भोपाल. 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की एकजुटता से पार्टी के 15 साल का वनवास खत्म हुआ था. लेकिन सत्ता से जाने के बाद ही पार्टी नेताओं के बीच तनातनी से उनके मतभेद खुलकर सामने आ गए थे. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ को लेकर कांग्रेस नेता अरुण यादव और अजय सिंह ने तल्ख तेवर दिखाना शुरू कर दिया था. पार्टी नेताओं के बीच एक-दूसरे को लेकर बयानबाजी का दौर भी शुरू हो गया था, लेकिन अब 4 सीटों के उपचुनाव से पहले कांग्रेस में एक बार फिर ऑल इज वेल बताने की कोशिश हो रही है.

एमपी कांग्रेस में कमलनाथ के फैसलों को लेकर पार्टी नेताओं के बीच उभरे मतभेद अब खत्म होते नजर आ रहे हैं. दरअसल पार्टी से नाराज चलने वाले कांग्रेस नेता अजय सिंह ने अब पार्टी और कमलनाथ के फैसलों के साथ खड़े रहने की बात कही है. पहले विंध्य को लेकर दोनों नेताओं के बीच का मतभेद सामने आया. फिर बीते दिनों उपचुनाव को लेकर बुलाई गई बैठक में अरुण यादव और अजय सिंह की गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी. लेकिन अब अजय सिंह ने सफाई देते हुए कहा है कि देर से बैठक की जानकारी मिलने के कारण वह नहीं पहुंच सके. लेकिन कांग्रेस में अब उनकी जो जिम्मेदारी तय होगी उसे वह निभाने का काम करेंगे. वह पार्टी के सिपाही के तौर पर काम करते रहेंगे.
वही कमलनाथ और अरुण यादव के बीच का मतभेद भी अब खत्म होता नजर आ रहा है. अरुण यादव ने खंडवा सीट पर अपनी दावेदारी को लेकर बीते दिनों दिल्ली में कमलनाथ के निवास पर उनसे मुलाकात की है. बताया जा रहा है कि इस दौरान अरुण यादव का रुख बेहद नरम रहा है. कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा का कहना है कि कांग्रेस पार्टी पूरी तरीके से एकजुट है और कहीं गुटबाजी की कोई गुंजाइश नहीं है.
वहीं कांग्रेस नेताओं के बीच मतभेद खत्म होने के कांग्रेस नेताओं के दावों पर बीजेपी ने निशाना साधा है. बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस गुटों में बटी हुई पार्टी है और कांग्रेसी नेता एक-दूसरे को निपटाने में लगे हुए हैं. फौरी तौर पर एकजुटता दिखाने की कोशिश हो रही है. लेकिन हकीकत यह है कि कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष को लेकर नेताओं के बीच एक-दूसरे को निपटाने की कोशिश हो रही है.
बहरहाल पहले ग्वालियर में हिंदू सभा के नेता को कांग्रेस में शामिल करने को लेकर अरुण यादव और रीवा में चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी को प्रभारी बनाने पर अजय सिंह कमलनाथ के फैसलों पर नाराज थे. लेकिन बीते दिनों प्रदेश प्रभारी मुकुल वासनिक से मुलाकात के बाद अब दोनों नेताओं के तेवर नरम हो गए हैं. देखना अब यह कि उपचुनाव से पहले बनी कांग्रेस नेताओं की एकजुटता कितने दिनों तक एक रह पाती है.




