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चौथे दिन 476 जूनियर डॉक्टरों ने डीन को सौंपा इस्तीफा

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इंदौर

गुरुवार देर शाम जबलपुर उच्च न्यायालय के आदेश के बाद इंदौर के 476 जूनियर डॉक्टरों ने अपना सामूहिक इस्तीफा मेडिकल कॉलेज के डीन संजय दीक्षित को सौंप दिया। अब आने वाले दिनों में एमवायएच, सुपर स्पेशलिटी, एमटीएच, एमआरटीबी अस्पताल की व्यवस्थाएं और भी अधिक चरमरा जाएंगी।

मामले में बुधवार देर रात मांगों को लेकर जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के इंदौर जिला प्रतिनिधियों से प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट ने रेसीडेंसी कोठी में मुलाकात की। चर्चा के दौरान जूनियर डॉक्टर्स ने मंत्री सिलावट को समस्याओं से अवगत कराया। मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास कैलाश सारंग के समक्ष रखेंगे। समस्याओं का उचित निराकरण कराने का प्रयास करेंगे।

मंत्री ने जूनियर डॉक्टर्स को समझाइश देते हुए कहा कि कोरोना महामारी से जूझ रहे प्रदेश को अभी आप सभी के सहयोग की आवश्यकता है। डॉक्टर्स के सहयोग के बिना कोरोना के विरुद्ध यह लड़ाई अधूरी रहेगी। यह समय हड़ताल पर जाने के लिए उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जनता की सेवा सभी का सर्वोपरि कर्तव्य है, इसलिए अभी हमें समस्याएं छोड़कर एकजुटता और समर्पण के साथ कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए। जूनियर डॉक्टर्स ने भी इस पर सहमति जताई। एसोसिएशन के अन्य डॉक्टर्स के साथ इस विषय पर चर्चा कर विचार करने की बात कही।

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देर रात MGM कॉलेज के बाहर किया कैंडल जलाकर विरोध जताया।

देर रात MGM कॉलेज के बाहर किया कैंडल जलाकर विरोध जताया।

जिले के बाहर से बुलवाए डॉक्टर

व्यवस्थाएं बिगड़ती देख इन अस्पतालों के लिए बाहर से डॉक्टर बुलाए गए हैं। कोविड वार्डों में करीब 60 से 70 जूनियर डॉक्टरों की ड्यूटी रहती है, पर इनके नहीं पहुंचने से कोविड अस्पतालों के लिए अलग-अलग जगह पदस्थ डॉक्टरों को बुलाया गया। जरूरत पड़ी तो अन्य जगह पदस्थ डॉक्टरों को बुलाया जाएगा। 50 से ज्यादा डॉक्टरों को अन्य जिलों से बुलाया गया है।

शुक्रवार को एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजय दीक्षित ने भी हड़ताली जूनियर डॉक्टरों को नोटिस जारी कर तत्काल कार्यस्थल पर उपस्थित होने को कहा है। ऐसा नहीं करने पर उन पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, जूनियर डॉक्टर अब भी मांगों पर अड़े हैं। आज भी वे काम पर नहीं पहुंचे। उनका कहना है कि अब हमें व परिवार को डराया जा रहा है। हम मांगों को लेकर पीछे नहीं हटने वाले। मांगें नहीं मानी जाती हैं, तो हम सड़क पर प्रदर्शन करेंगे।

नहीं हो पा रही एंडोस्कोपी और ऑपरेशन

हड़ताल के कारण सबसे ज्यादा ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है। अस्पताल में 300 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं। एमवायएच में सबसे ज्यादा ब्लैक फंगस के ही मरीज हैं। यहां प्रतिदिन इन मरीजों के ऑपरेशन और एंडोस्कोपी हो रही है, लेकिन जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के कारण इस काम में परेशानी आ रही है।

Ramswaroop Mantri

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