मुनेश त्यागी
आजकल हमारे समाज में एक बार फिर से अंधविश्वासों का साम्राज्य कायम करने की धूम मची हुई है। हर जगह देवी देवताओं और अंधविश्वासपूर्ण पाखंडों की बात हो रही है और कमाल यह है कि पूरा का पूरा शासक वर्ग, अंधविश्वासी , धर्मांध, गोदी मीडिया, अधिकांश अखबार और टेलीविजन इस काम में लगे हुए हैं। अफसोस की बात यह है कि हमारे अधिकांश मीडिया और अखबारों में ज्ञान विज्ञान और विज्ञान के प्रचार प्रसार पर चर्चा नहीं होती, बस सब जगह अंधविश्वास और धर्मांता की आंधी चल रही है और हमारी बहुत सारी भोली भाली जनता, इस अज्ञानता और अंधविश्वासों का शिकार होकर, इन धार्मिक और अंधविश्वासी ताकतों का आसान शिकार बन गई है और वह कई प्रकार से लुटने पिटने को मजबूर हो गई है, जैसे वह विवेकशून्य सी होकर रह गई है। उनमें से अधिकांश ने अपनी बुनियादी समस्याओं के कारणों का समाधान ढूंढने का विचार ही छोड़ दिया है।
मगर इसी के साथ-साथ हमारे समाज में और हमारे संविधान के प्रावधानों के अनुसार हमारे देश में ज्ञान विज्ञान का प्रचार प्रसार भी हो रहा है। अब लोग अज्ञानता और अंधविश्वासों से ऊबकर विवेक और लॉजिक की तरफ चल रहे हैं, उनमें ज्ञान विज्ञान का प्रचार प्रसार भी हो रहा है और वे चीजों को ज्ञान विज्ञान के आधार पर मान रहे हैं, समझ रहे हैं और अपनी बुनियादी समस्याओं के समाधान का समुचित समाधान ढूंढने की कोशिश भी कर रहे हैं। इस प्रयास में उन्हें बहुत सारे अंधविश्वासों से, धर्मांधताओं से, पाखंडों से और गलत मान्यताओं से मुक्ति और छुटकारा भी मिला है। इन्हीं सब के कारण जनता के एक हिस्से में इन सब अंधविश्वासों में और अज्ञानताओं में विश्वास करना छोड़ दिया है और उन्हें बहुत सारी मुक्तियां प्राप्त हुई है जिनका विवरण इस प्रकार है,,,,,,
१. मंदिर, मस्जिद में जाकर घंटा घडियालों को बजाने से मुक्ति,
२. सुबह के अखबारों, टीवी चैनलों में राशिफल की बकवास पढ़ने और सुनने से मुक्ति,
३. रोज-रोज के व्रत और त्योहारों से छुटकारा,
४. रोज-रोज मूर्तियों, तस्वीरों को भोग लगाने से बीमारी से छुट्टी,
५. त्यौहारों पर देवी-देवताओं की पूजा अर्चना से मुक्ति,
६. भांति भांति के तीर्थ स्थलों के चक्कर लगाने से मुक्ति,
७. चार धामों के चक्कर काटने से मुक्ति,
८. हर मंदिर के सामने नतमस्तक होने से निजात,
९. तमाम तरह की पूजा-अर्चनाओं से छुट्टी,
१०. शनिवार के दान-पुण्य से मुक्ति,
११. शनिवार को मिर्च और नींबू की बर्बादी से निजात,
१२. भांति भांति के जबरन लादे गए व्रतों से मुक्ति,
१३. डरावनी मूर्तियों और तस्वीरों को देखने से मुक्ति,
१४. आदमी को ऊंच-नीच, छोटा बड़ा और अछूत मानने की बीमारी से छुटकारा,
१५. धर्म, धर्मांधता, श्रद्धांध्दता और अंधविश्वासों से मुक्ति,
१६. कुंडलियों के चक्कर से छुटकारा और भूत प्रेत और ऊपरी बलाओं की बीमारियों से निजात,
१७. रोज-रोज के पूजा पाठ से होने वाली समय और पैसों की बर्बादी से मुक्ति,
१८. बिल्ली, नेवले या सवाल करने पर, घर लौट जाने की मानसिकता से बाहर,
१९. किसी कार्य की सफलता के लिए देवी देवताओं के सामने हाथ जोड़कर खड़े रहने से होने वाले समय की बर्बादी से निजात,
२०. नदियों, नहरों, तालाबों और कुंडों के चक्कर काटने से और गंदी नदियों में स्नान करने से मुक्ति,
२१. सत्यनारायण की कथा और उसके करवाने में होने वाले हजारों रुपए के खर्च से निजात,
२२. पंडितों, मुल्लाओं द्वारा फैलाए जा रहे नर्क में जाने के डर से मुक्ति,
२३. 1,3,5,7,9, 11,13, 21,51 की संख्याओं को अशुभ मानने से छुटकारा,
२४. स्वर्ग और जन्नत में मिलने वाली अप्सराओं, हूरों और गिलमान के लालच से मुक्ति,
२५. जीवन मरण, स्वर्ग नरक, मुक्ति और आत्मा के आवागमन के वहम से छुटकारा,
२६. जीवन के अमृत्व की बीमारी से मुक्ति,
२७. ओझा, ताबीज, गंडा, राख की चुटकी से बीमारियां ठीक होने वाली मानसिकता से छुटकारा,
२८. देवी देवताओं के जागरण पर होने वाले हजारों हजार रुपए की बर्बादी और उनकी मान्यताओं से मुक्ति,
२९. बाबाओं, मांओं, डेरा, पीर, पंडो की शरण में जाकर समस्याओं के हल हो जाने की मान्यता से मुक्ति
३०. रोज रोज जरूरी काम छोड़कर और थके हुए होने के बाद भी मंदिरों मस्जिदों के चक्कर काटने से मुक्ति और मंदिरों पर हजारों रुपए चढावा चढ़ाने से मुक्ति।
अंधविश्वास, धर्मांता, भगवान और देवी देवता एक हसीन और कोरी कल्पना के अलावा और कुछ भी नही हैं। ये नाम और शक्ति की स्थापना, कुछ स्वार्थी तत्वों ने अपने उदर पूर्ति, स्वार्थ, अयोग्यता, अज्ञानता, कमजोरी, कमी और अक्षमता को छिपाने के लिए और शोषण और अन्याय के निजाम को कायम रखने के लिए की है। ब्रह्माण्ड, प्रकृति, आदमी, जीव जंतुओं और पेड पौधों को बनाने या उत्पन्न करने में उनका कोई हाथ नही है। हां आदमी और औरत को महामूर्ख बनाने और ठगने के लिए इनका खूब प्रयोग और उपयोग किया जाता है और किया जा रहा है और कमाल यह है कि आदमी पढ़ लिख कर भी मूर्ख बन रहा है और इन अनपढ़ पुजारियों, पंडो और मुल्ला, मोलवियों और पादरियों के हाथों ठगा जा रहा है। अब उसकी नादानी पर सिर्फ दया ही आती है।
हकीकत यह है कि इस दुनिया में कुछ भी होने या न होने का, कोई न कोई कारण और संबंध होता है, यहां कुछ भी अकारण या अपने आप नही होता है। यहां कोई देवी, देवता, भगवान, अल्लाह, गॉड या किसी सुपरनेचुरल पावर होने में हमें कोई विश्वास नहीं है। यह हकीकत है कि इनका इस दुनिया में कोई नामोनिशान नहीं है। ये इस दुनिया में कहीं हैं ही नहीं, ये सिर्फ आदमी की कल्पनाओं में और कुछ धार्मिक किताबों में बसते हैं। इन धार्मिक किताबों को पढ़कर हमें पता चलेगा कि यहां सब कुछ अंधविश्वास और धर्मांता ही मौजूद है, इनमें ज्ञान विज्ञान विवेक या लॉजिक के आधार पर कोई बात नहीं कही गई है। यह सिर्फ और सिर्फ आस्था का मामला है, हमें इनका ध्यानपूर्वक अध्ययन करना चाहिए और इनके चंगुल से फंसने से बचना चाहिए और हमारी कथनी करनी में कोई फर्क नहीं होना चाहिए।
यहां इस दुनिया में जो कुछ भी दिखाई देता है, जो कुछ भी सुनाई देता है और जो भी प्राकृतिक रूप से मौजूद है, वह सब मनुष्य की मेहनत, परिश्रम से और प्राकृतिक शक्तियों के कारण होता है। हमें हर चीज को ज्ञान, विज्ञान, तर्क, विवेक, आलोचना, अन्वेषण, खोजबीन और संदेह की कसौटी पर परख कर देखना चाहिए। ऐसा करके हम सब देवी, देवताओं, खुदा, अल्लाह, गोड, भगवान की बीमारी, महामारी और मानसिक विकृति से बच जाएंगे और सुखी जीवन जी पाएंगे।
इसके बाद ज्ञान विज्ञान विष्लेषण और विवेक पर आधारित हमारी एक नई जिंदगी की शुरुआत होगी और फिर हम इस दुनिया में ज्ञान विज्ञान तर्क लॉजिक और विवेक का साम्राज्य कायम करने के अभियान में शामिल हो जाएंगे और तभी एक सुंदर और मानवीय दुनिया का निर्माण हो पाएगा। तभी यह दुनिया जीने लायक बन पाएगी। सच में ऐसी दुनिया में जीने में बहुत आनंद आयेगा।





