अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

*फिलीस्तीन एकजुटता दिवस मनाने के गूढ़ार्थ*   

Share

  -सुसंस्कृति परिहार

17 जुन 2025 को देश के सारे वामपंथी दलों ने फिलिस्तीन के साथ एकजुटता कर राष्ट्रीय दिवस मनाया 

मानवता के हक़ और विश्व शांति के लिए अपनी प्रतिबद्धता की अभिव्यक्ति के लिए भूख और बदहाली से त्रस्त फिलिस्तीन के साथ एकजुटता की आम जनता से अपील की गई।यह आज के परिवेश में बहुत ज़रुरी है।

हमें यह याद रखना चाहिए कि यूक्रेन और रूस को युद्ध खत्म करने और बातचीत से समाधान निकालने और युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं की नसीहत देने वाले विश्व गुरु का अब नया नाम विष गुरु हो चुका है उन्होंने  संयुक्त राष्ट्र संघ में इजरायल और हमास के बीच युद्ध विराम के प्रस्ताव में मतदान में 18 पिद्दी देशों के साथ मतदान में भाग नहीं लिया (मतलब अप्रत्यक्ष रूप से ट्रंप के खौफ से इजरायल को समर्थन ही किया) जबकि 149 देशों ने पक्ष में मतदान किया और 14 देशों ने खिलाफ मतदान किया। विजय दलाल जी मानते हैं कि यह तीन ‘अ’अडानी, अंबानी और मोदी सरकार इस देश को लगभग बेच चुकी है। 

 आपरेशन सिंदूर के दौरान भी यह सच सामने आया जब डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि भारत और पाकिस्तान ने सीज़ फायर उनके कहने से किया है जिसके कारण भारतीय सेना मैं जमकर आक्रोश देखा गया तथा दुनिया भर के साथ देश में मोदी जी की भारी फजीहत हुई।अब तक ट्रम्प तेरह बार इस बात को कह चुका है किंतु सरकार की ओर से खंडन की अब तक खबर नहीं। इससे स्वत:सिद्ध होता है कि ट्म्प भारत को दबाव में रखकर दक्षिण पूर्व एशिया पर अपना दबदबा रखने की कोशिश में संलग्न है और भारत की ओर से उसे हरी झंडी दिखा दी गई है।

वर्तमान में जब अमेरिका की सरपरस्ती में पनपा इज़राइल ईरान को परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र बनने से रोकने के लिए उस राष्ट्र पर विगत पांच दिनों से दनादन हमलावर है। जब उसके प्रतिरोध में ईरान ने अपने अस्त्रों का उपयोग शुरू किया और इज़राइल को जिस तरह क्षति पहुंचाई है उससे अमेरिका घबराया हुआ है। इज़राइल के नेतान्याहू ने तो ईरान द्वारा ट्म्प को जान से मारने की बड़ी बात कह दी है।और ग्रीस में शरण ले ली है।

दूसरी ओर अमेरिका से पीड़ित मुल्क भी एकजुट हो रहे हैं। तमाम मुस्लिम राष्ट्र भी एक होने की चर्चाएं जोरों पर हैं।यह भी चर्चाओं में है कि चीन ईरान की हथियार भेज रहा है।कोरिया और अफ्रीका भी इज़राइल के विरुद्ध ईरान के साथ सहयोग करने तैयार हैं। यह सब ईरान की संजोई कुशल युद्ध नीति के कारण संभव हुआ है।

लेकिन हमारे विषगुरु अभी भी अमेरिकी राष्ट्रपति का राग अलाप रहे हैं। ऐसे विश्व युद्ध की संभावना से भरे इस युद्ध में उनकी जो भूमिका अब तक रही है वह घोर निंदनीय है और देश के भविष्य के बहुत नुकसानदायक होने वाली है।

इस मुश्किल वक्त में वामदलों ने फिलीस्तीन एकजुटता राष्ट्रीय दिवस मनाकर यह संदेश दिया है कि जिस तरह आज गाज़ा के हालात हैं या इससे पूर्व अफ़ग़ानिस्तान और ईराक के साथ हुआ। लगभग वही स्थितियां ईरान में इज़राइल अमेरिका की शह पर कर रहा है। इज़राइल की बर्बादी देख जी 7 की कनाडा में बैठक छोड़कर भागना और सीज़फायर हेतु फिर चौधरी बनने की कोशिश करना यह बता रहा है कि अमेरिका की हालत पस्त है।

इसलिए इस युद्ध की परिणति वीभत्स रुप ना ले ले। इसलिए फिलीस्तीन के बहाने एकजुटता की गई अपील महत्वपूर्ण है।काश! देशवासी इसे समझ पाते और सहयोग करते। क्योंकि फिलीस्तीन और ईरान दोनों देश हमारे शुभचिंतक रहे हैं। इस बार सरकार का रवैया बदला है।

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें