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‘ओम प्रकाश ‘ एक प्रतिभाशाली और नेचुरल अभिनेता

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💝 बॉम्बे के एक मामूली रेस्तरां में एक आदमी ने भरपेट भोजन किया और जब वेटर ने बिल पेश किया तो वह सीधे मैनेजर के पास गया और इमानदारी से स्वीकार किया कि उसके पास पैसे नहीं थे। उसने कहा कि उसने पिछले दो दिनों से नहीं खाया था और बहुत भूख लगी थी इसलिए ऐसा करने के लिए मजबूर हो गया था।

मैनेजर ने उसकी कहानी को धैर्य से सुना।आदमी ने वादा किया था कि जिस दिन उसे एक काम मिलेगा,वह बिल का निपटारा कर देगा। मैनेजर मुस्कुराया और उससे कहा “ठीक है”। और वो आदमी चला गया।वेटर ने मैनेजर से सवाल किया “साब आपने उसे जाने क्यों दिया?” मैनेजर ने जवाब दिया, “जाओ और अपना काम करो।”

कुछ महीनों बाद वही आदमी रेस्तरां में आया और अपने लंबित बिल को  निपटा दिया। आदमी ने प्रबंधक को धन्यवाद दिया और उसे बताया कि उसे अभिनय का प्रस्ताव मिला है।  प्रबंधक ने खुशी से उसे एक कप चाय की पेशकश की और दोनों के बीच एक दोस्ती का फूल पनप उठा ।अभिनेता जल्द ही एक जाना माना चेहरा बन गया और एक समय में कई फिल्में की।

बाद में उनके पास एक बंगला और एक शौफर-चालित कार थी। टाइम बदल गया था, लेकिन हर बार जब वह उस क्षेत्र से गुजरते,तो मैनेजर के साथ एक कप चाय के लिए रेस्तरां  में ज़रूर रुकते, जिसने वर्षों पहले उनके प्रति अविश्वसनीय सहानुभूति दिखाई थी।

कई बार विश्वास ‘चमत्कार’ करता है।  अगर मैनेजर उस दिन भूखे आदमी को पीटता और अपमानित करता, तो शायद उद्योग को’ओम प्रकाश ‘नाम का एक प्रतिभाशाली और नेचुरल अभिनेता नहीं मिलता।

हम ओमप्रकाश जी को याद करते हुए नमन करते हैं।

‘दद्दू’ बनकरअभिनेता ओमप्रकाश ने बॉलीवुड पर किया राज

 

om prakash actor

बालीवुड को 30 साल तक अपने अभिनय से गुदगुदाने वाले अभिनेता ओमप्रकाश, दीवान मंदिर जम्मू के स्टेज पर ‘कमला’ का किरदार अदा करते थे। 19 दिसंबर, 1919 को जम्मू में जन्मे ओमप्रकाश ने 12 साल की उम्र में क्लासिकल संगीत सीखना शुरू कर दिया था। उन्हें सगीत के अलावा थियेटर व फिल्मों में दिलचस्पी थी। दीवान मंदिर स्टेज, जम्मू से जुड़े युद्ववीर सेठी पुराने लोगों से सुने ओमप्रकाश के किस्सों को आज भी शिद्दत से बयां करते हैं। पूरे लाहौर और पंजाब में ‘फतेहदीन’ के रूप में उनके कार्यक्रम बहुत लोकप्रिय हुए। आज उनका जन्मदिन है।

om prakash actor

ओमप्रकाश का फिल्मी करियर 1942 में शुरू हुआ। एक शादी में दावत के दौरान फिल्म डायरेक्टर डी पंचोली की नजर उन पर पड़ी। लाहौर में उनका आफिस था। पंचोली ने ओमप्रकाश को लाहौर आने का न्योता दिया। उन्होंने ओमप्रकाश को ‘दासी’ फिल्म के जरिये पहला ब्रेक दिया, जिसके बाद उन्होंने मुड़कर नहीं देखा।विज्ञापन

om prakash actor

उन्होंने अपने करियर में 300 से ज्यादा फिल्में की हैं। जिनमें दस लाख, अन्नदाता, चरणदास, साधु और शैतान, दिल-दौलत-दुनिया, अपना देश, चुपके-चुपके, जूली, जोरू का गुलाम, आ गले लग जा, प्यार किए जा, पड़ोसन, बुड्ढा मिल गया, शराबी,  भरोसा, तेरे घर के सामने, मेरे हम-दम मेरे दोस्त, लोफर, दिल तेरा दीवाना जैसी फिल्में शुमार हैं।

om prakash actor

ओम प्रकाश को भले ही फिल्मों में काम की कमी नहीं पड़ी लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब 14 साल की उम्र में वो 30 रुपए महीना काम करने को तैयार हो गए थे। ओम प्रकाश की लव स्टोरी भी बड़ी मजेदार थी। एक किस्सा शेयर करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे एक सिख लड़की से प्यार हो गया था लेकिन लड़की के घरवाले मेरे खिलाफ थे क्योंकि मैं हिंदू था। मेरी मां उनके घर बात भी करने गई लेकिन उसके घरवाले नहीं मानें। जिसके बाद हमने अलग हो जाने का फैसला किया।विज्ञापन

om prakash actor

एक्टिंग के साथ-साथ ओम प्रकाश ने फिल्म निर्माण में भी हाथ आजमाया। उन्होंने 60 के दशक में फिल्म संजोग, जहांआरा और गेटवे आफ इंडिया जैसी फिल्में बनाईं। ओम प्रकाश को दिल का दौरा पड़ने पर उन्हें मुंबई में ही लीलावती अस्पताल ले जाया गया, जहां वह कोमा में चले गए। 21 फरवरी, 1998 को उन्होंने आखिरी सांस ली।

Ramswaroop Mantri

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