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अब मालवा-निमाड़ से सिंधिया को झटका; कांग्रेस में जाएंगे समंदर पटेल

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इंदौर

इंदौर के राऊ क्षेत्र के लिंबोदी से 20 साल तक सरपंच रहे सिंधिया समर्थक नेता समंदर पटेल ने फिर से कांग्रेस ज्वाइन करने का ऐलान कर दिया है। वे 18 अगस्त को भोपाल जाकर कांग्रेस ज्वाइन करेंगे। पटेल का कहना है कि वह भाजपा कि रीति नीति और कार्यशैली से दु:खी होकर दाेबारा कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं। बता दें कि जब विधानसभा राऊ क्षेत्र का लिम्बोदी हिस्सा इंदौर ग्रामीण में आता था तब वह यहां से सरपंच थे। वह 1994 से 2015 तक लगातार 4 बार सरपंच चुने गए। 2018 के उनके प्रोफाइल के अनुसार उनके पास खेती व अन्य प्रॉपर्टी मिलाकर 90 करोड़ से ज्यादा की के आसामी है। उन्हें तुलसी सिलावट के बाद इंदौर में केंद्रीय मंत्री सिंधिया के सबसे खास समर्थक माना जाता है।

सूत्रों ने बताया पटेल का ससुराल नीमच जिले के जावद में है। वे वहां सक्रिय हैं और टिकट भी चाहते हैं जबकि बीजेपी इसके लिए तैयार नहीं थी। जावद से वर्तमान में लघु और मध्यम उद्योग मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा BJP से विधायक हैं। 2018 में समंदर पटेल ने कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ा और अपनी ताकत दिखाई थी। पार्टी के उस समय उन्हें लगभग 35 हजार वोट प्राप्त हुए थे और कांग्रेस हार गई थी। इसका फायदा सकलेचा को मिला था।

चुनाव प्रचार के दौरान समंदर पटेल। - फाइल फोटो

चुनाव प्रचार के दौरान समंदर पटेल। – फाइल फोटो

जावद विधायक पर लगाया दुर्व्यवहार का आरोप

पटेल ने आरोप लगाया है कि भाजपा में रहकर वे कार्यकर्ताओं की मदद नहीं कर पा रहे थे। पटेल ने कहा कि जावद विधानसभा की जनता विधायक ओमप्रकाश सखलेचा (एमएसएमई मंत्री ) और उनके समर्थकों की वजह से परेशान है। पटेल ने कहा कि पिछले साढ़े तीन साल से मंत्री सखलेचा मेरे कार्यकर्ताओं के साथ द्वारा दुर्व्यवहार कर रहे हैं। मेरा लगातार अपमान कर रहे हैं। यहां तक की मेरे समर्थकों पर उनके द्वारा झूठे मुकदमे दर्ज कराए जा रहे हैं। मैं यह सहन नहीं कर सकता। कार्यकर्ताओं के हितों व मान-सम्मान के लिए में भाजपा छोड़ रहा हूं। वहीं दैनिक भास्कर ने जब ओमप्रकाश सखलेचा से बात की तो उन्होंने नो कमेंट कहते हुए पूरे मामले को लेकर कुछ भी कहने से मना कर दिया।

पुष्यमित्र भार्गव के महापौर बनने पर उनका स्वागत करते समंदर पटेल। वे तब बीजेपी में थे। - फाइल फोटो

पुष्यमित्र भार्गव के महापौर बनने पर उनका स्वागत करते समंदर पटेल। वे तब बीजेपी में थे। – फाइल फोटो

शपथ पत्र के अनुसार 90 करोड़ के आसामी हैं समंदर

समंदर पटेल ने 2018 में जावद सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था। तब उन्होंने स्वयं के पास 90 करोड़ रुपए की संपत्ति होने के बारे में जानकारी दी थी। इसमें इंदौर के बरखेड़ा सोमा, लिंबोदी और आगरा गांव में जमीन होना बताया था। उनके समर्थकों को कहना है कि अब उनकी संपत्ति 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की है। पटेल की आय का स्त्रोत खेती और किराया है।

कांग्रेस जॉइन करने की घोषणा के बाद सीएम ने भी पटेल को फोन कर अपना फैसला वापस लेने और नीमच सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की पेशकश की। एक कार्यक्रम में सीएम के साथ पौधे रोपते हुए - फाइल फोटो

कांग्रेस जॉइन करने की घोषणा के बाद सीएम ने भी पटेल को फोन कर अपना फैसला वापस लेने और नीमच सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की पेशकश की। एक कार्यक्रम में सीएम के साथ पौधे रोपते हुए – फाइल फोटो

सीएम, सिंधिया ने की मनाने की कोशिश, समंदर बोले – अब बहुत देर हो गई

समंदर पटेल के कांग्रेस में जाने की अटकल पिछले एक माह से लगाई जा रही थी लेकिन शुक्रवार सुबह पटेल ने अचानक यह ऐलान कर दिया कि 18 अगस्त को कांग्रेस जॉइन कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस ऐलान के बाद सीएम शिवराज और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे ने फोन पर पटेल को मनाने की भरपूर कोशिश की लेकिन उन्होंने मना कर दिया। बताया जा रहा है कि सीएम और सिंधिया की तरफ से समंदर पटेल को नीमच विधानसभा से टिकट भी ऑफर किया गया लेकिन यह कहते हुए मना कर दिया कि मैं अब फैसला ले चुका हूं और वैसे भी जावद मेरी पहली प्राथमिकता है।

3 चुनाव से सखलेचा को बगावत का मिल रहा था फायदा

2008, 2013 और 2018 के चुनाव में भाजपा के ओमप्रकाश सखलेचा को कांग्रेस की बगावत और गुटबाजी का फायदा मिलता रहा है। साल 2008 में कांग्रेस से राजकुमार अहीर चुनाव लड़ने आए तो स्थानीय राजनीति में बाहरी का ठप्पा लगाकर विरोध हो गया। करीब 5 हजार मतों से अहीर हारे। 2013 में जावद से दोबारा बाहरी उम्मीदवार के तौर पर नीमच के पूर्व नपाध्यक्ष रघुराजसिंह चौरड़िया को टिकट मिला तो राजकुमार अहीर बागी हो गए थे। ऐसे में सखलेचा की जीत की राह आसान हुई। तब चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अहीर 43 हजार मत लाए थे।

इसी तरह 2018 में कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी राजकुमार अहीर बने तो पार्टी के फैसले के विरोध में समंदर पटेल बागी हो गए। 2018 में ओमप्रकाश सखलेचा को समंदर के बागी होने का फायदा मिला और वह लगभग 4 हजार मतों से चुनाव जीतने में सफर रहे।

2018 में समंदर पटेल कांग्रेस से बगावत कर जावद से निर्दलीय चुनाव लड़े थे। इसके बाद जब सिंधिया 2020 में भाजपा में गए तो वे भी उनके साथ बीजेपी में शामिल हो गए। अब फिर से इन्होंने कांग्रेस ज्वाइन करने का ऐलान कर दिया है। वे जावद सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। - फाइल फोटो

2018 में समंदर पटेल कांग्रेस से बगावत कर जावद से निर्दलीय चुनाव लड़े थे। इसके बाद जब सिंधिया 2020 में भाजपा में गए तो वे भी उनके साथ बीजेपी में शामिल हो गए। अब फिर से इन्होंने कांग्रेस ज्वाइन करने का ऐलान कर दिया है। वे जावद सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। – फाइल फोटो

इस सीट पर कांग्रेस देती रही है चौंकाने वाले नतीजे

विधानसभा में अब तक का रिकॉर्ड है कि सीट पर ज्यादातर समय जनसंघ का दबदबा रहा। हालांकि बीच-बीच में कांग्रेस ने चौंकाने वाले नतीजे देकर जीत हासिल की है। 1957 में पहले चुनाव में जनसंघ के वीरेंद्र कुमार सखलेचा जीते। उन्होंने 1962 और 1967 में भी इस सीट से जीत हासिल की। 1972 में कांग्रेस के कन्हैयालाल नागौरी ने सखलेचा से यह सीट छीन ली। लेकिन 1977 में वीरेंद्र कुमार सखलेचा जनता पार्टी के टिकट पर फिर जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। 1980 में भाजपा के टिकट पर सखलेचा ने पांचवी बार जीत दर्ज की। 1985 में कांग्रेस के चुन्नीलाल धाकड़, 1990 में भाजपा के दुलीचंद, 1993 व 1998 में कांग्रेस के घनश्याम पाटीदार और 2003, 2008, 2013 और 2018 में भाजपा के ओमप्रकाश सखलेचा जावद सीट से निर्वाचित हुए।

Ramswaroop Mantri

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