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दो लाख बच्चों का राशन हजम कर गए अफसर , खुलासा

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  • जिन 4 जिलों की रिपोर्र्ट एनसीपीसीआर को भेजी गई है उसके आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं

    भोपाल।
     मध्यप्रदेश देश का ऐसा राज्य बन चुका है, जहां पर आए दिन घपले -घोटाले सामने आते रहते हैं। अफसरान व दलालों का हाल यह है कि वे बच्चों के निवाला तक में पैसा हजम करने से नहीं चूकते हैं। इसी तरह के एक मामले का खुलासा हाल ही में हुआ है।
    जिसमें कोरोना काल में महिला बाल विकास के अफसरों ने करीब दो लाख बच्चों के नाम पर दिया जाने वाला राशन ही पूरा का पूरा हजम कर लिया है। खास बात यह है कि इस तरह के मामलों में सरकार भी कोई ठोस कदम नहीं उठाती है, जिसकी वजह से भ्रष्टाचार के मामलों में लगाम नहीं लग पा रही है। अब इस मामले की जांच के लिए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने ईओडब्ल्यू को पत्र लिखकर जांच की अनुशंसा की है। दरअसल महिला बाल विकास विभाग द्वारा आयोग को दिए गए आंकड़ों में बताया गया है कि प्रदेश में आंगनबाडिय़ों से राशन लेने वाली शाला त्यागी बच्चियों की संख्या 2 लाख 17 हजार है, इसकी पुष्टि करने के लिए जब आयोग ने स्कूल शिक्षा विभाग से जानकारी मांगी तो उनकी संख्या महज 23 हजार 490 बताई गई। इनमें 2019 की शाला त्यागी बच्चियों की संख्या 8614 बताई गई है। दोनों विभागों के आंकड़ों में इतना बड़ा अंतर देख आयोग भी दंग रह गया है।
    इस तरह के बताए गए आंकड़े: महिला बाल विकास विभाग द्वारा एनसीपीसीआर को अपनी जिलेवार रिपोर्ट में बताया गया है कि शाला त्यागी के रुप में प्रदेश में 11 से 14 साल की 2 लाख 17 हजार 211 स्कूल से बाहर लड़कियां हैं। इनमें से एक लाख 71 हजार 365 को आंगनबाड़ी की सेवाएं दी जा रही हैं। इसमें मुफ्त राशन भी शामिल है इसके बाद मामले की शिक्षा विभाग के समक्ष उठाने के बाद उनकी ओर से कमीशन की जानकारी दी गई कि राज्य में 23491 लड़कियां स्कूल से बाहर मौजूद है जिनमें से 8680 किशोरावस्था की हो चुकी हैं। आंकड़ों में अंतर मिलने के बाद राज्य के अकाउंटेंट जनरल को जांच के निर्देश दिए गए। उन्होंने शुरूआती जांच में अब तक 4 जिलों की रिपोर्र्ट एनसीपीसीआर को भेजी है जिसके आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं।
    हर जिले में कराई जाएगी जांच
    आंकड़ोंं में इतना बड़ा अंतर आने के बाद अब यह साफ हो गया कि राज्य में बच्चों और उनके अधिकारों के नाम पर जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के सभी जिलों में आंकड़ों का सत्यापन आयोग द्वारा कराया जा रहा है। अभी आयोग को राज्य के बैतूल ग्वालियर डिंडोरी और सिंगरौली जैसे चार जिलों का डाटा मिला है अब उसने राज्य के सभी जिलों का डाटा तलब किया है।
    10 दिन में मांगी रिपोर्ट
    आंकड़ों में इतनी बड़ी गड़बड़ी सामने आने के बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई किए जाने के निर्देष देकर दस दिनों में रिपोर्ट देने को कहा गया है। फिलहाल इस मामले में अब तक स्थानीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई होती नहीं दिख रही है।

Ramswaroop Mantri

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