अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

आंख खोलकर देखें और शोषण की बेड़ी काटें

Share

घुसपैठिया और हिंदू राष्ट्र के छल की आड़ में पनपाये जा रहे कार्पोरेट साम्राज्यवाद का अहिंसक प्रतिकार करें।

साथियो,

सिर ऊंचा कर जीना हर इंसान का हक है। मगर हमारे पांव में बेड़ी है- जातिगत व धार्मिक भेदभाव की तथा आर्थिक शोषण की। मुट्ठी भर रईसों (कार्पोरेट) के पास देश की 90 प्रतिशत दौलत, कारखाने, खानें, मॉल, कारोबार व मीडिया है। इनके जरिये वे हमारी मेहनत का आधे से ज्यादा हिस्सा हड़प जाते हैं। देश के 70 प्रतिशत किसानों मजदूरों की प्रति व्यक्ति औसत आय राष्ट्रीय औसत का 1/8 है।

रईस कार्पोरेट ने नफरती संगठन खड़े कर रखे हैं। इनका काम है दंगा फसाद, लिंचिंग, मंदिर मस्जिद, घुसपैठिया, हिंदू राष्ट्र जैसे बखेड़े खड़े कर अवाम की आत्मा को मारना, एकता को तोड़ना, सत्ता हासिल करना और कार्पोरेट को शोषण की खुली छूट देना। पिछले 11 साल से इनके हाथ में देश की सत्ता है बुल्डोजर राज है, मंडी में किसान मजदूर की आवाज नहीं है।

हमें मुनाफा प्रधान उद्योगों की जगह रोजगार प्रधान उद्योग खड़े करने हैं, कार्पोरेट के कर्ज माफ करने की जगह किसानों मजदूरों को कर्ज से निजात दिलानी है, जनमुखी सरकार बनानी है, संस्थाओं को आजाद करना है धर्मस्थानों को दिखावा व नफरती नेटवर्क से आजाद करना है। हमारा पहला काम है आंख खोलकर देखना। जिस तरह हम आसमान को देखकर अपना वजूद भूल जाते हैं उसी तरह लोगों से मिलते समय अपना अहम भूल जायें। सामने वाले का जात धरम छोड़कर उसकी आत्मा में झांकें, उसका सुख दुख और शोषण देखें। आप उससे जुड़ जायेंगे। आप में सच्ची बात कहने और बगैर हथियारों के शोषण से लड़ने की ताकत आयेगी।

दो नफरती मुद्दे जिनके नाम पर प्रधानमंत्री व गृहमंत्री ध्रुवीकरण पैदा करते हैं, घुसपैठिया और हिंदू राष्ट्र, उनका हम दृढ़ता से प्रतिवाद करें।

घुसपैठिया का भ्रामक मुद्दा

घुसपैठिया का अर्थ होता है दूसरे देश से चोरी छुपे आया उपद्रवी या आतंकी। पूरे देश में खेती / मजदूरी करता, कबाड़ बीनता, झुग्गियों के अंधेरों में बसर करता एक भी घुसपैठिया नहीं है। घुसपैठियों को सरकारों की खुफिया एजेन्सियां भेजती हैं। हमारी सरकार समेत सभी देशों की सरकार यह करती हैं जो गलत है। लेकिन देश

के नागरिकों को झूठे शक के आधार पर जलील व आतंकित करना और बस्तियों को बुल्डोज कर जमीनें कार्पोरेट को देना सरकारों का एक षणयंत्र बन गया है। इससे उनको वोट मिलते हैं। असम, अहमदाबाद व अन्य जगह इस तरह कई मजदूर बस्तियों को उजाड़ा गया है और सारे देश में डर का माहौल पैदा किया गया है। इससे गुडगांव व दिल्ली में रहने वाले तमाम प. बंगाल व असम के मजदूर अपने राज्यों को चले गये। यह सरकारी अन्याय है।

हिंदू राष्ट्र का छल

सौ साल से आर एस एस व हिंदू महासभा हिंदू राष्ट्र का मुद्दा उठा रहे हैं और मदद कर रहे हैं हिंदुओं का शोषण करने वाले पूंजीपति वर्ग की। आजादी के पहले उनकी मदद थी अंग्रेजों को। इतना भद्दा झूठ कि शोषकों / कातिलों की चाकरी और हिंदू राष्ट्र का ढोंग। देश में कभी भी हिंदू राज या मुस्लिम राज नहीं रहा। तीन हजार साल देश में, जब ईसाई या मुसलमान नहीं थे, मुट्ठी भर सामंतों और सवर्ण जमींदारों, व्यापारियों की हुकूमत थी, 80 प्रतिशत कामगार (दलित, आदिवासी, पिछड़े व औरतें) धर्म के दायरे से बाहर थे। मुस्लिम बादशाहों के जमाने में सत्ता वर्ग में बहुतायत संपन्न सवर्ण हिंदुओं की थी। जो मुस्लिम बहुसंख्यक देश हैं वहां भी मुस्लिमों का राज नहीं है- लगभग सभी अमेरिका व यूरोप की शक्तियों के अधीन है। उनके तेल पर इन देशों का नियंत्रण है।

देश में 90 प्रतिशत मुसलमान व 80 प्रतिशत हिंदू मेहनतकश हैं। वे अपने भीतर नया नेतृत्व पैदा करें और सरकार के गलत कानूनों के खिलाफ सत्याग्रह की तैयारी करें।

फरेब

सच से बड़ी जहान में ताकत कोई नहीं प्यार के सरीखी दौलत कोई नहीं।

कण कण में रम रहा है, जन जन को देखता है सारे जहां का मालिक किसी एक का नहीं। गर्दन पे पांव रख के कहते हो बोलो राम हे राम कह दो इससे बढ़ कर सितम नहीं। शोषण का फंदा कसते हो कहके हिंदू राष्ट्र ऐसे फरेब जैसी लानत कोई नहीं।

मेहनतकशों की मेहनत पर राज करने वालों मेहनतकशों में कोई घुसपैठिया नहीं।

गड्ढे में गिर गया हूँ, ऊपर अहम का बोझ मालिक तेरा सहारा किसी और का नहीं।

विपिन त्रिपाठी, सद्भाव मिशन, बी-16, सर्वोदय एन्क्लेव, नई दिल्ली-110017

फोन: 09717309263, tripathivipin@yahoo.co.in

Ramswaroop Mantri

Add comment

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें