-सुसंस्कृति परिहार
पन्ना जिले के मोहरा टपरिया गांव से एक दम्पति महेंद्र लोधी अपनी 9 महीने की गर्भवती पत्नी को इलाज के लिए रनेह उप स्वास्थ्य केंद्र लेकर कुछ माह पूर्व पहुंचे थे। चूंकि यह स्वास्थ्य केंद्र पन्ना मुख्यालय से बहुत दूर है। महेन्द्र परिवार के परिजनो का आरोप है कि वहां मौजूद नर्स नीलिमा यादव जो अपने बच्चे के साथ बैठी हुई थी, ने महेंद्र की पत्नी को देखने से इंकार कर दिया था,जबकि महेन्द्र सिर्फ यह जानने गया था कि डिलीवरी कब तक होगी? इसका जवाब ना देने पर उसने पुनः पूछा तो कहा गया कल देखेंगे।जब वह बार बार देखने की गुहार करने लगा।तो आव देखा ना ताव उसने संपूर्ण लोधियों को नहीं बक्शा और गाली गलौज शुरू कर दिया।जब महेन्द्र ने इसकी शिकायत करने को कहा तो वह आगबबूला हो गई और एक युवक को आवाज़ देकर मार कर भगाने को कहा, तो महेन्द्र ने वहां से जाना ही उचित समझा।वह बस में थका-हारा बैठ गया।अभी बस बमुश्किल एक किलोमीटर दूर ही पहुंची होगी कि यकायक बस रुक गई।देखा वहीं नर्स दो युवकों के साथ अंदर आई और ताबड़तोड़ गंदी गालियां देकर अपने साथ लाए युवकों के साथ चप्पल से मारपीट करती रहीं।यह संयोग ही था कि किसी ने इस मारपीट और गाली-गलौज का वीडियो बना लिया। इधर बस रुकी रही पुलिस भी आ गई। इसे नीलिमा ने ही बुलाया था। पुलिस ने उसे रात भर थाने में रखा, जी भर कर बिना कुछ सुने लगभग रात भर मारपीट की। इस बीच ज़रा सोचिए आसन्नप्रसवा की क्या हालत हुई होगी समझा जा सकता है। दूसरे दिन उसकी जमानत हुई। लोधी समाज ने इस घटना को हाथों हाथ लिया तथा एक ज्ञापन लगभग 5000 की संख्या में इकट्ठे होकर लोगों ने प्रशासन को दिया था। इसके बाद भी प्रशासन ने किसी प्रकार की कोई कार्रवाई करना सही नहीं समझा।यह ज्ञापन
15/6/2025 को दिया गया था, एडिशनल एसपी ने पूरी कार्यवाही करने का लिए आश्वासन दिया था इन पेपर में वह सारी चीज़ लिखी हुई थीं। था जिसेCollector Office Damoh CM Madhya Pradesh PMO India को दिया गया था जिसमें नर्स के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की गई थी। विचारणीय बिंदु यह है इस गरीब परिवार के महेंद्र पर तीन चार दिन बाद मोहतरमा ने छेड़छाड़ का आरोप भी जड़ दिया।पहली रिपोर्ट में ये बात नहीं थी।
इसके बाद मामला बढ़ा, वीडियो वायरल हुआ और उल्टा महेंद्र पर ही केस दर्ज हो गया।कोर्ट-कचहरी के चक्कर, बार-बार पेशियां और बढ़ता खर्च… एक गरीब परिवार के लिए ये सब भारी पड़ने लगा।आर्थिक तंगी, मानसिक तनाव और टूटता आत्मसम्मान जीवन पर भारी पड़ने लगा।
परिजनों का कहना है कि इन्हीं परेशानियों ने महेंद्र को अंदर से तोड़ दिया और उसने आत्मघाती कदम उठा लिया।
आज हालात ये हैं कि मां-बाप, पत्नी और पूरा परिवार रोते हुए सिर्फ एक मांग कर रहा है —दोषियों पर कार्रवाई हो और महेंद्र को न्याय मिले।
यही बात लोधी समाज के युवा कर रहे हैं। उन्होंने पुलिस और जिला प्रशासन को युवा साथी महेंद्र की मौत का जिम्मेदार बताया है।
आश्चर्यजनक बात तो यह कि नर्स की दबंगई का बस वाला वीडियो सामने आ जाने के बावजूद कई बातों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए थी।मसलन किसके कहने पर नीलिमा ने बस रुकवाई और जी भर मारपीट करवाई , पुलिस भी बुलाई और निर्दोष को थाने में रखवाया और कार्रवाई उल्टे पीड़ित पर करवाई।इस बीच उसने जो प्रताड़ना झेली जिसके वशीभूत हो वह अपने नन्हे बच्चे और पत्नी को छोड़कर दुनिया से कूच कर गया। सरकारी कर्मचारी की रक्षा ऐसे नहीं की जाती है साहिब, दबंगई किसी को भी शोभा नहीं देती। नीलिमा पर कार्रवाई के साथ उसके साथ जुड़े निर्मम पुलिस अधिकारी और अन्य पर भी ऐक्शन लिया जाना चाहिए। महेन्द्र जैसे लोग इस उत्पीड़न के शिकार ना होने पाएं इसके लिए दमोह के बहुसंख्यक नागरिक लोधी समाज के साथ खड़े हैं।जिला प्रशासन को इस मामले में निष्पक्ष जांच करवानी चाहिए।





