शशिकांत गुप्ते इंदौर
इनदिनों सबकुछ ऑन लाइन हो रहा है।पहनना,ओढ़ना, बिछाना,शिक्षा,चिकित्सा,पूजापाठ,कवितापाठ,भाषणबाजी व्याख्यान, सब्जी,अनाज,यहां तक की खाना भी ऑन लाइन बुलवाया जा सकता है। पैसों का लेनदेन भी ऑन लाइन हो रहा है।सबकुछ ऑन लाइन हो रहा है,तो Fraud मतलब धोखा भी ऑन लाइन होने लगा है,यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है।धोखा देने वालें भी तो कम्प्यूटर चलना सीख ही रहें हैं।
हरतरह का कार्य ऑन लाइन हो रहा है।On शब्द का हिंदी अनुवाद होता है ऊपर,ऊपर से ऊपरी आदि।अत्याधुनिक तकनीक में तो ऑन शब्द का प्रयोग समय की बचत के रूप में हो रहा है।प्रायः ऑन शब्द का प्रयोग शासकीय,अर्धशासकीय,सहकारिता व्यापार और अन्य सभी क्षेत्रों में आपसी सामंजस्यता के साथ आर्थिक लेनदेन हो रहा है।रेल यात्रा के दौरान आरक्षण भी ऑन लाइन होता है, और चलती ट्रेन में यात्रा के दौरान गंतव्य स्थान के टिकिट का निर्धारित शुल्क होता है उसके अतिरिक्त On देकर आरक्षण क्षणों में हो जाता है।यह “ऑन” लेनदेन रिश्वत नहीं कहलाता है यह तो रेल कर्मी द्वारा त्वरित सेवा प्रदान करने का शुल्क है।प्रशासनिक कार्यो में दलाल मतलब मध्यस्थ आमजन की सुविधा के लिए उपलब्ध होतें हैं।यदि ये मध्यस्थ नहीं होंगे तो आमजन बेचारा प्रशासनिक व्यवस्था को समझ ही नहीं पाएगा। किसी भी तरह के प्रशासनिक कार्य करवाने के लिए आवेदन की प्रकिया की पूर्ति करना आमजन के बस की बात नहीं है।
प्रशासनिक कार्यो के लिए जो नियम बने हैं,उनकी पूर्ति करना मतलब आमजन को प्रशासन के सामने अपनी सम्पूर्ण जन्म कुंडली खोल कर दिखाना पड़ती है।प्रशासनिक व्यवस्था के अतंर्गत जितने भी विभाग बने हुए हैं, दलालों को तकरीबन सभी विभागों के नियम और नियमों को On लेनदेन के जरिये सुगम बनाने की सारी जानकारी कंठस्थ होती है। नियमो के अलावा प्रशासनिक व्यवस्था में जितने भी अधिकारी पदस्थ हैं।सभी अधिकारियों की “ऑन” में होने वाली आय की रकम और अधिकारियों की पाचन शक्ति की क्षमता दलालों को ज्ञात होती है।On शब्द का प्रयोग कानूनी दांवपेंचों को अन्य तरीके से सुलझाने की कुंजी के रूप में ही किया जाता है।ऑन शब्द का प्रयोग आर्थिक लेनदेन में “मन” से होता है।अधिकारी के मन से निश्चित की गई रकम ही सर्वोपरी होती है।ऑन का लेनदेन निश्चिंत होकर निर्धारित स्थान पर निःसंचोक किया जाता है।On लाइन पैसों के व्यवहार से सम्भवतः Black पैसा कहीँ दिखाई ही नहीं देगा।सभी दूर White ही दिखाई देगा।लेखक भी अपना लेख सभी स्नेहियों को On लाइन ही प्रेषित कर रहा है।
शशिकांत गुप्ते इंदौर





