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खून के आंसू रो रहे मध्‍य प्रदेश के प्याज किसान?

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 मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले के प्याज उत्पादक किसान एक बार फिर बदहाली के आंसू बहा रहे हैं. एक हफ्ता पहले प्याज के दामों में आई हल्की तेजी ने किसानों को राहत की उम्मीद जरूर दी थी, लेकिन यह खुशी ज्यादा दिन टिक नहीं सकी. निर्यात खुलने की खबर से बाजार में हलचल बढ़ी थी, मगर अब बांग्लादेश बॉर्डर बंद होने की सूचना मिलते ही प्याज के भाव फिर औंधे मुंह गिर गए हैं.

जिला मुख्यालय स्थित थोक मंडी में प्याज के दाम लगातार नीचे लुढ़क रहे हैं. जो प्याज कुछ दिन पहले 15 रुपये किलो तक बिक रहा था, वही, अब 1 रुपये किलो में बिकने को मजबूर है. हालात ऐसे हैं कि किसान मंडी तक प्याज लाने में जितना भाड़ा खर्च कर रहा है, उतनी कीमत भी उसे नहीं मिल पा रही. 

सिर्फ 1 रुपये किलो के भाव से बिके प्‍याज

मंडी में अपनी उपज लेकर पहुंचे किसान जगदीश सिंह ने NDTV से बातचीत में बताया कि वे 30 कट्टे प्याज लेकर आए थे, जो सिर्फ 1 रुपये किलो के भाव से बिके. उन्होंने कहा कि एक बीघा में प्याज की खेती पर कम से कम 30 हजार रुपये का खर्च आता है. ऐसे में किसान प्याज कैसे बेचे? मंडी लाने से बेहतर है कि प्याज गौशाला में डालकर गायों को खिला दिया जाए. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों पर ध्यान नहीं दे रही है. पहले शिवराज सिंह चौहान के समय 8 रुपये किलो के समर्थन मूल्य पर प्याज खरीदा गया था, जो अब नहीं मिल रहा. किसानों की उपज का MSP तय होना चाहिए. 

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खेतों और गोदामों में रखा प्याज हो रहा खराब 

कम दामों के चलते किसान प्याज रोककर रखने को मजबूर हैं, लेकिन यह इंतजार भी नुकसानदेह साबित हो रहा है. खेतों और गोदामों में रखा प्याज अब अंकुरित होने लगा है, जिससे नुकसान और बढ़ता जा रहा है. किसान दिलीप सिंह ने बताया कि वे गरोली गांव से ट्रैक्टर का 1500 रुपये भाड़ा देकर प्याज बेचने मंडी आए थे, लेकिन प्याज बिकने के बाद उनके हाथ में सिर्फ 1200 रुपये आए. यानी भाड़ा भी पूरा नहीं निकल सका. मुनाफे की तो बात ही दूर है. 

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50 किलो प्याज का बोरा 30 से 50 रुपये में बिक रहा

किसानों का कहना है कि लागत निकलना तो दूर, मेहनत की कीमत भी नहीं मिल रही. खाद, बीज, दवा और मजदूरी के बढ़ते खर्च के बीच मंडी में गिरते भावों ने हालात और खराब कर दिए हैं. पांचारुण्डी गांव के किसान रमेश ने बताया कि जिस प्लास्टिक के बोरे में प्याज भरा जाता है, उसकी कीमत ही 10 रुपये है, जबकि 50 किलो प्याज का बोरा 30 से 50 रुपये में बिक रहा है. ऐसे में खर्च निकालना नामुमकिन हो गया है. उन्होंने सरकार से निर्यात खोलने की मांग की, ताकि भाव सुधर सकें और नुकसान कम हो. 

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बॉर्डर खुलते ही निर्यात की संभावना बनी

आगर मालवा के थोक व्यापारियों का कहना है कि दाम गिरने की सबसे बड़ी वजह बांग्लादेश बॉर्डर का दोबारा बंद होना है. बॉर्डर खुलते ही निर्यात की संभावना बनी और बाजार में मांग बढ़ी, जिससे भाव ऊपर गए थे. लेकिन बॉर्डर बंद होते ही मांग खत्म हो गई और दाम धड़ाम से गिर गए. व्यापारी मुकेश का कहना है कि जब तक निर्यात नहीं खुलेगा, तब तक दाम बढ़ने की कोई उम्मीद नहीं है.

नया प्याज आने में अभी समय है, लेकिन किसानों के पास रखा पुराना प्याज अब खराब होने लगा है और उसमें अंकुर निकल रहे हैं, जिससे उसका सही दाम नहीं मिल पा रहा. निर्यात नीति में उतार-चढ़ाव और बाजार की अनिश्चितता का सबसे बड़ा खामियाजा प्याज किसान ही भुगत रहा है. अब देखना होगा कि सरकार इस संकट से उबरने के लिए किसानों के हित में क्या कदम उठाती है.

Ramswaroop Mantri

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