उज्जैन
महालोक में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा। सप्तऋषियों की मूर्तियां और अफसरों की नींद जिस आंधी में उड़ीं, उसके और भी प्रभाव सामने आने लगे हैं। यहां लगी बाकी मूर्तियां भी बहुत मजबूत व सुरक्षित नहीं दिख रहीं। कई में दरारें पड़ने लगी हैं। कुछ का रंग भी उड़ने लगा है। जाहिर है महाकाल लोक में लगाई गई मूर्तियों की मजबूती इस छोटी सी आंधी में जवाब देने लगी है। हालांकि सरकारी जवाब अब भी यही है कि सभी मुर्तियों में सुधार कर लिया जाएगा।
भास्कर रिपेार्टर और फोटो जर्नलिस्ट ने महाकाल लोक जाकर एक-एक मूर्ति को पास से देखा। कुल 11 मूर्तियों के अलग-अलग हिस्से में दरार हैं। बाकी करीब 11 मूर्तियों के किसी हिस्से का रंग उड़ने लगा है तो किसी में कोई और परेशानी।
भगवान शिव की एक प्रतिमा के तो सीने पर ही दरार आ गई। गजासुर संहार दर्शाने वाली मूर्ति का बेस कमजोर दिखा। , सप्तऋषि की मूर्ति गिरने के प्रमुख कारणों में से एक यही था। यानी जरा सी हवा फिर से चली तो फिर कुछ हादसा सामने आ सकता है।

शिव बारात– कई बारातियों की मूर्तियों में दरारें आ चुकी है।
त्रिपुरासुर वध- महाकाल लोक में सबसे बड़ी प्रतिमा है। इसके रथ के पहिये में दरार है तो भगवान शिव के रथ के छत्र में भी दरार आ चुकी है। रथ के अन्य हिस्से भी कमजोर हो चुके हैं।
बाकी मूर्तियों की दशा भी कोई ठीक नहीं
कार्तिकेय– भगवान कार्तिकेय की भाला पकड़े मूर्ति के हाथ का रंग खराब हो गया है। इसमें भी दरार आ गई है।
कमलासना महालक्ष्मी- सबसे ऊंची तीन मूर्तियां पास-पास हैं। भगवती शक्तिस्वरूपा कमलासना महालक्ष्मी के कमल की पत्तियां जगह छोड़ चुकी है वहीं भगवान शिव की प्रतिमा का हाथ की दरार देखकर लगा कि कहीं गिर न जाए।
गजासुरसंहार– बेहद सुंदर आकृति में से एक बटुकभैरव ने बेस ही छोड़ दिया है। इसमें हवा-पानी अंदर जा सकता है।
शिव प्रतिमा– हाथ उठाए शिव की मूर्ति के पैर और पास ही शेर की प्रतिमा में भी दरार आ चुकी है। शेर की प्रतिमा ने भी बेस छोड़ दिया है। यहां भगवान पहाड़ पर खड़े हैं, पहाड़ का भी रंग कई जगह से निकल चुका है।
मणिभद्र- नीचे लेटी हुई प्रतिमा के पैर में भी दरार दिखी।
घोड़े के घुटने का रंग उतरा- घोड़े पर आकर्षित प्रतिमा दर्शकों का ध्यान खींचती है लेकिन इसके हवा में उठे पैर के घुटनों से रंग की पपड़ी उखड़ गई है।
पशुपतिनाथ- भगवान पशुपति नाथ की मूर्तियों के पास नंदी की मूर्ति भी रखी हुई है। इसका रंग भी उखड़ गया है।
शिव बारात– शिव बारात में कुछ बारातियों में दरारें आ चुकी है। शिव जिस नंदी पर विराजमान है, उसमें दरार हैं वहीं एक बाराती के कमर, वस्त्रों में भी दरारे हैं। नंदी के नीचे वाले हिस्से में पानी से रंग भी खराब हो चुका है।
शिव लीला- शिव लीला की प्रतिमा में भगवान शिव की प्रतिमा पर तो सीने में ही दरार पड़ चुकी है। वहीं जिस बेस पर मूर्ति को बैठाया गया है उसमें भी बड़ा गड्ढा हो रहा है, जिसमें पानी भरा है।
कमलकुंड में शिव- कमलकुंड में भगवान शिव का स्ट्रक्चर सबसे बड़ा है। यहां शाम को फव्वारे चलते हैं, जिससे श्रद्धालुओं के कर्षण का केंद्र यही होता है। लेकिन पानी के बीच लगी मूर्ति का रंग भी उड़ने लगा है। फिलहाल इसपर रंगरोगन शुरू कर दिया है।

गजासुरसंहार– 10 मूर्तियों की आकृति में से एक बटुकभैरव की मूर्ति ने तो बेस ही छोड़ दिया।
मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश- सप्त ऋषियों की नई मूर्तियां लगेंगी
महाकाल लोक में सप्त ऋषियों की मूर्तियां टूटने के बाद गरमाई राजनीति में मुख्यमंत्री का भी बड़ा निर्णय सामने आया है। सप्त ऋषियों की टूटी मूर्तियों को सुधारने की कवायद चल रही थी कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने निर्देश दिया कि खंडित मूर्तियां महाकाल लोक में नहीं लगाई जाएंगी। उनकी जगह नई मूर्तियां लगेंगी। कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने बताया कि सभी 6 मूर्तियों को नया इंस्टॉल किया जाएगा। इसका खर्च भी कंपनी ही वहन करेगी।
जिम्मेदार बोले – मूर्तियों की जांच करा रहे
“सप्त ऋषियों की मूर्तियों को जल्द बदला जाएगा। अन्य जिन मूर्तियां क्रेक आ गया है। उनका भी स्टैंडर्ड टेस्ट करवाया जा रहा है। उन्हें भी सही कर लेंगे।”
-आशीष पाठक, सीएमओ स्मार्ट सिटी





