हमारे देश की बेटियां
सब कुछ कर सकती हैं !
ओलंपिक में देश का शान बढ़ा सकती हैं !,
हमारा मान बढ़ा सकती हैं !
देश के लिए पदक ला सकती हैं !
देश का सिर ऊंचा कर सकती हैं !
अपने परिवार का गौरव बढ़ा सकती हैं !
वे मुक्केबाज बन सकती हैं !
वेट लिफ्टर बन सकती हैं !
तैराक बन सकती हैं !
धावक बन सकतीहैं !
बैडमिंटन की महान खिलाड़ा बन सकती हैं !
विश्व चैंपियन पहलवान बन सकती हैं !
हाकी में अब तक का रिकार्ड तोड़ सकती हैं !
परीक्षाओं में लड़कों को पछाड़ सकती हैं !
सर्वश्रेष्ठ स्कोर ला सकती हैं !
आईएएस में टॉप कर सकती हैं !
यह सब तो ठीक है ?
बस हमारे देश की बेटियां
अपनी प्रेमी नहीं चुन सकती हैं…. !
मनचाहा जीवन साथी नहीं ढूढ़ सकती है…! ऐसा करते ही वे
अपनी सीमा लांघ जाती हैं। !
जाति-धर्म की दीवारे तोड़ देती हैं !
संस्कृति-सभ्यता की ऐसी-तैसी कर देती हैं … !
बस इसकी उन्हें आजादी नहीं दी जा सकती है…!
और सब ठीक है….!
– सिद्धार्थ रामू,
-निर्मल कुमार शर्मा, ‘गौरैया एवम पर्यावरण संरक्षण ‘,प्रताप विहार,गाजियाबाद,




