सुप्रीम कोर्ट ने आज केरल सरकार की उस याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है, जिसमें राज्य ने केरल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया को स्थानीय निकाय चुनाव समाप्त होने तक स्थगित करने का अनुरोध किया है।
जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस भट्टी और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की तीन-न्यायाधीशीय पीठ ने मामले को 26 नवंबर को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल केरल सरकार की ओर से उपस्थित हुए।
राज्य सरकार की याचिका के साथ-साथ पीठ ने आईयूएमएल महासचिव पीके कुन्हालिकुट्टी, केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ और सीपीआई(एम ) सचिव एमवी गोविंदन मास्टर द्वारा दायर याचिकाओं पर भी नोटिस जारी किया।
इन याचिकाओं में क्रमशः सीनियर एडवोकेट रंजीत कुमार (सीपीआई-एम) और एडवोकेट हारिस बीरन (आईयूएमएल) ने प्रस्तुतियाँ दीं। राज्य सरकार की दलील केरल सरकार ने एसआईआर अधिसूचना को चुनौती नहीं दी है, बल्कि केवल यह मांग की है कि स्थानीय निकाय चुनाव संपन्न होने तक प्रक्रिया को टाल दिया जाए।
राज्य ने पहले यह मांग करते हुए केरल हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था, पर हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा कि एसआईआर से जुड़े सभी मामलों पर सुप्रीम कोर्ट पहले से विचार कर रहा है, इसलिए वहीं जाएँ।
चुनाव एवं एसआईआर की समय-सारणी में टकराव हो रहा है और जहां स्थानीय निकाय चुनाव 9 व 11 दिसंबर 2025 (दो चरणों में) होने वाले हैं और मतगणना — 13 दिसंबर 2025 को होने वाली है वहीं एसआईआर कार्यक्रम के अनुसार 4 दिसंबर 2025 तक बीएलओ को घर-घर सत्यापन पूरा करना होगा 9 दिसंबर 2025 को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित होगी।
राज्य सरकार का कहना है कि चुनावों के समानांतर एसआईआर प्रक्रिया चलने से प्रशासनिक जटिलताएँ और भारी व्यावहारिक कठिनाइयाँ उत्पन्न होती हैं।
अन्य राज्यों में एसआईआर मामले भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट बिहार, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में एसआईआर से संबंधित मामलों पर भी विचार कर रहा है। बिहार राज्य में हाल ही में चुनाव सम्पन्न हुए हैं। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है और इन राज्यों में दायर याचिकाओं पर चुनाव आयोग का जवाब मांगा गया है।






