इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर तेजाजी नगर से बलवाड़ा तक के 33 किलोमीटर लंबे खंड का निर्माण कार्य अब अपने अंतिम चरण में है. इसके पूरा होते ही पहाड़ों को चीरकर बनाई गई आधुनिक टनल और ऊंचे वायडक्ट्स के कारण अब यात्रियों को सिमरोल और भेरूघाट के उन खतरनाक घुमावदार रास्तों से मुक्ति मिल जाएगी.इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर 33 किमी लंबे खंड का निर्माण अंतिम चरण में है. इससे सिमरोल और भेरूघाट के खतरनाक रास्तों से मुक्ति मिलेगी. 1000 करोड़ के प्रोजेक्ट से इंदौर-हैदराबाद दूरी 125 किमी कम होगी. जानें और खासियत..
इंदौर का गणेश घाट सबसे खतरनाक हाइवे में से एक है. पहाड़ी रास्ता होने के बावजूद यहां हैवी ट्रैफिक का दबाव रहता है. फिर भी सालों से यही एक मार्ग है, जो खंडवा, हैदराबाद को इंदौर से जोड़ता है. लेकिन, अब वाहन चालकों को सीधा-सपाट रास्ता और चौड़ी सड़क मिलने जा रही है. इससे दुर्घटनाओं में कमी आएगी.
1000 करोड़ का प्रोजेक्ट
इंदौर खंडवा राष्ट्रीय राजमार्ग NH 347 के तेजाजी नगर से बलवाड़ा तक 33 किलोमीटर सड़क बनाने के लिए 1000 करोड़ का बजट रखा गया था. हैदराबाद तक बन रहे इस कॉरिडोर में मध्य प्रदेश के चार पैकेज में बलवाड़ा तक का यह हिस्सा सबसे चुनौतीपूर्ण था. इसमें कई ओवरब्रिज और टनल बनाई गई हैं. जिनमें 575 मीटर की भेरूघाट टनल, 480 मीटर की बाईग्राम टनल तथा चौरल घाट टनल है, जिसकी लम्बाई 550 मीटर है. ये टनल अब बनकर तैयार है..
अब 40 मिनट लगेंगे
इस मार्ग के बन जाने से इंदौर से बलवाड़ा की दूरी तय करने में केवल 40 मिनट लगेंगे. पहले यही दूरी तय करने के लिए घाट और भारी ट्रैफिक के कारण 1.5 से 2 घंटे लगते थे. सिमरोल और भेरूघाट के अंधे मोड़ों पर होने वाली दुर्घटनाओं में भी भारी कमी आएगी, जबकि टनल के माध्यम से वाहन सीधे और सुरक्षित निकल सकेंगे.
इंदौर से हैदराबाद की दूरी 125 km कम होगी!
इंदौर से ओंकारेश्वर-बुरहानपुर-जलगांव होते हुए यह रास्ता सीधे गोरेगांव और शाहपुर होते हुए मुंबई को कनेक्ट करेगा. इन हिस्सों में भी काम लगभग पूरा हो चुका है, जो बचा है, वह जून तक पूरा हो जाएगा. इसके पूरा बन जाने से इंदौर से हैदराबाद की दूरी करीब 125 किलोमीटर कम हो जाएगी. साथ ही लगने वाला 22 घंटे का सफर 18 घंटे में पूरा हो सकेगा.






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