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दंगों के लिए कोई और नहीं सिर्फ सरकार ही दोषी

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गोपाल राठी, पिपरिया

साम्प्रदायिक दंगे पहले भी होते थे और अब भी हो रहे हैं l फर्क इतना आया है कि पहले हम दंगा फसाद के लिए राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा करते थे l जिला एवं स्थानीय प्रशासन की लापरवाही को जिम्मेदार मानते थे l राज्य की सरकार को बर्खास्त करने की मांग करते थे l
अब स्थिति  यह है कि देश मे होने वाले हर दंगे के लिए मुसलमानों को जिम्मेदार बताया जा रहा है l राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन दंगों की जिम्मेदारी से मुक्त होकर राहत की सांस ले रहा है l
कानून व्यवस्था कायम रखना शासन प्रशासन की जिम्मेदारी है l हिन्दू या मुस्लिम पक्ष की नहीं l प्रमुख त्यौहारो के पूर्व  हर पुलिस थाना क्षेत्र में शांति समिति की मीटिंग होती है जिसमे क्षेत्र के प्रमुख अधिकारी    जनप्रतिनिधि  राजनैतिक सामाजिक धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी कार्यकर्ता ,पत्रकार व  गणमान्य नागरिक गण भाग लेते है l त्यौहार को शांतिपूर्ण मनाने और कानून व्यवस्था ,यातायात व्यवस्था सहित सभी मुद्दों पर खुली चर्चा होती है l मीटिंग में शामिल सामाजिक और धार्मिक संगठनों के लोग अपनी अपेक्षा रखते है अगर जुलूस शोभायात्रा निकाली जा रही है तो उसका समय रुट आदि सभी बिंदुओं पर चर्चा होती है l अगर किसी का कोई एतराज या सुझाव होता है तो वो भी मीटिंग में आता है l मीटिंग की अध्यक्षता SDM या तहसीलदार करते है और उसमें पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहते है l मीटिंग शुरू होने के पहले मीटिंग का एजेंडा बताया जाता है अगर इस एजेंडा में कोई और मुद्दा जोड़ना हो तो उसकी भी गुंजाइश रहती है l मीटिंग में हुई चर्चा सुझाव के उपरांत लिए गए निर्णय एक पंजी में दर्ज होते है l जिनका पालन करना पुलिस और प्रशासन का फर्ज होता है l अगर इन निर्णयों के क्रियान्वयन में कोई गड़बड़ी हुई है तो उसका जिम्मेदार कोई हिन्दू मुसलमान कैसे हो सकता है ?
किसी त्योहार को हर्ष – उल्लास के साथ मनाने और कानून व्यवस्था को कायम रखने के लिए इतनी अच्छी प्रशानिक परम्परा होने के बाद भी कही उपद्रव पथराव या दँगा होता है तो उंसे प्रशासनिक चूक  गलती या लापरवाही ही मानी जायेगी l अगर प्रशासन उपद्रवियों की तैयारी और इरादा नहीं समझ पाया या जानकर में अनजाना बना रहा तो यह प्रशासन की असफलता एक उदाहरण है l जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता l
मेरा स्पष्ट मानना है कि रामनवमी और उसके बाद हनुमान जयंती पर पूरे देश मे हुए उपद्रव के लिए हिन्दू – मुस्लिम नहीं शासन और प्रशासन जिम्मेदार है l क्योकि संविधान ने कानून व्यवस्था को बनाये रखने का जिम्मा किसी हिंदू या मुसलमान को नहीं दिया है l 
सरकार और प्रशासन चुस्त दुरुस्त हो तो परिंदा भी पर नही मार सकता l प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री की सुरक्षा के समय जो सुरक्षा बंदोबस्त किये जाते है उसमें ज़रा सी लापरवाही होने पर बड़े से बड़े अधिकारी पर तत्काल कार्यवाही होती  है l लेकिन अभी जो दंगे हो रहे है उसमें शासन प्रशासन की मिली भगत से स्थिति विस्फोटक बनती जा रही है l लगातार आ रहे भड़काऊ बयान और भाषण नफरत की आग को और भड़का रहे है l प्रशासन इन्हें रोकने में रोकने में अक्षम रहा है क्योंकि नफरती बयान बाजी करने वाले सत्ता से जुड़े है l
समझ मे ही नहीं आ रहा है कि यह कानून का राज है मनमर्जी का l उस समय तो अटल जी ने  सरकार के मुखिया को राजधर्म पालन की हिदायत दी थी लेकिन अब ऐसा कोई नहीं है l
गोपाल राठी, पिपरिया

Ramswaroop Mantri

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