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1700 साल बाद जारी हुई सेंटा क्लॉज की फोटो

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क्रिसमस नजदीक है और सेंटा क्लॉज की चर्चा भी शुरू हो गई है. पर क्या आपने कभी सोचा है कि सेंटा क्लॉज वास्तव में कौन थे, कैसे दिखते थे? सहज जवाब होगा कि कैसे देख सकते हैं, जब 1700 साल पहले सेंटा क्लॉज की मौत हो चुकी है. हालांकि, अब यह असंभव नहीं रहा. वैज्ञानिकों ने सेंटा क्लॉज की एक तस्वीर तैयार करने में कामयाबी हासिल की है. आइए जान लेते हैं कि देहांत के सैकड़ों साल सेंटा क्लॉज की तस्वीर कैसे बनी, कहां से आए और कैसे बन गए सेंटा?

क्या आपके दिमाग में भी ये सवाल रहता है कि क्रिसमस पर तोहफे बांटने वाले सांता क्लॉज का असली चेहरा कैसा होगा? वैज्ञानिकों ने अब इस रहस्य से पर्दा उठा दिया है। करीब 1,700 साल बाद सांता क्लॉज़ के प्रेरणा स्रोत, संत निकोलस ऑफ मायरा का असली चेहरा सबके सामने आ गया है। उनके स्कल से डेटा का विश्लेषण करने के बाद यह कार्य संभव हुआ है। न्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों ने अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग कर “फोरेंसिक रूप से” संत निकोलस का चेहरा पुनर्निर्मित किया है।

सेंट निकोलस एक बिशप थे, जिनसे आधुनिक सेंटा क्लॉज का उदय हुआ. न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि मायरा के संत निकोलस की मौत के 1700 साल बाद उनकी खोपड़ी के डाटा का विश्लेषण कर उनका चेहरा बनाया गया है. इसमें आधुनिकतम तकनीक का इस्तेमाल कर शोधकर्ताओं ने फोरेंसिक तरीके से संत निकोलस का चेहरा बनाने में कामयाबी हासिल की है.

संत निकोलस मायरा के एक प्रारंभिक ईसाई संत थे। मायरा का जन्म तीसरी शताब्दी में हुआ था। संत निकोलस मायरा अपनी उदारता और उपहार बांटने की आदत के लिए फेमस थे। उनकी इसी आदत के चलकर डच लोक चरित्र ‘सिंटरक्लास’ का आधार बनी। समय के साथ यह चरित्र अंग्रेजी फादर क्रिसमस के साथ मिलकर आज का सांता क्लॉज़ बन गया। मायरा के संत निकोलस की मृत्यु 343 ईस्वी में हुई थी। संत की लोकप्रियता के बावजूद, अब तक उनका कोई सटीक चित्रण नहीं किया गया था।

इंस्टाग्राम पर शेयर की गई पोस्ट में चेहरा बनाने वालों में शामिल प्रमुख शोधकर्ता सीसेरो मोराएस Cicero Moraes) ने बताया है कि सेंट निकोलस के चेहरे को को चौड़े माथे, पतले होंठ और गोल नाक वाले चेहरे के रूप में चित्रित किया गया है. इसकी 3डी इमेज में उनका चेहरा मजबूत और कोमल दोनों रूपों में सामने आया है.

1950 के डाटा का विश्लेषण किया

इस चेहरे को बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने साल 1950 में लुइगी मार्टिनो की ओर से एकत्रित किए गए डाटा का इस्तेमाल किया. सीसेरो मोराएस ने कहा कि इस डाटा का इस्तेमाल कर हमने पहले खोपड़ी को 3डी आकार में फिर से बनाया. इसको हमने एनटोमिकल डिफॉर्मेशन टेक्निक से पूरा किया. इस तकनीक में किसी जीवित व्यक्ति का सिर किसी दूसरी खोपड़ी से मिलाया जाता है. ऐसे ही सेंट निकोलस की खोपड़ी का मिलते-जुलते वाले व्यक्ति की खोपड़ी से मिलान किया गया. इससे जो अंतिम चेहरा सामने आया वह इन सभी सूचनाओं का ही प्रक्षेप है.

साहित्य में चित्रित चेहरे जैसी छवि

सीसेरो मोराएस का कहना है कि चेहरे की 3डी इमेज साहित्य में प्रतिबिंबित सेंटा क्लॉज के शुरुआती चित्रण से मिलता है. जैसे कि साल 1823 की कविता ट्वास द नाइट बिफोर क्रिसमस (Twas The Night Before Christmas) में सांता क्लॉज को गुलाबी गालोंं, चौड़े माथे और एक चेरी जैसी नाक वाला बताया गया है. 3डी इमेज से बनाया गया चेहरा इससे मिलता-जुलता है. उन्होंने कहा कि उनकी खोपड़ी काफी सुदृढ़ वाली है, जिससे एक मजबूत चेहरे का जन्म हुआ.

यह बताता है कि उनका चेहरा कैसा रहा होगा. हॉरिजोन्टल एक्सिस पर इसके डायमेंशन्स औसत से काफी बड़े हैं. घनी दाढ़ी के साथ मिलकर खोपड़ी की यह विशेषता उस व्यक्ति की छवि के बहुत करीब पहुंच जाती है, जैसी सेंटा क्लॉज की छवि हम अपने मन में बनाते हैं.

Santa Claus Face

सेंट निकोलस की मौत 343 ईस्वी में ही हो गई थी.

सेंट निकोलस के बारे में मिली जानकारी

सेंट निकोलस के शरीर के अवशेषों से खुलासा हुआ कि उनकी स्पाइन और पेल्विस में क्रोनिक आर्थराइटिस की समस्या थी. इसके अलावा उनकी खोपड़ी काफी स्थूल रही होगी, जिससे उनको आए दिन सिर दर्द की समस्या से जूझना पड़ता रहा होगा. वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि सेंट निकोलस मुख्यतः पौधोंं पर आधारित आहार का सेवन करते रहे होंगे.

ऐसे बन गए सेंटा क्लॉज

सेंट निकोलस की मौत 343 ईस्वी में ही हो गई थी, तब उनका कोई फोटो लेने का प्रश्न ही नहीं था. वह अच्छा व्यवहार करने वाले बच्चों को उपहार देने के लिए जाने जाते थे. समय के साथ उनका चरित्र इंग्लिश फादर क्रिसमस के साथ मिक्स हो गया और आधुनिक सेंटा क्लॉज के रूप में जाने जाने लगे. ध्यान देने की बात है कि मौत के बाद शुरू में सेंट निकोलस को मायरा में दफनाया गया था. बाद में उनकी हड्डियों को इटली के बारी में ले जाकर दफनाया गया, जहां आज भी मौजूद हैं. सेंट निकोलस की इतनी प्रसिद्धि के बावजूद उनके बारे में सही चित्रण अब तक नहीं हो पाया था.

Ramswaroop Mantri

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