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संसद में सत्तापक्ष के सांसदों के प्रतिरोध पर संसद ठप

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सुसंस्कृति परिहार

इतिहास में पहली बार ये देखा गया कि आमतौर पर सदन में प्रतिपक्ष की बुलंद आवाज़ अक्सर कार्रवाई बाधित करती थीं किंतु सत्तावादी सांसद ये आचरण करेंगे कि लगातार पांचवें दिन प्रतिपक्ष की आवाज़ बंद करने सत्ता समर्थित सांसदों ने जो किया वह विपक्षी सांसदों के साथ साथ सदन की गरिमा और प्रजातांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।वस्तुत:यह हंगामा इस बात का प्रमाण है कि यह सरकार सच नहीं सुनना चाहती।चाहे वह अडानी का मामला हो या राहुल गांधी का कैम्ब्रिज में दिया प्रजातांत्रिक मूल्यों  व्याख्यान हो।इस बार स्पीकर ने तो हद कर दी वहां जो थोड़ा सा तीखा संवाद हुआ उस वीडियो की आवाज़ ही उड़ा दी।पहले राहुल के बोलने पर माईक बंद कर दिए जाते थे अब तो तमाम विपक्षी सांसद इस ज़द में आ गए।जबकि राहुल गांधी ने सांसद के नाते स्पीकर से मिलकर अपना जवाब देने की अनुमति भी मांगी थी।यह घटना स्वयं इस बात का जवाब है कि देश की संसद में सांसदों की आवाज़ दरकिनार की जा रही है। राहुल गांधी एक परिपक्व राजनेता बन चुके हैं उन्होंने अब तक जो भी कहा सच साबित हुआ है। इसलिए उनके प्रति अब अन्य दलों के नेताओं का ध्यान गया है वे उनके साथ जुटते जा रहे हैं इधर राहुल फोबिया बीजेपी पर सवार हो चुका है।जगह जगह राहुल माफी मांगों की बेवजह मांग उठाई जा रही है।अदालत भी अपनी बात कहने का हक देती है पर धन्य है स्पीकर महोदय जो एक सांसद को ये मौका भी नहीं देना चाहते। विदित हो संसद

 अंग्रेजी शब्द एंग्लो-नॉर्मन से लिया गया है और, जो 11 वीं शताब्दी के पुराने फ्रांसीसी पार्लमेंट, “चर्चा, प्रवचन”, पार्लर से है, जिसका अर्थ है “बात करना”।संसद में ही यदि बात नहीं होगी तो सांसदों का काम ही क्या बचेगा? ये बात और कि केंद्र में मंत्रियों की बड़ी संख्या के बावजूद वे तमाम काम साहिब के दबाव में करते हैं। जैसे केजरीवाल दूसरे विधायकों का हक छीनकर एक मंत्री के सिर 18 विभाग थोप देते हैं जो उनके मुताबिक चलें।ज्ञात हुआ है कि कथित तौर पर सुलझे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को भी रक्षा मंत्रालय के कई काम अडानी को देने वाले मामले में फंसा दिया गया और वे भी अब अनुराग ठाकुर ,स्मृति ईरानी की तरह अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं।  बहरहाल ऐसी खबरें मिल रहीं हैं कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान जिस तरह कोरोना षड्यंत्र से यात्रा रोकने की कोशिश की गई। संसद में बिगड़ती अपनी हालत से लोगों का ध्यान दूसरी ओर मोड़ने के लिए कोरोना के दूसरे वायरस का सहारा लेने की तैयारी में है।यह हंगामा थमने वाला नहीं है कांग्रेस ने अन्य दलों के साथ सत्याग्रह शुरू कर दिया है। इससे पूर्व भी इन सभी दलों ने संयुक्त रुप से ईडी के दफ्तर में एक ज्ञापन देने की कोशिश की वहां  बड़ी संख्या में पुलिस लगाई गई ज्ञापन नहीं देने दिया गया। ये कैसी सरकार है जिसे जनता के चुने सांसदों से डर लगता है जैसे वे अपराधी हैं।ऐसी तौहीन सांसदों की कभी कहीं दुनियां में नहीं देखी गई।

विश्व का  सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश  भारत आज किस हालात में इस सरकार ने पहुंचा दिया है पहले चौथे स्तंभ मीडिया  को खरीदा गया, फिर सांसद विधायक, फिर स्वायत्त संस्थाएं ,देश के बड़े रोजगार संस्थानों का निजीकरण ,बैंक लुटवाए अब चंद मज़बूती से खड़े विपक्षी नेताओं को खरीदने की कोशिश जब नाकाम हुई तो संसद ही बंद करवा दी। असंवेदनशीलता तो इतनी कि बीमार सोनिया जी को परिवार सहित और लालू यादव को परिवार सहित जबरिया छापामारी और घंटों ऊलजलूल सवालों से गुजरना पड़ा है।इन  जुझारू जांबाज राजनेताओं की हिम्मत को बहुत बहुत सलाम। उम्मीद की जानी  चाहिए ऐसे नेताओं, सर्वोच्च न्यायालय और आमजन की ताक़त लोकतंत्र के हत्यारों को समय आने पर सबक सिखाएगी।

Ramswaroop Mantri

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