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कम खतरनाक़ नहीं है महिलाओं में बढ़ती सेक्सुअल अराउजल डिसऑर्डर की समस्या

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(यह लेख चेतना-स्टेमिना विकास मिशन के डायरेक्टर डॉ. विकास मानव से हुए संवाद पर आधारित है.)
👀आरती शर्मा (बोधगया)

दुनिया में कई महिलाएं सेक्शुअल अराउजल डिसऑर्डर से गुजर रही हैं : खासकर पाश्चात्य महिलाएं।
भारत की महिलाएं ठंडेपन से भरी रही हैं। महज 5- 7 मिनट का सेक्स पाने से उनका उत्तेजित होना ही असंभव, तृप्ति का अहसास- अनुभव कहां नशीब होना है। ऐसे में सेक्स उनके लिए आनंद के बजाए पीड़ादायी बनता है। उनको एक समय बाद इस टॉपिक से घिन तक आने लगती है। वे पुरुष का मन रखने या रिश्ता बचाने के लिए पीड़ा/घृणा सहकर भी उसके इस्तेमाल की वस्तु बनती रहें ये अलग बात है।
लेकिन~
अब बाज़ारवादी भारतीय आधुनिकाओं में भी ये डिसऑर्डर देखा जाने लगा है।
इनमें स्वस्थ सेक्स पाने के लिए उनके प्राइवेट पार्ट में लगातार उत्तेजना महसूस होती रहती है।
पहले इसे जहां शारीरिक और मनोवैज्ञानिक कारणों से जोड़ा जाता था वहीं नई स्टडी ने इसकी वजह न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम बताई है।

जी हां। महिलाओं में लगातार असहनीय यौन उत्तेजना बने रहने की बीमारी के संबन्ध में Persistent Genital Arousal Disorder से जुड़ी नई स्टडी सामने आई है जिसमें इस डिसऑर्डर की वजह को न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम से जोड़ा गया है। पहले इस बीमारी को शारीरिक या मनोवैज्ञानिक माना जाता था और इसी के अनुसार इसका इलाज भी होता था।

क्या है PGAD?
(पीजीएडी) ऐसी समस्या है जो सिर्फ महिलाओं में होती है।
इससे पीड़ित महिलाओं को सेक्शुअल एक्साइटमेंट नहीं होने पर भी प्राइवेट पार्ट में लगातार यौन उत्तेजना का अनुभव होता रहता है।
यह फीलिंग सेक्स या मॉस्टरबेशन के बाद भी बनी रहती है।
इस स्थिति में महिलाओं को स्ट्रेस, डिप्रेशन, शरीर में दर्द रहने, बैठने या उठने जैसी सामान्य शारीरिक क्रिया में भी परेशानी होने लगती है। यह उनके सामान्य जीवन या रिलेशनशिप को जीने में भी बाधा बनता है।

यूं हुई स्टडी
Massachusetts General Hospital के जरिए पर्सिस्टेंट जेनिटल अराउजल डिसऑर्डर पर की गई स्टडी में ऐसी महिलाओं पर रिसर्च की गई जिनमें 11 से 70 साल की उम्र के बीच इस बीमारी के लक्षण दिखना शुरू हुए।
इनमें से ज्यादातर महिलाओं ने यह बात मानी कि उन्हें हर दिन एक मिनट से लेकर चार घंटे तक इस तरह के अराउजल फील होते हैं।

जब बीमारी
इसमें सेक्स के लिए पुरुष के सामने गिड़गिड़ाती तक है महिला। सेक्स न मिलने पर वह दर्द तक झेलती है।
पीजीएडी की समस्या महिलाओं के यौन अंग से दिमाग तक संकेत पहुंचाने वाली नर्व्स में आई परेशानी या फिर रीढ़ की हड्डी के सबसे निचले भाग में किसी वजह से हुए नुकसान के कारण होती है।
स्टडी में यह भी सामने आया कि इस समस्या से जूझ रही महिलाओं ने जब मनोवैज्ञानिक या गाइनोलॉजिकल ट्रीटमेंट लिए तो उन्हें अपनी कंडीशन में ज्यादा अंतर महसूस नहीं हुआ।
यहां तक कि लोकल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन भी उन्हें थोड़ी देर की ही राहत दे सका। वहीं न्यूरोलॉजिकल इलाज 80 प्रतिशत मरीजों में कारगार साबित हुआ।

लीड रिसर्चर ब्रूस प्राइस के अनुसार~
लोगों को इस मेडिकल कंडीशन के बारे में जानना जरूरी है। उन्हें यह पता होना चाहिए कि यह मनोवैज्ञानिक नहीं बल्कि न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम है।
उन्होंने आगे कहा~
इससे जूझ रही कई महिलाएं अपनी परेशानी के बारे में किसी को नहीं बताती हैं। उन मरीजों के लिए भी इस बीमारी को समझना मुश्किल हो जाता है जो ऐसे डॉक्टर के पास जाएं जिन्हें पीजीएडी या इसके लक्षणों के बारे जानकारी ही न हो।

🔥​क्या सेक्स भी एक तरह का अडिक्शन है?
आपके साथ भी ऐसा होता होगा ना कि ऐल्कॉहॉल का सेवन करने के दौरान एक ड्रिंक के बाद ऐसा लगता है कि एक और पी लेते हैं, बस एक और….ये वाली तो लास्ट है।
जी हां ऐसा इसलिए होता है क्योंकि एक ड्रिंक लेते ही आपको उसका अडिक्शन हो जाता है। कुछ ऐसा ही बहुत से लोगों के साथ सेक्स में भी होता है।
अगर आप ठंडी नहीं हैं तो सफल सेक्स पाने के तुरंत बाद शरीर में जो केमिकल्स रिलीज होते हैं उनकी वजह से आपको सेकंड राउंड, थर्ड राउंड करने का मन करता है।
लेकिन यह तृप्ति का स्वाद पाने वाली औरत को होता है। वह और स्वाद, भरपुर आनंद चाहती है। यह सेक्सुअल डिसऑर्डर या रोग नहीं।

ये 4 वजहें भी जानें
◆हॉर्मोन्स का ओवरड्राइव
स्वस्थ सेक्स के दौरान सिर्फ फिजिकल नहीं बल्कि इमोशनल एक्सपीरियंस भी हाई रहता है। जब आपका शरीर कुछ ऐसा एक्सपीरियंस करता है जिसमें शरीर को संतुष्टि मिलती है तो वह ब्रेन को सिग्नल भेजता है कि इस तरह के एक्सपीरियंस को और बढ़ाया जाए, रिपीट किया जाए।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सेक्स के दौरान डोपामाइन और ऑक्सिटोसिन नाम के हॉर्मोन्स रिलीज होते हैं जिससे हमें खुशी मिलती है और अडिक्शन का अहसास होता है।
◆​सेक्स के बाद फीलगुड
अगर पार्टनर के साथ आपका सेक्शुअल ऐक्ट अच्छा रहा तो जाहिर सी बात है ऐक्ट के बाद आपको अच्छा महसूस होगा, आप खुद में अट्रैक्टिव फील करेंगी। फ्री और सेक्सी फील करेंगी। ये सारी फीलिंग्स मिलकर आपको एक फील गुड फैक्टर देगी। आप ये फिर- फिर चाहेंगी।
एक अच्छा सेक्शुअल एक्सपीरियंस आपके सौंदय, स्वास्थ्य और सेक्स पॉवर को बेहतर बनाता है।
◆​फर्स्ट राउंड में ऑर्गैज्म शून्यता
इस बात की भी संभावना रहती है कि नारी सेक्स के पहले राउंड के दौरान उत्तेजित तो हुई थी लेकिन उसे ऑर्गैज्म महसूस नहीं हुआ और इसलिए उसे और सेक्स करना है ताकि वो किसी भी तरह क्लाइमैक्स तक पहुंच सके।
◆​फर्स्ट राउंड का आफ्टर इफेक्ट स्ट्रॉन्ग
बहुत सी महिलाओं के साथ ऐसा होता है जहां उन्हें सेक्स करने के बाद डिप्रेसिंग फीलिंग आने लगती है क्योंकि उनका शरीर चाहता है कि उस फीलगुड एक्सपीरियंस को और महसूस किया जाए।
ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि सेक्शुअल ऐक्ट के बाद उसका आफ्टर इफेक्ट काफी स्ट्रॉन्ग रहता है।

जो सेक्स एडिक्ट हैं उनके इलाज की बात
रिसर्च ऑर्थर ऐनी लुइस ओकलैंडर के अनुसार~
डॉक्टरों को भी इस बीमारी के बारे में और जानकारी अर्जित करने की जरूरत है। फिजिशियन्स को भी पीजीएडी के बारे में जागरूक होने के जरूरत है।
डॉक्टर के पास जब कोई महिला पेल्विक पेन या युरोलॉजी की समस्या से जुड़े ऐसे लक्षण लेकर जाने की स्थिति में आये जो पर्सिस्टेंट सेक्शुअल अराउजल डिसऑर्डर की ओर इशारा कर रहें हों, तो वह व्हाट्सप्प 9997741245 पर हमसे संपर्क करके निःशुल्क निदान ले सकती है. आपके डॉक्टर को भी आप से इस बारे में पूरी जानकारी लेनी चाहिए ताकि सही इलाज दिया जा सके।
👀चेतना विकास मिशन :

Ramswaroop Mantri

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