारदर्शिता के पक्षधर हैं।
एक तो दल की उत्पत्ति ही भ्रष्ट्राचार के विरुद्ध किए गए आंदोलन से हुई है।
दूसरा दल इसी भ्रष्ट्राचार विरोधी आंदोलन का श्रेय प्राप्त करने में सफल रहा है।
बिल्ली के भाग से छींक टूटा, वाली कहावत चरितार्थ हो गई।
सियासित में अब होगी स्वस्थ प्रतिस्पर्धा।
एक दल ने तो महज आठ वर्षों में अच्छेदिन दिखा दिए।
विरोधियों का आरोप है कि महंगाई ने आमजनता को दिन में ही तारे दिखा दिए। बेरोजगारों की नींद ही उड़ गई है। विरोधियों की सुनता ही कौन है? बेचारे एक दो चैनल वाले साहस करतें भी हैं,तो उन चैनलों को देखता ही कौन है?
लॉडस्पीकर से हनुमान चालीसा का पाठ हो गया। आराध्य भगवान गणपतिजी के पिताश्री भगवान महादेवजी के शिवलिंग की खोज में व्यवस्था व्यस्त है। यहाँ वहाँ जहाँ तहाँ मत पूछों कहाँ कहाँ सर्वत्र खोज जारी है।
यही तो प्रमाण है,धार्मिक आस्था का।
विषयांतर को यहीँ पूर्ण विराम देतें हुए। पुनः मुद्दे पर आतें हैं।
एक दल ने आठ वर्षों में ना तो किसी को खाने दिया और ना ही ……. खाया?
दूसरें दल ने सिद्ध कर दिया की जनता को कितना भी मुफ्त बांटो सरकारी खजाना खाली नहीं होगा। इस दल ने तो भ्रष्ट्र आचरण के पता चलते ही राज्य के एक मंत्री की तत्काल गिरफ्तार करवा दिया। यह विश्व कीर्तिमान है इस निर्णय के लिए मानजी का मान सम्मान होना ही चाहिए।
मादक पदार्थो के व्यापार में सलग्न लोगों से भी जल्दी ही निपटा जाएगा। अब कोई ऐसी वैसी सरकार नहीं है। शून्य भ्रष्ट्राचार का नारा बुलंद करने वाली सरकार है।
भ्रष्ट्राचार होगा ही नहीं तो अवैध व्यापार कैसे संभव होगा? ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी।
यही स्थिति केंद्र में भी है, आठ वर्षों में कोई एक भी भ्रष्ट्राचार का दाग नहीं लगा है।
दिल्ली में तो शिक्षा,और चिकित्सा का कार्य बहुत अच्छे स्तर पर चल रहा है।
केंद्र की उपलब्धियों का बखान तो गौरव दिवस पर हो ही गया है।
जब मूलभूत समस्याएं समाप्त हो जाती है, तब लोग धार्मिक कार्यो में सक्रिय हो जातें हैं।
यही तो देश में हो रहा है। देश में सर्वत्र धार्मिकता माहौल बन गया है। शिवलिंग की खोज चल रही है। अब हनुमानजी की जन्म स्थली की खोज की जा रही है।
हनुमानजी की जन्म स्थली को लेकर दो राज्य दावा कर रहें हैं।
बात का ऐसा ही है,किसी बिंदु से निकलती है, दूर तलक जाती है।
प्रारम्भ हुआ था। मादक पदार्थों के फैलातें अवैध व्यापार से।
औषधि को भी drug कहतें हैं, और मादक पदार्थ को भी drug कहतें हैं।
औषधि हो या मादक पदार्थ दोनों का अति सेवन घातक ही होता है।
वर्तमान में तो धर्मकाल चल रहा है।
रीतिकाल के प्रख्यात कवि बिहारीलाल जी यह दोहा प्रासंगिक है।
कनक कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय।
वा खाए बौराय जग, या पाए बौराय।।
भावार्थ;- सोने की मादकता धतूरे की मादकता से सौ गुनी अधिक है। धतूरे को खाने से लोग बौरातें हैं। परंतु सोने को पाने मात्र से ही लोग बौरातें हैं।
इस दोहे में यमक अलंकार का प्रयोग किया है।
इसीलिए ड्रग और ड्रग के अंतर को समझना जरूरी है।
शशिकांत गुप्ते इंदौर





