अग्नि आलोक
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*अब भाजपा को अगले किसी चुनाव कोई नहीं हरा सकता!*

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विजय दलाल

*महाराष्ट्र के बाद दिल्ली में वोटर लिस्ट में विपक्षी पार्टियों के वोटरों के नाम हटाना और बीजेपी के फर्जी वोटरों के लाखों में नाम जोड़ने के खेल ने ये साबित कर दिया है कि दक्षिण के राज्यों को छोड़कर किसी भी राज्य में अब बीजेपी को हराना लगभग असम्भव है।*

*वोटर लिस्ट और ईवीएम के माध्यम से वोट ट्रांसफर दोनों ही का जिस प्रकार से दुरुपयोग किया जा रहा है बीजेपी का असली वोट प्रतिशत लगभग 30 से 32% के आसपास होगा।*

*इस बार तो इन सारी हेराफेरी के सारे प्रमाण मौजूद है।*

*इस बार चुनाव होने के बाद जनता के सामने वोट गिरने की कुल संख्या या वोट प्रतिशत भी इसलिए ही अब तक की परंपरानुसार घोषित नहीं किया गया।*

*अब जय जय मोदी घर घर मोदी के साथ हर हर चुनाव आयोग/ प्रशासन/न्यायपालिका और हर हर ईवीएम!*

*पहले हरियाणा और फिर महाराष्ट्र में चुनाव जीतने के लिए बीजेपी ने जो तरकीबें आजमाई उसमें और उनसे सबक लेकर और सुधार के साथ दिल्ली ही नहीं जीती है उसकी लोकतंत्र और संविधान के आहूति अभियान में आगे भविष्य में उसे आसानी से कोई नहीं हटा सकता इसकी ग्यारंटी भी ले ली है।*

*एक राहुल गांधी ने इंडिया गठबंधन के महाराष्ट्र के पार्टनरों के साथ पत्रकार परिषद कर वोटर लिस्ट के माध्यम से प्रशासनिक दुरुपयोग की  एक बहुत बड़ी हेराफेरी और साज़िश को पकड़ा है लेकिन विपक्ष के सत्ता पक्ष की फासिस्ट साजिशों के खिलाफ अधूरे मन से लड़ने और दलीय राजनीति से प्रेरित सिद्धांत विहीन राजनीति के शिकार विपक्षी दल इसे  पकड़ने के बाद भी देश का आज के हालात में निम्न प्रमुख कारणों से उसके दुरुपयोग का अभी कुछ निकाल पाएंगे आसान प्रतीत नहीं होता।*

*सबसे पहले तो चुनाव आयोग की हेराफेरी पर न्यायपालिका का पूर्णतः असहयोग।*

*यूट्यूब के कुछ चैनलों को छोड़कर सम्पूर्ण मीडिया बीजेपी के रंग में रंग दिया गया है।*

*इसलिए हरियाणा और महाराष्ट्र में जो गलती हो गई थी कि जमीन पर बीजेपी के विरुद्ध जबरदस्त माहौल दिखाई दिया था मगर परिणाम के रूप मे और वोटों के रूप में बीजेपी की एकतरफा जीत ने स्वतंत्र और निडर पत्रकार और पैनी नजर रखने वाले विपक्षी नेताओं को वोटर लिस्ट का खेल समझ में आ गया था इसलिए दिल्ली में पहले ही से आप और केजरीवाल के विरुद्ध और बीजेपी के पक्ष में माहौल ये परिणाम पाने के लिए मीडिया द्वारा बना चुका था।*

*42% वोट के साथ आप के विरुद्ध हार का कारण कांग्रेस है यह भी बाकी सब ध्यान हटाने के लिए प्रचारित करने की सोची समझी साजिश का हिस्सा है।*

*यह प्रमाणों के साथ यह बात कही जा रही थी मुस्लिम समाज के साथ किसी भी आंदोलन में या दिल्ली दंगों के दौरान आप पार्टी ने साथ नहीं दिया इसलिए अब की बार मुसलमानों के वोट आप पार्टी को नहीं मिलने हैं संभावनाएं पुरी थी कि वो वोट बीजेपी को तो नहीं जाना है कांग्रेस या अन्य भाजपा विरोधी पार्टी को ही जाना है। यक्ष प्रश्न यह है आप पार्टी के कम उम्मीदवार जीते उनमें दो मुस्लिम समुदाय से हैं यह।*

*मेरा प्रश्न यह है कि बिहार में तो मुस्लिम वोट ट्रांसफर कर औवेसी की पार्टी को जितवाया था लेकिन यहां कांग्रेस का वोट ईवीएम के माध्यम से छीन लिया गया नहीं दिखता?*

*अगर आप दिल्ली चुनाव के कितने ही पहलुओं पर विचार करेंगे तौ पाएंगे चुनाव के माध्यम से देश की जनता को ठगा जा रहा है। बीजेपी चुनाव जीतने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है जब तक यह धारणा विपक्ष सड़कों पर। जनता तक नहीं पहुंचाता तब तक आप बाकी जायज मांगों कितना भी एकजुट होकर संघर्ष कर लीजिए।*

*आप समाजवाद और धर्म निरपेक्षता तो बहुत दूर की कोड़ी हो गई आप लोकतंत्र और संविधान ही नहीं बचा सकते!*

Ramswaroop Mantri

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