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दवाओं का शायद सबसे विकल्प है अच्छी जीवनशैली

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एन. रघुरामन 

त्तर भारत में पिछले दो दिनों से बारिश और उसके बाद पारा गिरने से यहां तक कि देश का पश्चिमी हिस्सा भी शीतलहर की गिरफ्त में है, जिससे खांसी के कई केस आ रहे हैं और कई लोग घबरा रहे हैं। साफ दिख रहा है कि 2015 के बाद से 2021-22 की सर्दियों में पहली बार अधिकांश जगहों पर इस तरह के सर्द हालात हैं। इसी तरह 2015 में जब तापमान गिरा था, तो इंफ्लुएंजा के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई थी।

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अगर 2009 से 21 तक का पिछला दशक देखें, तो स्वास्थ्य के लिहाज से 2015 सबसे बुरा साल था। तब सर्दी-खांसी के सबसे ज्यादा मामले सामने आए थे। अब फिर से सर्दी के कारण लोगों को खांसी होने लगी है। मेडिकल विशेषज्ञों का मानना है कि जब पारा चढ़ेगा तो ये मामले ठीक हो जाएंगे। एक जनवरी के बाद से हर डॉक्टर के पास सर्दी और कुछ हद तक बुखार के मरीज ज्यादा आ रहे हैं।

डॉक्टर कहते हैं कि हममें से अगर किसी को गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण है, तो जाहिर तौर पर एहतियात जरूरी है। पर आम आदमी होने के नाते मैं सिर्फ यही सलाह दे सकता हूं कि घबराएं नहीं। मेडिकल से कोई भी दवा लेने से पहले कम से कम फोन पर डॉक्टर की सलाह लें। पर एक चीज है, जिसके बारे में डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत नहीं, वो है आपकी जीवनशैली।

मैंने महसूस किया है कि जीवनशैली किसी भी इंसान के संपूर्ण स्वास्थ्य में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विडंबना है कि आज की तेज भागती दुनिया में हर कोई अपना स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए दो मिनट नूडल वाले त्वरित समाधान की तलाश में है। मेरी राय में ‘क्लीन लाइफस्टाइल’ सबसे अच्छा समाधान है। सुबह नियमित व्यायाम पहला ऐसा उपाय है जो अधिकांश समस्याओं का समाधान है।

इससे न सिर्फ शरीर ताजी हवा के संपर्क में आता है, सुबह की धूप में बहुत सारे फायदे हैं। जल्दी सोना और जल्दी उठना मेरे जीवन का मंत्र रहा है। बचपन में सुबह दूध लाना पिता ने अनिवार्य बना दिया था, क्योंकि 1960 व 70 के दशक में कई जगह दूध की कमी थी। उसके बाद कॉलेज के दिनों में सुबह 7 बजे से क्लास शुरू हो जाती थी और वहां पहुंचने के लिए 6 बजे घर से निकलना होता था।

जब मैंने काम शुरू किया, तो मेरे सहकर्मी सुबह की शिफ्ट मुझसे बदल लेते थे और मेरा सुपरवाइजर जल्दी मान जाता था क्योंकि मैंने सुबह की पाली में कभी छुट्टी नहीं ली या बीमार होने की सूचना नहीं दी। उन दिनों एक ब्लैक एंड व्हाइट टीवी खरीदने तक की मेरी असमर्थता ने मुझे कभी देर रात जगाए नहीं रखा, ये अलग बात है कि दूरदर्शन में देर रात देखने के लिए कुछ रोचक नहीं आता था।

पिछले तीन दशकों में जब जीवन में समृद्ध हआ तो किसी तरह पेट्स मेरी जिंदगी में आ गए और आप चाहें या ना चाहें, उन्हें सुबह की सैर की जरूरत होती है। और इस तरह जल्दी उठना और जल्दी सोना अब तक मेरी आदत है। कोविड के कारण कुछ दिनों पहले तक लोग मॉल नहीं जा रहे थे, लेकिन अब जाने लगे हैं, पर कुछ लोग इसके बजाय वीकेंड पर किसी समूह के साथ ट्रेकिंग और बर्ड वॉचिंग कर रहे हैं।

मैं पिछले दो हफ्तों में दो बार उनके साथ शामिल हुआ। इससे मेरी आंखों को वो सुकून मिला, जिसकी तलाश में मॉल्स में विंडो शॉपिंग करते हैं। प्रकृति के बीच सैर से मैं ग्रामीण किसानों के संपर्क में आया, जो फलों के अलावा अनोखी-ताजी, लेकिन नियमित सब्जियां भी बेचते हैं। पिछले हफ्ते मेरी ‘स्नैकिंग’ छूट गई और ‘फ्रूटिंग’ ने जगह ले ली।

फंडा यह है कि ऐसी जीवनशैली जिसमें कसरत, अच्छा आराम, सही खाना, धूप के साथ शुद्ध हवा व पानी हो, ये आपके द्वार पर दवाओं का शायद सबसे अच्छा विकल्प है। अगर भरोसा नहीं, तो जरा याद करें कि पूर्वज कैसे रहते थे। आपको अपने जवाब मिल जाएंगे।

Ramswaroop Mantri

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