पिपरिया के समाजवादी साथी गोपाल राठी अपने मित्र के साथ 3600 किलोमीटर की नर्मदा परिक्रमा यात्रा पर निकले हैं मोटरसाइकिल पर उनकी यात्रा गांव गांव पहुंचकर नर्मदा बचाने के लिए अलख जगा रही है। लगातार चल रही यात्रा में चुटका परियोजना जैसी नर्मदा को खा जाने वाली योजनाओं के खिलाफ भी लोगों का आक्रोश देखने में आ रहा है । राठी और उनके साथी का लोग ना केवल स्वागत कर रहे हैं बल्कि उन्हें उत्साह भी प्रदान कर रहे हैं तथा साथ देने का वादा भी ।अपनी इस नर्मदा परिक्रमा के संस्ममरण गोपाल राठी जी रोज फेसबुक पर लिख भी रहे हैं और साझा भी कर रहे हैं । निश्चित ही उनका यह कार्य ना केवल नर्मदा को बचाने का बड़ा आंदोलन बनेगा बल्कि मध्यप्रदेश के लिए अनुकरणीय भी होगा ।उनकी ऐसी ही एक रिपोर्ट…….
आंवली घाट के समीप रेहड़ा गांव में हमारे चाचाजी श्री गिरधर टावरी रहते है l 22 तारीख को रात्रि विश्राम और भोजन वही किया l 23 मार्च को सुबह नाश्ता करके रेहड़ा से रवाना हुए तो बानापुरा में हमारे संघर्ष के पुराने साथी बड़े भाई श्री सब्बरसिंह जी मंडलोई और इंदिरा जी मंडलोई हमारी प्रतीक्षा ही कर रहे थे l मंडलोई दम्पत्ति ने गर्मजोशी से स्वागत किया l नर्मदा की वर्तमान स्थिति से लेकर बहुत सी नई पुरानी बातें हुईं l धर्म अध्यात्म भी हमारी चर्चा के बिंदु रहे l दोपहर का भोजन उनके साथ ग्रहण कर हमने आगे की राह पकड़ी l टिमरनी में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित सुप्रसिद्ध विज्ञान स्रोत शिक्षक श्री उमेश चौहान से भेंट करना और पुराने दिनों को याद करना सुखद अनुभव रहा l पूरे परिवार ने हमारी आवभगत की और नाश्ता चाय के साथ हमारा सत्कार किया l टिमरनी से निकल कर हरदा से करीब 3 किलोमीटर पहले उड़ा गांव आता है l उड़ा के स्कूल में पदस्थ शोभा वाजपेयी का आग्रह था कि हम रास्ते मे पढ़ने वाले उनके स्कूल में ज़रूर आये l जब हम उनके स्कूल पहुंचे तो वे अपने शिक्षक साथियों के साथ राज्य शिक्षा केन्द्र से प्रसारित आन लाइन प्रवचन श्रवण कर रही थी l हमारे स्कूल पहुंचते ही उन्होंने अपने स्टाफ से हमारा परिचय कराया l सभी शिक्षक शिक्षिकाओं को अपनी यात्रा का उद्देश्य बताया और पर्चे वितरित किये l उड़ा स्कूल से सीधे हंडिया घाट पहुंचे और नर्मदा जी को प्रणाम किया l हंडिया के सामने वाला घाट नेमावर है l जहां से कुछ ही दूरी पर हमारे सहयात्री साथी गजानंद यादव का घर है l हंडिया घाट पर गजानंद के मित्र योगेश विश्नोई और सुनील विश्नोई मिलने आये l योगेश इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े है l हंडिया – नेमावर में नर्मदा जी नाभी कुंड है l यहां हर साल पंचकोसी परिक्रमा होती है जिसमे हज़ारो नर नारी पूरी श्रद्धा से शामिल होते है l बताया गया कि हंडिया नेमावर घाट के मध्य पहले बहुत रेत थी l लेकिन हमें रेत का नामोनिशान नहीं दिखा l पूरे घाट में पत्थरों के बीच से होकर नर्मदा जी मंथर गति से आगे बढ़ती है l पत्थरो के बीच कहीं कही ठहरी हुई है l हंडिया में नर्मदा दर्शन के बाद वापिस हरदा लौटे तो मानसरोवर रेस्टारेंट में शहीद भगत सिंह सुखदेव राजगुरु के शहादत दिवस पर कार्यक्रम रखा गया था l कार्यक्रम में लगभग एक सैकड़ा युवक युवती और राजनैतिक सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे l जब हम होषंगाबाद में थे तब मित्र हेमंत टाले ने हमसे हरदा आने की तिथि और समय पूछा तो हमने उनसे निवेदन किया था कि हम 23 मार्च की शाम तक हरदा आएंगे l उस दिन भगतसिंह और उनके साथियों का शहादत दिवस है अगर इस निमित्त कोई कार्यक्रम हो तो हमे उसमें शामिल होकर खुशी होगी l भाई हेमंत ने हमारे आग्रह पर अल्प सूचना में यह कार्यक्रम आयोजित किया था l अल्प सूचना पर आयोजित किये गए इस अनौचरिक और गरिमामय कार्यक्रम में शिरकत कर हमें अत्यंत प्रसन्न्ता हुई l इस संगोष्ठी नुमा समारोह में विभिन्न वक्ताओं ने अपने अपने वी विचार प्रकट कर शहीदों के सपनो का बार बार स्मरण किया l नर्मदा चेतना यात्री दल के सदस्य द्वय गोपाल राठी व गजानन्द यादव ने भी अपने विचार व्यक्त किये l इस कार्यक्रम में बहुत से पुराने मित्रों और परिचितों से भेंट हुई lइस समारोह में प्रमुख वक्ता की हैसियत से बोलते हुए मैंने भगतसिंह सुखदेव राजगुरु की शहादत के साथ ही शहीद हेमू कालानी और डॉ लोहिया के जन्मदिन पर उनका स्मरण किया l शहीद भगतसिंह और उनका समूह क्रांतिकारी समाजवादी वामपंथी विचारों से प्रेरित थे l गांधी की छवि को ध्वस्त करने के लिए भगतसिंह या सुभाषचन्द्र बोस के नाम का उपयोग और नेहरू के योगदान को कम करने के लिए शास्त्री या पटेल का इस्तेमाल करना वैचारिक कुटिलता है जिसे समझने की जरूरत है l आज़ादी के दीवानों को महापुरुषों व महान देशभक्तों को एक दूसरे के खिलाफ खड़ा करना एक षड्यंत्र है l भगतसिंह और उनके सपनों विचारों को पढकर समझने की आवश्यकता को बताया lनर्मदा चेतना यात्रा के हम दोनों साथियों का स्वागत किया गया l हमने मंडला जिले में बनने जा रहे चुटका परमाणु परियोजना के खतरों से अवगत कराते हुए नर्मदा के अस्तित्व को बचाने का आग्रह किया lअंत मे जोशीले नारों के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ l
रात्रि विश्राम और भोजन व्यवस्था मित्र हेमंत टाले के घर पर थी l रात में पत्रकार मित्र गुरुदत्त राजवैद्य ,महेश भंवरे ,मुकेश पांडे हेमंत भाई के घर ही मिलने आ गए l देर रात तक हम अपनी यात्रा के उद्देश्य और अपने अब तक के अनुभव सुनाते रहे l





