पुणे
‘डॉ. अदनान को कभी लोगों से घुलते-मिलते नहीं देखा था। न किसी से बहुत बात करते, न किसी से झगड़ा था। हफ्ते में सिर्फ शुक्रवार को घर पर रहते थे, बाकी 6 दिन हॉस्पिटल में काम करते थे। घर में बस उनके बुजुर्ग पिता हैं। बेटे की गिरफ्तारी के बाद से बीमार चल रहे हैं।’

पुणे के नामचीन डॉक्टर अदनान अली के बारे में बताते हुए पड़ोसी अपनी पहचान छिपा लेते हैं। अदनान पर आतंकी संगठन ISIS के लिए काम करने का आरोप है। उसका फ्लैट कोंडवा की परमार पवन सोसाइटी में है।

डॉक्टर अदनान अली का घर इसी सोसाइटी में है। ये कोंडवा की पॉश सोसाइटी मानी जाती है। यहां 2 बीएचके फ्लैट का किराया 22 से 25 हजार रुपए महीने है।
43 साल के अदनान को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी NIA ने 27 जुलाई 2023 को अरेस्ट किया था। डॉ. अदनान पुणे के एक बड़े हॉस्पिटल में 16 साल से कंसल्टिंग एनेस्थीसियोलॉजिस्ट था। पुणे के सरकारी मेडिकल कॉलेज से MBBS और MD की डिग्री ली और इंग्लिश, हिंदी, मराठी, उर्दू, जर्मन भाषा का जानकार है।

अदनान की गिरफ्तारी से सुरक्षा एजेंसियों को दो बातें पता चलीं, पहला कि कोंडवा में ISIS अपनी जगह बना रहा है, दूसरा अदनान जैसे पढ़े-लिखे और मशहूर लोग भी उसके मोहरे बन गए हैं। अदनान और उसके 5 साथी ISIS के अल-सुफा मॉड्यूल से जुड़े हैं।
अल-सुफा सीरिया में एक जगह है, जो ISIS का आखिरी गढ़ थी। ये ISIS का नया मॉड्यूल है, जिसका भारत में पहला केस मिला है।
अदनान तक सुरक्षा एजेंसियां मोहम्मद इमरान, मोहम्मद यूनुस सकी और मोहम्मद शाहनवाज नाम के तीन लड़कों के जरिए पहुंची थीं। ये लोग कौन थे, क्या करते थे और क्या करना चाहते थे, ये जानने भास्कर इन सभी के घर पहुंचा। आसपास के लोगों और पुलिस अधिकारियों से बात की। पढ़िए ये रिपोर्ट…
बाइक चुराते पकड़े गए थे इमरान, यूनुस और मोहम्मद शाहनवाज…
18 जुलाई की देर रात करीब 2.45 बजे कोथरुड पुलिस स्टेशन में पोस्टेड कॉन्स्टेबल प्रदीप चव्हाण और अमोल नाजन पेट्रोलिंग पर थे। उन्होंने देखा कि तीन लोग सड़क किनारे खड़ी एक बाइक का लॉक तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। प्रदीप ने आवाज लगाई तो तीनों भागने लगे। प्रदीप और अमोल ने दौड़कर तीनों को पकड़ लिया।

कोथरुड पुलिस स्टेशन में तैनात कॉन्स्टेबल प्रदीप चव्हाण (बाएं) और अमोल नाजन (दाएं)। इन्हीं दोनों की वजह से ISIS के मॉड्यूल को पकड़ा जा सका।
तीनों से आईडी कार्ड मांगा, दो ने अपना आधार कार्ड दिखाया, लेकिन तीसरे के पास आईकार्ड नहीं था। एक कॉन्स्टेबल ने तीनों के मोबाइल नंबर लिए और एक को कॉलर-आइडेंटिफिकेशन ऐप से कॉल किया, ताकि उनका असली नाम पता चल सके। आधार कार्ड में लिखा नाम कॉलर आईडी ऐप में दर्ज नाम से मैच नहीं हुआ।
कॉन्स्टेबल प्रदीप चव्हाण और अमोल नाजन ने तीनों को गाड़ी में बैठाया और थाने की ओर चल दिए। रास्ते में एक शख्स गाड़ी से कूदकर भाग गया। बचे दो लोगों 24 साल के मोहम्मद यूनुस और 31 साल के मोहम्मद शाहनवाज को थाने लाकर कड़ाई से पूछताछ की गई। पता चला कि दोनों के पास फेक आईडी थी।
उनका तीसरा साथी मोहम्मद इमरान है। 23 साल का इमरान राजस्थान में 2022 में एक कार से विस्फोटक बरामद होने के मामले में वांटेड है। NIA उसकी तलाश कर रही है। NIA का जिक्र आते ही पुलिस अलर्ट हो गई। सर्च ऑपरेशन चलाकर इमरान को भी अरेस्ट कर लिया गया। केस की जानकारी महाराष्ट्र ATS को भी दी गई।
19 जुलाई को महाराष्ट्र ATS की एक टीम ने कोंडवा की चेतना गार्डन सोसाइटी में छापा मारा। इमरान, यूनुस और शाहनवाज इस सोसाइटी के फ्लैट नंबर-17 में दो साल से किराए पर रह रहे थे।
ATS की टीम को एसपी जयंत मीणा लीड कर रहे थे। तलाशी के दौरान उन्हें एक ड्रोन, ड्रोन के पार्ट्स, एक इलेक्ट्रॉनिक तराजू, कुछ गोलियां, दो फायरआर्म होल्स्टर, दो फर्जी आधार कार्ड, टेम्प्रेचर गेज, सफेद रंग का पाउडर, बाइक की चाबियां, कुछ डॉक्यूमेंट, वायर और सर्किट मिले।
सभी की फोरेंसिक जांच और एक्सप्लोसिव वेपोर डिटेक्शन टेस्ट चल रहा है। अगर मौके से एक्सप्लोसिव न मिले हों, तो इस टेस्ट के जरिए हवा से पता किया जाता है कि उस जगह विस्फोटक थे या नहीं।
केस का मास्टरमाइंड और फाइनेंसर IT इंजीनियर
इमरान की गिरफ्तारी के बाद केस में NIA की एंट्री हुई। NIA को पता चला कि इमरान, यूनुस और शाहनवाज के लिंक पुणे की आईटी फर्म में काम करने वाले इंजीनियर जुल्फिकार अली बोर्डवाला से हैं। जुल्फिकार को ISIS से जुड़े एक केस में 3 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। वो मुंबई की आर्थर रोड जेल में बंद है।
NIA के एक अधिकारी ने भास्कर को बताया कि जुल्फिकार ही इस केस का मास्टरमाइंड और फाइनेंसर है। उसने इमरान, यूनुस और शाहनवाज को ट्रेनिंग दिलवाई और पैसे भिजवाए थे। इमरान तक पैसे पहुंचाने वाला कदीर दस्तगिर पठान भी पुलिस की गिरफ्त में है।
गरीब नौजवानों को ISIS में शामिल करा रहा था डॉक्टर अदनान
चारों से हुई पूछताछ में NIA को डॉ. अदनान का नाम मिला। NIA ने उसके फ्लैट पर छापा मारा तो ISIS से जुड़े डॉक्यूमेंट मिले। NIA ने अदनान के सभी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जब्त कर लिए हैं।सेंट्रल जांच एजेंसी से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि अदनान के पास मिले डॉक्यूमेंट से पता चला कि उसका संबंध ISIS से है। इसमें गरीब नौजवानों को आतंकी संगठन से जोड़ने की डिटेल भी है।
इसके अलावा 4 आरोपियों से यहूदी कम्युनिटी सेंटर की फोटो मिली है। इससे साफ हो गया कि ISIS के निशाने पर भारत ही नहीं, इजराइल के लोग भी हैं। इसके बाद मुंबई पुलिस ने कोलाबा में चाबड़ हाउस की सिक्योरिटी बढ़ा दी। 26 नवंबर 2008 को मुंबई पर हुए आतंकी हमले के दौरान चाबड़ हाउस पर भी अटैक हुआ था।
अदनान समेत पांचों आरोपियों से पूछताछ के बाद NIA आकिफ अतीक नाचन तक पहुंची। वो IED की टेस्टिंग में माहिर है। उसने ही इमरान और मोहम्मद यूनुस को छिपाया था। आकिफ को मुंबई के बोरीवली, ठाणे और भिवंडी में हुई रेड के बाद अरेस्ट किया गया।
अदनान और तीनों आरोपियों के घर डेढ़ किमी दूर
अब हम डॉ. अदनान के घर पहुंचे। परमार पवन नाम की उसकी सोसाइटी कोंडवा के पॉश एरिया में है। सोसाइटी के गार्ड ने हमें बाहर ही रोक दिया, कहा कि मीडिया की एंट्री बंद कर दी गई है। गेट पर एक पड़ोसी मिले, डॉ. अदनान के बारे में कुछ बातें कीं, लेकिन कैमरे पर नहीं आए। बस कहा कि वो किसी से ज्यादा बात नहीं करते थे।
यहां से करीब 1.5 किमी दूर चेतना गार्डन सोसाइटी है, जहां इमरान और उसके दोनों साथी रहते थे। फ्लैट नंबर 17 में तीनों 3 साल से किराए पर रह रहे थे। ये फ्लैट थर्ड फ्लोर पर है। फ्लैट अभी बंद है। यहीं से ड्रोन के पार्ट्स और संदिग्ध मटीरियल मिला था।

चेतना गार्डन सोसाइटी का फ्लैट नंबर-17, जहां इमरान और उसके दोनों साथी रहते थे। फिलहाल इसमें ताला लगा हुआ है।
सोसाइटी में हमें असलम खान मिले। वे 7 साल से यहां रह रहे हैं। असलम कहते हैं, ‘पुलिस तीनों को जांच के लिए लाई, तब हमें उनके बारे में पता चला। मैं तीनों को यहां से आते-जाते देखता था, पर कभी बात नहीं हुई। उन पर ज्यादा ध्यान भी नहीं दिया। हमें बिल्कुल नहीं लगता था कि वे आतंकी हो सकते हैं। इस घटना के बाद से हम लोग अलर्ट हो गए हैं।’
पड़ोसी बोले- हमारे छोटे-छोटे बच्चे हैं, अब डर लगने लगा है…
अस्मत खान, इमरान के पड़ोसी हैं। कहते हैं, ‘हम सुबह अपने काम पर चले जाते हैं और शाम को लौटते हैं। घर पर हमारे छोटे-छोटे बच्चे अकेले रहते हैं। अब यहां रहने में डर लग रहा है। अल्लाह का शुक्र है कि किसी बड़ी घटना से पहले ही खुलासा हो गया और हम इस मुसीबत से बच गए। अब तो हम गेट बंद रखते हैं। सोसाइटी में वॉचमैन रख लिया है। सभी आने-जाने वालों की एंट्री करवा रहे हैं।’
रात 10 बजे के बाद पुलिस बाहर नहीं निकलने देती…
चेतना गार्डन सोसाइटी से निकलकर हम कोंडवा के मेन मार्केट पहुंचे। सर्विस इंजीनियर मंजूर शेख 12 साल से इस इलाके में रह रहे हैं। वे कहते हैं, ‘हमें पता चला है कि कुछ लोग पकड़े गए हैं। इसके अलावा हमें कुछ भी नहीं पता।’मोहम्मद इब्राहिम इकबाल शेख 27 साल से इस इलाके में रहते हैं। वे कहते हैं, ‘आतंकियों के पकड़े जाने से यहां के लोगों पर असर नहीं पड़ता।’
माहौल देखकर लगता है, ये इलाका छोड़ दें…
सभापति दुबे 50 साल से कोंडवा में रह रहे हैं। उनकी 35 साल पुरानी डेयरी है। वे कहते हैं, ‘यहां बहुत गलत काम हो रहा है। बाहर से आकर लोग बस रहे हैं और उनकी वजह से कोंडवा का नाम खराब हो रहा है।’
पुलिस ने गश्त बढ़ाई, किराएदारों के रिकॉर्ड चेक कर रही
आतंकवाद के शक में 6 लोगों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस क्या कर रही है, ये जानने हम कोंडवा पुलिस स्टेशन पहुंचे। मामला NIA के पास होने की बात कहकर स्टेशन इंचार्ज ने कैमरे के सामने बात नहीं की। बताया कि हमने गश्त बढ़ा दी है। इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की कैपेसिटी डबल कर दी है। किराए पर रह रहे सभी लोगों का रिकॉर्ड चेक कर रहे हैं।
ड्रोन के जरिए एरियल ब्लास्ट करना चाहते थे आतंकी…
महाराष्ट्र ATS के एक अधिकारी ने बताया कि पकड़े गए आतंकियों से 500 GB मेमोरी वाली पेन ड्राइव मिली है। इनका डिलीट डेटा रिकवर कर रहे हैं। पूछताछ में पता चला है कि उन्हें अटैक के अलग-अलग तरीकों की ट्रेनिंग दी गई थी। बम ब्लास्ट का ट्रायल पुणे, कोल्हापुर और सतारा के जंगलों में किया गया था। जंगल में ये टेंट में रहते थे। ये ड्रोन के जरिए एरियल ब्लास्ट की टेक्नीक सीख रहे थे।
अधिकारी के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में से एक मोहम्मद इमरान ग्राफिक्स डिजाइनर है। NIA ने उस पर 5 लाख का इनाम रखा था। ये केस राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में दर्ज है। इमरान और उसके दोनों साथियों के खिलाफ कोथरुड पुलिस स्टेशन में चोरी, जालसाजी, इंडियन आर्म्स एक्ट और महाराष्ट्र पुलिस एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था। बाद में सभी पर UAPA के तहत केस दर्ज किया गया।अधिकारी ने बताया कि आरोपियों से बरामद सामान और उनकी ट्रेनिंग बताती है कि ये जल्द ही बड़ा हमला करने की फिराक में थे।
NIA ने कहा- गिरफ्तार आतंकी ISIS का महाराष्ट्र मॉड्यूल बनाना चाहते थे
NIA ने कोर्ट में दी रिमांड एप्लिकेशन में कहा कि आरोपियों ने ISIS की आतंकी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की साजिश रची थी। ये देश में ISIS का महाराष्ट्र मॉड्यूल तैयार कर रहे थे। NIA ने कहा कि हम इस मॉड्यूल की और जांच करना चाहते हैं, इसलिए डॉ. अदनान समेत सभी आरोपियों को 23 अगस्त तक कस्टडी में रखा है।
डॉ. अदनान ने पुणे के प्रतिष्ठित बीजे मेडिकल कॉलेज से 2001 में MBBS और 2006 में MD in anaesthesia किया था। कई मेडिकल जर्नल्स में उसके रिसर्च पेपर पब्लिश हुए हैं। NIA इन रिसर्च पेपर्स की भी जांच कर रही है।
कोंडवा के फ्लैट में ली IED बनाने की ट्रेनिंग
NIA के एक अधिकारी ने बताया कि आकिफ अतीक नाचन ने IED बनाने में इस्तेमाल होने वाला सामान खरीदा था। वो इमरान और यूनुस के कोंडवा वाले फ्लैट में कई दिन रहा और उन्हें ट्रेनिंग देता था। उसने 2022 में बम बनाने की ट्रेनिंग दी थी। इसमें डेमो IED भी बनाकर दिखाई गई।
अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के अलावा इस ट्रेनिंग में कुछ और लोग शामिल हुए थे। उनकी तलाश जारी है। ये सभी ISIS के इशारे पर काम कर रहे थे।
नाचन के घर मिले डॉक्यूमेंट में मिले ट्रेनिंग के सबूत
NIA के अधिकारी ने बताया कि आकिफ अतीक नाचन का घर ठाणे के पडगा में है। घर से कई मोबाइल फोन, कुछ हार्ड डिस्क और हाथ से लिखे डॉक्यूमेंट मिले हैं। सभी की जांच करवाई जा रही है। इनमें IED ट्रेनिंग के भी कुछ डॉक्यूमेंट हैं।
6 लोगों की गिरफ्तारी से साफ है कि ISIS भारत में मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। सभी आरोपी कोंडवा इलाके से हैं। 5 लाख की आबादी वाला कोंडवा 2008 से पहले प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिमी और इंडियन मुजाहिदीन का गढ़ था। यहां 300 से ज्यादा आतंकियों के एक्टिव रहने की जानकारी मिली थी।
2010 में पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के 2 आतंकी कोंडवा से गिरफ्तार किए गए थे। वे बेंगलुरु में इंडियन साइंस इंस्टिट्यूट पर हमला करने की साजिश रच रहे थे। 2014 में NIA ने एक शख्स को गिरफ्तार किया था। 2022 में NIA ने 5 लोगों को अरेस्ट किया, जो ISIS मॉड्यूल से जुड़े थे।




