*उच्च न्यायालाय ने सेंचुरी के संगठित श्रमिकों के बुनियादी
मुद्दे को तकनीकी कारण से अन्य न्यायालयों में प्रस्तुत करने
का आदेश दिया |
*सेंचुरी के अहिंसक सत्याग्रही श्रमिकों को हिंसा अमान्य |
सेंचुर मिल्स, जो 1993 और 1996 से चलती आयी यार्न और डेनिम की टेक्सटाइल्स मिल्स, 1000 से
अधिक श्रमिक और करीबन 400 ठेका मजदुरों को रोजगार देती रही, आज विवादग्रस्त होना स्वभाविक
है| 10 से 25 सालोंतक इन मिल्स में पसीना बहाते श्रमिकों का ‘रोजगार के हक़` के लिए 2017 से,
(करीबन चार साल) चलता आया सत्याग्रह ,औद्योगिक न्यायालय ने वैध और संवैधानिक घोषित किया
था| सेंचुरी टेक्सटाइल्स एंड इंडस्ट्रीज लि. ने अगस्त 2017 में वेयरिट ग्लोबल को की थी, वह बिक्री
और उद्योग का हस्तांतरण उच्च न्यायालय तक फर्जी साबित हुआ था | सेंचुरी मिल्स की सत्राटी, तह.
कसरावद, जि.- खरगोन में स्थित संपत्ति की कीमत वेयरिट ने व्यावसायिक मूल्यांकन के द्वारा 426
करोड़ रु. बताने वाले कागजात पेश करने पर उच्च न्यायालय ने भी मंजूर की थी | वही संपत्ति 2.5
करोड़ रु. कीमत बताकर 1000 रु. के स्टम्प ड्यूटी की शासकीय तिजोरी से चोरी एवम् शासन से
धोखाधड़ी साबित हो चुकी थी |

उसके बाद मिल्स बंद करने की कोई क़ानूनी प्रक्रिया | (औद्योगिक विवाद अधिनियम,1947 के
तहत) न अपनाते हुए सेंचुरी कंपनी करीबन 1000 श्रमिकों को और कर्मचारियों को, म.प्र. उच्च
न्यायालय
व सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से, 44 महिनों तक, हर महीने 1.5 से 2 करोड तक, वेतन का भुगतान जारी
रखना पड़ा | श्रमिकों का कहना था, कुमारमंगलम बिरला, 450 करोड़ से 700 करोड़ रु. तक वार्षिक
मुनाफा कमाते हुए, कुछ पूंजीनिवेश के साथ दोनों मिल्स चालू करने तथा रोजगार सुरक्षित रखने की
मांग जारी रखी | सेंचुरी कंपनी में राज्य शासन की मंजूरी के बिना मिल्स बंद रखी और फिर जून
2021 में मंजीत ग्लोबल और मंजीत कॉटन को मिल्स बेचने का निर्णय घोषित किया, वह भी ₹62
करोड़ में।
मनजीत सिंह की कंपनियों को की गई बिक्री भी कई फर्जी आधार पर हुई है। दोनों मिल्स की
संपत्ति का ब्यौरा, मिल्स की भूमि की वर्गवारी, मिल्स की बिल्डिंग्स और अन्य संरचना का ब्यौरा और
शासकीय गाइडलाइन के अनुसार मूल्यांकन आदि में धांधली होकर, मूल्य कम आंकने से स्टांप ड्यूटी
भी कम देकर, फिर से शासकीय तिजोरी की चोरी की हकीकत सामने आई है। इसकी गहरी जांच और
कार्यवाही की श्रमिकों की मांग संबंधित शासकीय अधिकारियों की ओर से त्वरित होना जरूरी है। इस
संबंधी आवेदन रजिस्ट्रार, सब रजिस्ट्रार तथा जिलाधिकारी को पेश किया है तो उन्होंने त्वरित कार्यवाही
करते हुए अपने निष्कर्ष जाहिर करना जरूरी है।
श्रमिकों की याचिका पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने मात्र कानूनी तकनीकी मुद्दे पर संविधान
के अनुच्छेद 226 के तहत निजी कंपनी संबंधी निर्णय देना असंभव बताते हुए, अन्य न्यायालय तथा
अधिकृत संस्थाओं में प्रकरण दाखिल करने की अनुमति, श्रमिक जनता संघ को दी है। श्रमिक जनता
संघ, जो बहुसंख्य श्रमिकों की यूनियन होते हुए, VRS की राशि नकारकर रोजगार की मांग पर अहिंसक
सत्याग्रह चलाते रहे, उसके साथ हिंसक हमला करके हजारों रुपयों का, श्रमिकों ने अपनी कमाई से
खरीदा सामान जब्त करके अन्याय किया है। 3 अगस्त की कार्यवाही में न केवल गलत धारा लगाई
गई है बल्कि महिलाओं पर अत्याचार, बेइज्जती और सैकड़ों के पुलिस बल से अनुशासन न बरतते,
अशांति पैदा करने का काम शासन का श्रमिक विरोधी और अडानी-अंबानी के साथ पूंजीपतियों का
पक्षधर रुख ही साबित कर चुका है।
मध्य प्रदेश के श्रमिक एक नहीं, अनेक मिल्समें, उद्योगपतियों की मनमानी, श्रमिकों की छटनी,
मुनाफाखोरी के ही कारण थोपी जा रही बेरोजगारी आदि को चुनौती देते हुए कानूनी और अहिंसक
सत्याग्रही संघर्ष जारी रखेंगे। मध्य प्रदेश शासन किस पक्ष में हस्तक्षेप करती है और रोजगार बचाने
या खत्म करने में मदद रुप होती है, यह देखकर श्रमिक एकता बढ़ाएंगे।
संजय चौहान, सत्येंद्र यादव, श्याम भदाने, विकास गिरासे, मनीषा पाटिल, मेधा पाटकर,
सम्पर्क:- राजकुमार दुबे,





