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ममदानी की जीत पर बोली तस्लीमा-मुस्लीम का टेग हटना चाहिए

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नई दिल्ली,। न्यूयॉर्क के नवनिर्वाचित मेयर जोहरान ममदानी की जीत ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है। एक यहूदी-ईसाई बहुल देश में मुस्लिम की इस सफलता पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐसा कैसे संभव हुआ? मशहूर बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने इसे पश्चिमी देशों का पाखंड करार दिया। उन्होंने एक्स पर लिखा कि अमेरिका और यूरोप अल्पसंख्यकों को सत्ता में देखकर उन्हें पहला मुस्लिम, पहला हिंदू या पहला यहूदी कहकर प्रचारित करते हैं, जबकि सच्ची समानता तब होगी जब पहचान नहीं, बल्कि कार्य और योग्यता मायने रखेगी।

पश्चिम का आंतरिक चेहरा अभी भी धार्मिक और कट्टर है; सिर्फ बाहरी मुखौटा आधुनिक लगता है। ममदानी की जीत के बहाने तस्लीमा ने धर्म, राजनीति और दिखावटी उदारवाद पर गहरा प्रहार किया है। तस्लीमा ने ऐतिहासिक उदाहरण दिए। जॉन एफ. केनेडी के राष्ट्रपति बनने पर उनके कैथोलिक होने को लेकर भारी विवाद हुआ, क्योंकि इससे पहले सभी राष्ट्रपति प्रोटेस्टेंट थे—अमेरिका की बहुसंख्यक आबादी। बराक ओबामा भी प्रोटेस्टेंट थे, जबकि जो बाइडेन दूसरे कैथोलिक राष्ट्रपति बने, लेकिन उनके विश्वास पर कोई हंगामा नहीं हुआ। कारण? पहली बार का टैग हट चुका था। समाज अपवादों को धीरे-धीरे स्वीकार करता है।

इसी तरह, ममदानी को न्यूयॉर्क का पहला मुस्लिम मेयर कहा जा रहा है। ब्रिटेन में ऋषि सुनक पहले हिंदू प्रधानमंत्री बने, लंदन में सादिक खान पहले मुस्लिम मेयर। 1970 के दशक में न्यूयॉर्क के पहले यहूदी मेयर को भी यही टैग मिला। पश्चिम में सदियों से ईसाई सत्ता केंद्रित रहे, इसलिए अल्पसंख्यक की पहली सफलता हमेशा उछलती है। प्रवासन बढ़ने से दीवारें गिर रही हैं, भविष्य में पहला हिंदू या पहला बौद्ध मेयर भी ऐसे ही लेबल होंगे।

ममदानी के परिवार की पृष्ठभूमि रोचक है। पिता महमूद ममदानी गुजरात के खोजा शिया बारहइमामी समुदाय से हैं, जिनके पूर्वज ब्रिटिश काल में अफ्रीका गए। हार्वर्ड से पीएचडीधारी महमूद राजनीति विज्ञान के विद्वान हैं, किताबें लिख चुके हैं और धर्म नहीं मानते। मां मीरा नायर, प्रसिद्ध फिल्मकार, भी हार्वर्ड ग्रेजुएट और नास्तिक हैं। दो नास्तिक बुद्धिजीवियों का पुत्र धार्मिक कैसे हो सकता है? तस्लीमा मानती हैं कि ममदानी शायद मिथकों में विश्वास न रखते हों। एक दिन अमेरिका जैसे देशों में नास्तिकों को छिपाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

बांग्लादेश में नास्तिक कहने पर सिर कलम हो जाता है, अमेरिका में वोट नहीं मिलते। भविष्य में नीतियां और काम मायने रखेंगे, न कि धर्म। ममदानी समाजवादी हैं—अमीर-गरीब खाई मिटाना, नस्लवाद-पूंजीवाद विरोधी। मुस्लिम और समाजवादी विरोध के बावजूद जीत उनकी प्रगतिशीलता दर्शाती है। यह बदलाव दक्षिण एशिया तक पहुंचेगा, जहां नास्तिक गर्व से जी सकेंगे।

अमेरिका रूढ़िवादी बना हुआ है। कोई सरकारी अधिकारी खुले तौर पर नास्तिक नहीं कहता। केवल कांग्रेस सदस्य जैरेड हफमैन खुद को ह्यूमनिस्ट/एग्नॉस्टिक कहते हैं, न कि नास्तिक। दो नगर परिषद सदस्य—कैरोलिन अंफ्री और सेसिल बोथवेल—ही खुले नास्तिक हैं। यूरोप से धार्मिक उत्पीड़न झेलकर आए प्रवासियों ने अमेरिका बसाया, इसलिए धर्म स्वतंत्रता मूल्य है, लेकिन नास्तिकता अभी कलंक। यूरोप में नास्तिक प्रधानमंत्री संभव है, अमेरिका में नहीं।

कई नेता निजी तौर पर नास्तिक हैं, लेकिन छिपाते हैं। अल्पसंख्यक उम्मीदवार जैसे ममदानी मुस्लिम पहचान बनाए रखकर वोट सुरक्षित करते हैं। यहूदी नास्तिक खुद को सांस्कृतिक यहूदी कहते हैं; मुस्लिमों में सांस्कृतिक मुस्लिम की अवधारणा विकसित हो रही है

Ramswaroop Mantri

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